'महाभारत' के अश्वत्थामा से 'गजनी' के विलेन तक... इन यादगार किरदारों से 40 साल तक छाए रहे प्रदीप रावत

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है, जिसकी मौजूदगी पर्दे पर आते ही किरदार जीवंत हो उठता था. अपनी बुलंद आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.

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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है, जिसकी मौजूदगी पर्दे पर आते ही किरदार जीवंत हो उठता था. अपनी बुलंद आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे अभिनेता का मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में इलाज चल रहा था. उनके निधन की खबर ने बॉलीवुड से लेकर दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग तक शोक की लहर दौड़ा दी है.

'महाभारत' से शुरू हुआ यादगार सफर

21 जनवरी 1952 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में जन्मे प्रदीप रावत ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत छोटे पर्दे से की थी. बी.आर. चोपड़ा के चर्चित धारावाहिक 'महाभारत' में उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाकर दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा. उनके सशक्त संवाद और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने फिल्म 'मेरी जंग' से बॉलीवुड में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी मेहनत के दम पर इंडस्ट्री में मजबूत पहचान बनाई.

हर किरदार में छोड़ी अलग छाप

प्रदीप रावत का फिल्मी सफर कई यादगार किरदारों से भरा रहा. 'सरफरोश' और ऑस्कर नामांकित फिल्म 'लगान' में निभाया गया उनका अभिनय आज भी याद किया जाता है. 'लगान' में देवा सिंह सोढ़ी का किरदार हो या फिर आमिर खान स्टारर 'गजनी' का खौफनाक विलेन, उन्होंने हर भूमिका को अपनी अलग शैली से अमर बना दिया. दिलचस्प बात यह रही कि तमिल फिल्म 'गजनी' और उसके हिंदी रीमेक दोनों में उन्होंने एक ही खलनायक का किरदार निभाया. इसके अलावा 'द हीरो: लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई', 'ग्रैंड मस्ती', 'सिंह इज़ ब्लिंग' और 'छावा' जैसी फिल्मों में भी उनके अभिनय को खूब सराहा गया.

साउथ सिनेमा में भी बने सुपरहिट विलेन

बॉलीवुड के साथ-साथ प्रदीप रावत ने दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी अपनी अलग पहचान बनाई. निर्देशक एस.एस. राजामौली की तेलुगु फिल्म 'साइ' में निभाया गया भिक्षु यादव का किरदार उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुआ. इस भूमिका ने उन्हें साउथ इंडस्ट्री के सबसे चर्चित खलनायकों में शामिल कर दिया और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट विलेन (तेलुगु) अवॉर्ड भी मिला. इसके बाद उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम भाषा की सौ से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और कई प्रतिष्ठित सम्मान अपने नाम किए.

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