"इससे हर भारतीय आहत", CJI गवई पर जूता फेंकने की घटना पर पीएम मोदी ने दी प्रतिक्रिया

PM Modi On CJI Gavai: सुप्रीम कोर्ट परिसर जैसी संवेदनशील जगह पर उस वक्त सनसनी फैल गई जब भारत के मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस बी.आर. गवई पर हमले की कोशिश की गई. यह न केवल एक उच्च पदस्थ व्यक्ति पर हमला था, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव, न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला था.

PM Modi reacted to the incident of shoe being thrown at CJI Gavai
Image Source: ANI/ File

PM Modi On CJI Gavai: सुप्रीम कोर्ट परिसर जैसी संवेदनशील जगह पर उस वक्त सनसनी फैल गई जब भारत के मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस बी.आर. गवई पर हमले की कोशिश की गई. यह न केवल एक उच्च पदस्थ व्यक्ति पर हमला था, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव, न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए न सिर्फ इसकी कड़ी निंदा की, बल्कि जस्टिस गवई से व्यक्तिगत रूप से बात भी की. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पीएम मोदी ने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुई इस घटना से हर भारतीय आहत है. उन्होंने इसे “निंदनीय” बताते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का भारत जैसे लोकतांत्रिक समाज में कोई स्थान नहीं है. उन्होंने जस्टिस गवई के धैर्य और संयम की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह उनके न्याय और संविधान के प्रति समर्पण को दर्शाता है.

न्यायपालिका की स्वतंत्रता की सुरक्षा की मांग

प्रधान न्यायाधीश पर हमले की इस घटना को लेकर विपक्ष भी मुखर हुआ. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे न्यायपालिका की गरिमा और विधि के शासन पर हमला बताया. उन्होंने कहा कि जब देश के सबसे ऊंचे न्यायिक पद पर आसीन व्यक्ति को खुलेआम निशाना बनाया जाता है, तो यह एक बेहद खतरनाक और विचलित कर देने वाला संकेत होता है.

राहुल गांधी ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल जस्टिस गवई पर नहीं, बल्कि भारत के संविधान की आत्मा पर सीधा हमला है. उन्होंने लिखा कि ऐसी नफरत को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और उसकी सख्त निंदा होनी चाहिए.

प्रियंका गांधी ने बताया शर्मनाक और चिंताजनक

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इस हमले को "अत्यंत शर्मनाक, दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक" करार दिया. उनके अनुसार यह केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे न्यायिक ढांचे, संविधान और लोकतंत्र पर हमला है. उन्होंने कहा कि जस्टिस गवई ने सामाजिक बंधनों को तोड़कर यह मुकाम हासिल किया है और उनके ऊपर इस तरह का हमला न्याय और निष्पक्षता की भावना को आहत करता है.

सीजेआई गवई की पृष्ठभूमि और उसका महत्व

जस्टिस बी.आर. गवई देश के उन कुछ चुनिंदा मुख्य न्यायाधीशों में से हैं जो वंचित और हाशिये पर खड़े समुदाय से आते हैं. उन्होंने अपनी योग्यता और कड़ी मेहनत से सुप्रीम कोर्ट में शीर्ष स्थान हासिल किया. उनके खिलाफ ऐसी हिंसक हरकतें केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा को नहीं, बल्कि उस सोच को चुनौती देती हैं जो हर व्यक्ति को समान अवसर देने की बात करती है.

समाज में कट्टरता और घृणा के बढ़ते प्रभाव का संकेत

कई नेताओं और संगठनों का मानना है कि यह हमला सिर्फ एक isolated incident नहीं है, बल्कि समाज में फैलती कट्टरता, असहिष्णुता और सत्ता से प्रेरित नफरत का नतीजा है. यह वह दौर है जब न्याय की सर्वोच्च संस्था भी सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी की उम्मीदें कहां टिकेंगी?

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