Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कई अहम जानकारियां साझा की हैं. उन्होंने पाकिस्तान के सरगोधा और किराना हिल्स इलाके में भारतीय सैन्य गतिविधियों से लेकर ऑपरेशन की रणनीति, इसके तीन चरणों और पाकिस्तान की खुफिया क्षमताओं तक पर बात की. चौहान के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक दिन की कार्रवाई नहीं था, बल्कि तीन चरणों में आगे बढ़ा सैन्य अभियान था. उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान की ओर से भारतीय कैरियर बैटल ग्रुप की लोकेशन को लेकर दी जा रही जानकारी वास्तविक स्थिति से काफी अलग थी.
सरगोधा में रडार की तलाश के लिए भेजे गए थे लोइटरिंग मिशन
पूर्व CDS अनिल चौहान के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सरगोधा इलाके में कई लोइटरिंग मिशन भेजे थे. सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में किराना हिल्स स्थित है, जहां पाकिस्तान की परमाणु सुविधाएं होने की बात कही जाती है. इन मिशनों का मुख्य उद्देश्य सरगोधा और आसपास के क्षेत्र में मौजूद रडार सिस्टम का पता लगाना था. उन्होंने बताया कि लोइटरिंग मिशन करीब दो घंटे तक किसी इलाके में मंडरा सकते हैं. यदि इस दौरान कोई लक्ष्य नहीं मिलता, तो मिशन समाप्त होने के बाद वे नीचे गिर जाते हैं. चौहान के अनुसार, संभव है कि ऐसा ही कोई लोइटरिंग मिशन किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से जा टकराया हो.
किराना हिल्स से धुआं निकलने की तस्वीरों का भी किया जिक्र
पूर्व CDS ने कहा कि संभवत: इसी वजह से बाद में यह सवाल उठा कि क्या भारत ने किराना हिल्स को भी निशाना बनाया था. उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी मीडिया में ऐसी कुछ तस्वीरें सामने आई थीं, जिनमें किराना हिल्स इलाके से धुआं निकलता दिखाई दे रहा था. हालांकि, चौहान की बात के मुताबिक, यह किसी लोइटरिंग मिशन के वहां गिरने की वजह से भी हो सकता है.
सरगोधा पर हमले की मिली थी मंजूरी
अनिल चौहान ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से बातचीत का अनुरोध किए जाने के बाद वायुसेना प्रमुख ने उनसे सरगोधा पर हमले की अनुमति मांगी थी. उन्होंने हमले को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी और दो अन्य लक्ष्यों की पहचान करने के लिए भी कहा. इनमें एक लक्ष्य स्कर्दू था. हालांकि, बाद में मौसम खराब होने के कारण रणनीति में बदलाव करना पड़ा और लक्ष्य को भोलारी कर दिया गया. इससे साफ होता है कि ऑपरेशन के दौरान परिस्थितियों के अनुसार सैन्य योजना में बदलाव भी किए गए.
ऑपरेशन सिंदूर को क्यों बताया अलग सैन्य अभियान?
पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर की तुलना उरी और पुलवामा के बाद की गई सैन्य कार्रवाइयों से भी की. उनके मुताबिक, इस अभियान में रणनीति को लेकर किसी तरह की अनिश्चितता या हिचकिचाहट नहीं थी. उरी हमले के बाद भारत ने जमीनी सर्जिकल स्ट्राइक की थी, जबकि पुलवामा हमले के बाद एयरस्ट्राइक का विकल्प अपनाया गया था. ऑपरेशन सिंदूर में कम ऊंचाई वाले एयरस्पेस का इस्तेमाल करते हुए अलग रणनीति अपनाई गई. इसका उद्देश्य आमने-सामने की लड़ाई का जोखिम कम करना, कार्रवाई को सटीक रखना और पाकिस्तान को जवाबी कार्रवाई के लिए कम से कम समय देना था.
तीन चरणों में चला ऑपरेशन सिंदूर
जनरल अनिल चौहान के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर को तीन प्रमुख चरणों में देखा जा सकता है. पहला चरण 6-7 मई को शुरू हुआ, जब भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर कार्रवाई की. दूसरा चरण 8-9 मई के दौरान सामने आया. इस दौरान भारत और पाकिस्तान दोनों ने ड्रोन का इस्तेमाल किया. दोनों पक्षों की कोशिश एक-दूसरे की सुरक्षा व्यवस्था को परखने और भ्रमित करने की रही. तीसरे चरण में 10 मई को पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ हमला किया गया. इसके जवाब में भारतीय सेना और वायुसेना ने कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इस तरह ऑपरेशन सिंदूर को केवल एक दिन की कार्रवाई के बजाय कई चरणों में आगे बढ़ा सैन्य अभियान बताया गया.
सीजफायर को लेकर ट्रंप के दावे पर भी बोले चौहान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान सीजफायर में मध्यस्थता करने के दावे पर भी पूर्व CDS ने अपनी बात रखी. चौहान के मुताबिक, दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच बातचीत के बाद सीजफायर को लेकर फैसला हुआ था. उन्होंने कहा कि DGMO ने बताया था कि वह करीब 3 बजे तक उपलब्ध नहीं हैं और इसके बाद शाम 5 बजे निर्णय लिया गया. चौहान ने यह भी कहा कि उन्हें सीजफायर में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नजर नहीं आती. उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि अमेरिकी पक्ष को दोनों देशों के बीच हुए फैसले की जानकारी सार्वजनिक घोषणा से पहले कैसे मिल गई. उनका कहना था कि यह जानकारी भारतीय पक्ष से लीक नहीं हुई थी और संभव है कि दूसरी तरफ से यह सूचना बाहर गई हो.
पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों को लेकर जानकारी कमजोर थी
पूर्व CDS ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की भारतीय सैन्य गतिविधियों को समझने की क्षमता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में भी पाकिस्तान की स्थिति को लेकर जानकारी काफी कमजोर थी. चौहान के अनुसार, पाकिस्तान की रोजाना की ब्रीफिंग में अरब सागर में भारतीय कैरियर बैटल ग्रुप की लोकेशन बताई जाती थी. लेकिन जब उन्होंने वेस्टर्न नेवल कमांड से वास्तविक स्थिति की जानकारी ली तो पता चला कि भारतीय कैरियर बैटल ग्रुप बताई गई लोकेशन से करीब 100 से 300 नॉटिकल मील दूर था.
विदेशी स्रोतों पर निर्भरता का किया दावा
अनिल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान को भारतीय कैरियर बैटल ग्रुप की स्थिति को लेकर या तो गलत इनपुट मिल रहे थे या उसकी जानकारी सटीक नहीं थी. उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ऐसी सूचनाओं के लिए विदेशी स्रोतों पर काफी निर्भर था. पूर्व CDS के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के लॉन्ग रेंज मैरीटाइम एयरक्राफ्ट ने उड़ान नहीं भरी थी. ऐसे में भारतीय नौसैनिक गतिविधियों को लेकर उसकी जानकारी की सटीकता पर सवाल उठना स्वाभाविक था. ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चौहान के इन बयानों से भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के दौरान अपनाई गई रणनीति और दोनों पक्षों की तैयारियों की एक अलग तस्वीर सामने आती है.
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