Post Office Gram Priya Scheme: आज के आर्थिक माहौल में महंगाई लगातार बढ़ रही है और शेयर या म्यूचुअल फंड जैसी जगहों में निवेश करने पर उच्च रिटर्न के साथ जोखिम भी रहता है. ऐसे में निवेशक अक्सर ऐसी योजना ढूंढते हैं जो सुरक्षित हो और निश्चित लाभ दे. इसी जरूरत को देखते हुए भारतीय डाकघर ने ग्राम प्रिया स्कीम पेश की है. यह योजना रूरल पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस (RPLI) के तहत आती है और मनी-बैक पॉलिसी के रूप में निवेशक को न केवल सुरक्षा देती है बल्कि तय समय के बाद गारंटीड बोनस और अच्छे रिटर्न भी प्रदान करती है.
ग्राम प्रिया स्कीम की कुल अवधि 10 साल है. अगर निवेशक हर महीने निर्धारित राशि जमा करता है, तो 10 साल पूरे होने पर मैच्योरिटी राशि के रूप में लगभग 7.25 लाख रुपये का फंड तैयार हो जाता है. इस योजना में न्यूनतम बीमा राशि 10,000 रुपये और अधिकतम 5 लाख रुपये तय की गई है. डाकघर इस योजना में हर वर्ष प्रति हजार रुपये के बीमा राशि पर बोनस प्रदान करता है. समय के साथ जुड़ने वाला बोनस और मनी-बैक किस्तों के साथ कुल मैच्योरिटी राशि निवेशक को प्राप्त होती है.
मनी-बैक सुविधा से नियमित लाभ
ग्राम प्रिया स्कीम में निवेशक को बीच-बीच में मनी-बैक किस्तें मिलती रहती हैं. यह सुविधा छोटे और बड़े घरेलू खर्चों को पूरा करने में मदद करती है. निवेशक योजना की अवधि के दौरान नियमित लाभ का अनुभव करता है, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत रहती है और योजना में लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखना आसान हो जाता है.
जीवन बीमा के साथ आर्थिक सुरक्षा
ग्राम प्रिया केवल निवेश योजना नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण जीवन बीमा भी प्रदान करती है. यदि पॉलिसीधारक की पॉलिसी अवधि के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो नॉमिनी को तुरंत पूरी बीमा राशि मिल जाती है. परिवार को बचे हुए प्रीमियम की चिंता नहीं करनी पड़ती और उन्हें मैच्योरिटी तक इंतजार करने की आवश्यकता नहीं होती. यह योजना ग्रामीण परिवारों को वित्तीय सुरक्षा का दायरा प्रदान करती है और लंबे समय में उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाती है.
नियम और शर्तों को समझना जरूरी
इस योजना में निवेश शुरू करने से पहले नियम और शर्तों को समझना बेहद महत्वपूर्ण है. ग्राम प्रिया स्कीम सरकार द्वारा संचालित है, इसलिए बाजार के उतार-चढ़ाव का इस पर असर नहीं पड़ता. योजना 10 साल की लंबी अवधि की है और नियमित प्रीमियम जमा करना आवश्यक है. अगर प्रीमियम में चूक होती है, तो पॉलिसी लैप्स हो सकती है और निवेशक अपने पूर्ण लाभ से वंचित रह सकता है. योजना में मैच्योरिटी से पहले पैसे निकालने की सुविधा सीमित है, इसलिए इसे अनुशासित और फिक्स्ड सेविंग प्लान के रूप में लेना ही सुरक्षित है.
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