पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. प्रशासन के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच एक प्रदर्शनकारी नेता का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में वह भारत से मानवीय सहायता की अपील करते हुए नजर आ रहे हैं. हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी संगठन के नेता ने क्षेत्र में खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कमी का दावा करते हुए कहा कि वहां के लोगों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
'राशन और दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं लोग'
वायरल वीडियो में कथित तौर पर नेता लोगों की परेशानियों का जिक्र करते हुए कहते हैं कि क्षेत्र में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है. उनका दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और प्रशासनिक सख्ती के कारण आम नागरिकों के सामने भोजन और दवाइयों जैसी बुनियादी जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है. इसी के साथ उन्होंने भारत से सहायता की अपील भी की. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि किसी स्वतंत्र स्रोत से नहीं हुई है.
एलओसी खोलने की मांग भी हुई तेज
रावलकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित एक बड़ी जनसभा के दौरान प्रदर्शनकारी नेता ने कथित तौर पर लोगों से पूछा कि क्या उन्हें लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) की ओर कूच करना चाहिए. वहां मौजूद भीड़ ने इसका समर्थन करते हुए आगे बढ़ने के नारे लगाए. उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन लोगों की मांगों का समाधान करने के बजाय बल प्रयोग करता है, तो आंदोलन और तेज हो सकता है. इसके अलावा पुंछ और डोडा सेक्टर के जरिए एलओसी खोलने की मांग भी सामने रखी गई, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल सके.
पिछले महीने से जारी हैं विरोध प्रदर्शन
पीओके में बीते कई सप्ताह से पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. शुरुआत में ये आंदोलन स्थानीय समस्याओं, महंगाई और प्रशासनिक सुधारों की मांग को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन समय के साथ इनका स्वरूप बदलता दिखाई दे रहा है. हाल ही में ईदगाह मैदान में आयोजित एक बड़ी रैली में कुछ प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान से अलग पहचान और अधिक राजनीतिक अधिकारों की मांग करते हुए नारे लगाए. इससे यह संकेत मिला कि आंदोलन अब केवल आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है.
स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच बढ़ती दूरी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा घटनाक्रम स्थानीय आबादी और प्रशासन के बीच बढ़ते अविश्वास को दर्शाता है. उनका कहना है कि क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था काफी हद तक इस्लामाबाद के नियंत्रण में होने के कारण स्थानीय लोगों की राजनीतिक भागीदारी सीमित महसूस की जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती और आंदोलन से जुड़े संगठनों के खिलाफ कार्रवाई ने क्षेत्र में असंतोष को और बढ़ाया है.
JAAC पर प्रतिबंध के बाद और बढ़ा विवाद
स्थिति उस समय और अधिक संवेदनशील हो गई जब 5 जून को पाकिस्तानी अधिकारियों ने संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को गैरकानूनी संगठन घोषित कर दिया. इसके साथ ही संगठन पर आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप भी लगाए गए. इस फैसले के बाद क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों की तीव्रता बढ़ गई और प्रशासन तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आने लगीं.
रिपोर्ट में राजनीतिक नियंत्रण पर उठे सवाल
हाल में जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि इस्लामाबाद लंबे समय से पीओके और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) की राजनीति पर प्रभाव बनाए हुए है. रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक पार्टियों का इन क्षेत्रों में लगातार दबदबा रहा है, जबकि स्थानीय राजनीतिक संगठनों की भूमिका सीमित होती गई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वहां के चुनावी नतीजों का पैटर्न लंबे समय से लगभग एक जैसा रहा है, जिसे लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं.
वीडियो और दावों की नहीं हुई स्वतंत्र पुष्टि
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है. ऐसे में इन दावों को सत्यापित होने तक सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए. हालांकि, पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन और वहां के राजनीतिक हालात लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं.
ये भी पढ़ें-इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरे पर रवाना हुए पीएम मोदी, इंडो-पैसिफिक रणनीति को मिलेगी मजबूती