Alexander Wang Meet PM Modi: एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के चौथे दिन काफी हलचल देखने को मिली. दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियों के प्रमुख इस मंच पर एक साथ नजर आए. गूगल के प्रमुख सुंदर पिचाई, ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन और एंथ्रॉपिक के प्रमुख डारियो अमोडेई की चर्चा हर तरफ रही. लेकिन एक नाम ऐसा भी है, जिस पर कम बात हो रही है और वह हैं अलेक्जेंडर वांग.
अलेक्जेंडर वांग इस समिट में शामिल होने वाले सबसे कम उम्र के नेताओं में से एक हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर उनकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा. मात्र 29 वर्ष की उम्र में वह मेटा की कृत्रिम बुद्धिमत्ता रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. इससे पहले वह स्केल एआई नाम की एक बड़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनी के संस्थापक रह चुके हैं.
युवा अरबपति की कहानी
अलेक्जेंडर वांग ने बहुत कम उम्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनी शुरू की थी. यह कंपनी मशीनों को सिखाने के लिए जरूरी डाटा तैयार करती थी. दुनिया की कई बड़ी तकनीकी कंपनियां उनकी कंपनी की ग्राहक रहीं. तेजी से बढ़ते कारोबार के कारण उनकी कंपनी की कीमत अरबों डॉलर तक पहुंच गई. प्रतिष्ठित पत्रिका फोर्ब्स के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग 3.2 से 3.6 अरब डॉलर के बीच आंकी गई, जिससे वह दुनिया के सबसे युवा अरबपतियों में शामिल हो गए.
मेटा ने क्यों सौंपी बड़ी जिम्मेदारी?
साल 2025 में मेटा ने स्केल एआई में करीब 14.3 अरब डॉलर का निवेश किया और कंपनी में लगभग 49 प्रतिशत हिस्सेदारी ली. इसी दौरान अलेक्जेंडर वांग को मेटा के सुपर इंटेलिजेंस लैब्स का प्रमुख बनाया गया. इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र की सबसे बड़ी प्रतिभा नियुक्तियों में से एक माना गया. मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने इसे कंपनी की भविष्य की रणनीति के लिए अहम कदम बताया.
भारत पर खास नजर
समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मेटा के लिए भारत सिर्फ बड़ा बाजार नहीं, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है. वांग ने कहा कि भारत में नई तकनीक अपनाने की रफ्तार बहुत तेज है. यहां के लोग नए बदलाव को जल्दी स्वीकार करते हैं.
व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे मंचों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े फीचर का सबसे अधिक उपयोग भारत में होता है. इसी वजह से मेटा भारत को प्रयोग और विकास के लिए अहम स्थान मानता है.
क्या है सुपर इंटेलिजेंस?
सुपर इंटेलिजेंस का अर्थ है ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता जो इंसानी सोच से भी आगे निकल जाए. आज के समय में उपयोग होने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता इंसान की मदद करती है, लेकिन हर क्षेत्र में इंसान से बेहतर नहीं है. भविष्य की सुपर इंटेलिजेंस तेज़ी से सीख सकेगी, बेहतर निर्णय ले सकेगी और जटिल समस्याओं का समाधान खुद कर पाएगी.
इससे उम्मीद है कि दवाओं की खोज, बीमारियों के इलाज और जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी समस्याओं का समाधान तेजी से निकल सकेगा. हालांकि इसके साथ जोखिम भी जुड़े हैं. यदि ऐसी तकनीक पर सही नियंत्रण न हो तो नुकसान भी बड़ा हो सकता है. इसलिए दुनिया भर के विशेषज्ञ सुरक्षा और जिम्मेदारी पर जोर दे रहे हैं.
व्यक्तिगत सुपर इंटेलिजेंस की सोच
अलेक्जेंडर वांग जिस विचार पर सबसे अधिक बल दे रहे हैं, उसे व्यक्तिगत सुपर इंटेलिजेंस कहा जा रहा है. उनका मानना है कि आने वाले समय में हर व्यक्ति के पास उसका अपना निजी कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायक होगा.
आज यह तकनीक सवालों के जवाब देती है, लेकिन भविष्य में यह पढ़ाई, नौकरी, व्यापार और रोजमर्रा के कामों में सीधी मदद करेगी. मेटा ऐसे उपकरण तैयार कर रहा है जो सीधे सोशल मीडिया मंचों में जुड़े हों, ताकि लोगों को अलग से कोई नया माध्यम इस्तेमाल न करना पड़े.
अधूरी पढ़ाई से वैश्विक पहचान तक
अलेक्जेंडर वांग ने पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी और पूरी तरह कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में काम शुरू कर दिया. कुछ ही वर्षों में उनकी कंपनी अरबों डॉलर की कीमत तक पहुंच गई. आज वह दुनिया के सबसे युवा और प्रभावशाली तकनीकी अरबपतियों में गिने जाते हैं.
एआई इम्पैक्ट समिट में उनकी मौजूदगी यह संकेत देती है कि आने वाले समय में तकनीक की दिशा केवल अनुभवी और उम्रदराज नेताओं के हाथ में नहीं होगी, बल्कि युवा सोच भी इस दौड़ में आगे रहेगी.
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