नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने एक अहम जानकारी साझा की है कि 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी. इससे पहले बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और अन्य 12 राज्यों में यह प्रक्रिया चल रही थी या पूरी हो चुकी थी. अब, चुनाव आयोग ने बाकी राज्यों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर SIR कब से शुरू होगा और इससे क्या बदलाव आएंगे?
SIR की प्रक्रिया पूरी हुई या चल रही है?
फिलहाल, बिहार और अन्य 12 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया चल रही है या पूरी हो चुकी है. इनमें पश्चिम बंगाल, असम, और अन्य कुछ राज्य शामिल हैं. चुनाव आयोग ने इन राज्यों को पहले ही निर्देश दे दिए थे कि वे विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को जल्द पूरा करें. आयोग के मुताबिक, अब बाकी 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस प्रक्रिया की शुरुआत अप्रैल 2026 से होने की संभावना है.
चुनाव आयोग ने जारी किए निर्देश
चुनाव आयोग ने आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना, और उत्तराखंड के मुख्य चुनाव अधिकारियों को पत्र भेजकर विशेष गहन पुनरीक्षण की तैयारियों को लेकर निर्देश दिए हैं. आयोग ने इन राज्यों से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है कि वे जल्द से जल्द इस प्रक्रिया के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर लें.
SIR की प्रक्रिया कब से शुरू होगी?
चुनाव आयोग ने अपने आदेश में यह साफ किया कि शेष 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अप्रैल 2026 से शुरू होने की उम्मीद है. आयोग ने राज्यों के सीईओ को इस संदर्भ में जरूरी निर्देश जारी किए हैं, ताकि विशेष गहन पुनरीक्षण का काम समय पर शुरू हो सके और आगामी चुनावों के लिए पूरी मतदाता सूची को अपडेट किया जा सके.
विपक्षी दलों ने जताई थी आपत्ति
बिहार में SIR को लेकर पहले ही सियासी घमासान मचा हुआ था, और बाद में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में भी विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे. विपक्ष का कहना था कि SIR की प्रक्रिया भाजपा के सहमति से की जा रही है और यह चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप हो सकता है. हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा था कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चल रही है.
सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामला
SIR को लेकर चल रहे विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दायर की गई हैं. विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाला कदम बताया था, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे पूरी तरह से संविधान और कानून के दायरे में बताया. फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, और इसके परिणामों का इंतजार किया जा रहा है.
SIR से क्या बदलाव आ सकते हैं?
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और सही-सही आंकड़े हासिल करना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जा सके. इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को सुधारा जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर योग्य मतदाता का नाम सूची में सही तरीके से दर्ज हो. यह कदम भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.
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