The JC Show: जब कोई नेता विदेश जाता है तो उनका स्वागत होता है. लेकिन जब नरेंद्र मोदी विदेश पहुंचते हैं तो वहां पर इतिहास लिखा जाता है. मेलबर्न से ऑकलैंड तक हजारों किलोमीटर दूर 3000 से ज्यादा भारतीयों की एक आवाज एक गर्जना और एक नाम नरेंद्र मोदी... कहते हैं कि देश की सीमाएं नक्शों में होती है लेकिन भारत की पहचान दुनिया के हर कोने में मौजूद भारतीय समुदाय से होती है और वही संदेश पीएम मोदी योर वर्थ द वेट और उस पर विदेशी नेतृत्व ने जिस गर्मजशी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया है, उसने यह साफ संदेश दिया कि भारत की आवाज सिर्फ सुनी नहीं जाती है. उसका सम्मान भी किया जाता है. आज द जेसी शो में विश्लेषण उस भारत का जिसकी ताकत अब सीमाओं से नहीं दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर नजर आती है. और हमारे साथ इसी विश्लेषण के लिए आज द जेसी शो में मौजूद हैं भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ और फर्स्ट इंडिया के सीएमडी और एडिटर इन चीफ डॉ. जगदीश चंद्र.
सवाल: पिछले 12 सालों में मैंने पहली बार द जेसी शो में नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के स्वागत समारोह से जुड़ी एक की बजाय दो हेडलाइंस देखी हैं. जिसमें पहली हेडलाइन है मेलबर्न मीट्स मोदी 30,000 बॉयस वन रॉर और दूसरी हेडलाइन है न्यूजीलैंड गोस मोदी में पीएम मोदी योर वर्थ द वेट. आखिर क्या है दोनों के मायने और इनके पीछे का औचित्य?
जवाब: यह दोनों देशों के समारोह नरेंद्र मोदी का सम्मान इतना भव्य और अद्भुत था कि यह तय करना मुश्किल था कि हेडलाइन किसको बनाएं क्रिएटिव किस हेडलाइन का बने ऑस्ट्रेलिया का या न्यूजीलैंड का 30000 वॉइससेस का या पीएम मोदी यू आर वर्थ द वेट इसका बहुत मानसिक संघर्ष हुआ तय नहीं कर पाए अंत में हार मान ली और फिर ये कहा कि पहली बार एक नया एक नई परंपरा एक नया प्रयोग चालू करते हुए एक ही शो के एक ही समय की दो हेडलाइंस की जाए क्योंकि नरेंद्र मोदी अद्भुत हैं. उन्हें हेडलाइंस की सीमाओं में बांधना मुश्किल है. इसलिए अपनी हार स्वीकार करो और दोनों हेडलाइन लगा दो और ये देश के टेलीविजन इंडस्ट्री में यह पहला प्रयोग है.
कुछ लोग इस पर आश्चर्यचकित भी होंगे कि एक ही शो, एक ही वक्त, एक ही व्यक्ति, प्रधानमंत्री और दो हेडलाइन. लेकिन इस समय की आवश्यकता थी. इसकी आवश्यकता थी. इसलिए एडिटोरियल ने यह फैसला लिया और एक के बजाय यह प्रयोग करते हुए पहली बार एक ही शो की दो हेडलाइन हमने लगाई है और दोनों हेडलाइन देखिए आप सुपरहिट है मेलबर्न मीट्स मोदी 37 वॉइसेस वन रॉर, न्यूजीलैंड गोज़ मोदी मय पीएम मोदी यू आर बर्थ द वेट जो है अद्भुत हेडलाइंस और जिस हमारे एडिटर ने हेडलाइंस बनाई फर्स्ट इंडिया में तो यहां तो सर्वोच्च पुरस्कार है पत्रकारिता का ₹500 का नोट हम और मोनी को दिया गया जी और देखिए अद्भुत ऐसा हुआ है कि एक ही संपादक की दो हेडलाइन दोनों सुपरहिट चांस एंड मेरिट हैज़ टू बी प्रमोटेड मेरिट हैज़ टू बी रिकॉग्नाइज्ड इसलिए हम ऐसा करते हैं. तो प्लीज एंजॉय दी टू इनोवेटिव हेडलाइंस.
सवाल: ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी हेडलाइन है उसका थोड़ा खुलासा कीजिए सर.
जवाब: पूरा ऑस्ट्रेलिया नरेंद्र मोदी के सम्मान में एक तरह से पागल था. 3000 लोग एक ही हुंकार नरेंद्र मोदी की. आप देखिए आज के युग में कहां इकट्ठे होते हैं इतने लोग. वहां के खुद प्रधानमंत्री इतने गदगद थे उनके साथ में उन्हें समझ नहीं आ रहा था कभी हाथ मिला रहे थे कभी गले मिल रहे थे तो अद्भुत शो था वहां का ऑस्ट्रेलिया का जो है इतनी उम्मीद नहीं थी उम्मीद से ज्यादा शो था इट्स अ ग्रेट शो.
सवाल: अब दो शब्द नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान में जो हेडलाइन तैयार हुई उस हेडलाइन के बारे में दो शब्द सर..
जवाब: उसका भी ऐसे ही था कंपटीशन था लोगों में ऐसा लगा जो है वहां 300 थे यहां 400 है कोई लोग कहते हैं 10,000 हैं 15000 है होल की कैपेसिटी ये कैपेसिटी बाहर लोग बहुत खड़े होते हैं. विदेशों में कैमरा, टेलीविजन, सेट सब लगे रहते हैं. लोग उन पे देखते हैं. आकलन यह हुआ कि 400 लोग आसपास वहां मौजूद थे. तो एक तरह से अद्भुत था. वो शो भी जो है तो दोनों ही शो आपस में एक तरह से बहुत ही अद्भुत थे. नरेंद्र मोदी दोनों शोज़ में एक नायक की भूमिका में थे. एक राष्ट्रनायक की भूमिका में थे. बल्कि कहना चाहिए एक ग्लोबल लीडर की भूमिका में थे. तो दोनों शोज़ इतने कॉम्पिटिटिव थे कि दो में से बेटर कौन सा है तय करना बड़ा मुश्किल था.
सवाल: प्रधानमंत्री मोदी की एक अपील पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के सम्मान में मोबाइल फ्लैश से जगमगा उठा स्टेडियम. आप इस घटनाक्रम को कैसे देखते हैं?
जवाब: नरेंद्र मोदी रिप्रेजेंट यंग लीडरशिप यूथ ऑफ द कंट्री. ये फैशन और ये सब बातें तो यंग जनरेशन के लड़के लड़कियां करते हैं ना. मोबाइल की लाइट जला दो, ये कर दो. ही नोज़ जिसे कहना चाहिए दिल की धड़कन क्या है देश के मतदाता की यूथ की. उनको पता है. उन्होंने प्रयोग किया वहां पर अपील की इशारा किया. एक शख्स खड़ा हुआ और उसने किया फिर पूरा पूरा स्टेडियम जो है एक जगमगा उठा वहां पे जो है तो सबसे इंपॉर्टेंट बात यह है एक आदमी की लीडरशिप को जो है ना फॉलो करने की स्थिति उन्होंने इशारा किया और पूरा स्टेडियम खड़ा हो गया मोबाइल पे लाइट करके जो है और उसको देख रहे हैं ये तो ये मतलब इस बात का भी संकेत है कि नरेंद्र मोदी आज जो है यूथ के यंग जनरेशन के कितना निकट है इस तरह की बातें यंग जनरेशन के लोग उस तरह से करते हैं. मोदी इस नाउ लीडर निश्चित तौर पे इस घटना से यह भी पता लगता है कि मोदी कंटिन्यूस टू बी ऑलमोस्ट नंबर वन हीरो इन यंग जनरेशन ऑफ द कंट्री आल्सो.
सवाल: सर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में उमड़ी भीड़ के बाद राजनीतिक प्रेक्षकों का यह कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज दुनिया के किसी भी कोने से आप चुनाव लड़ा दीजिए. वो भारी बहुमत से जीत जाएंगे. आप क्या कहेंगे इस बारे में?
जवाब: यू आर अब्सोलुटली करेक्ट. हालांकि बात लगी अतिशक्ति यह भी लगेगा कि हम भावनात्मक हो गए हैं. लेकिन यह सच है. किस देश से लड़ाएंगे आप देखिए अमेरिका से लड़ाएंगे टैक्सास में 50 60 हजार लोग थे लड़ सकते हैं चुनाव वहां से ठीक न्यूजीलैंड से लड़ सकते हैं देखा आपने 30 400 लोग आ गए हैं ऑस्ट्रेलिया से लड़ सकते हैं पाकिस्तान से लड़ सकते हैं यूएई से लड़ सकते हैं आप गिनते जाइए और सबसे बड़ा उसका कारण ये है कि उनकी एक पर्सनालिटी उनका करिश्मा वो तो एक चीज है दूसरा इंपॉर्टेंट कारण उसका ये है कि सभी देशों में संसार के भारत के बड़ी संख्या में समृद्ध और जिसे कहते कैपेबल एनआरआई हैं जो सारे के सारे मोदी भक्त हैं इस समय. तो यह क्वेश्चन खाली मजाक में नहीं आता और वाकई कभी ऐसी स्थिति आती तो आप देखना कि वो जीतने की स्थिति में होंगे वहां पे.
मैं एक छोटा सा किस्सा सुनाता हूं. जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो एक दिन मैं दफ्तर में मिलने गया. एस चीफ मिनिस्टर के यहां जो है तो बैठे हुए थे. तो वहां एक आदमी ने किस्सा सुनाया कि अभी वियतनाम गया था वो व्यक्ति जो है और वियतनाम में जब वो गया तो वहां के टैक्सी ड्राइवर ने पूछा कि मोदी कौन है आपके मोदी क्या है वो हैरान हो गया मैं भी हैरान हो गया उसकी बात सुन के तो मैंने सोचा यूं ही कह रहा है बाद में प्रधानमंत्री बने तो मैंने समझ गया कि वो सारी घटनाएं सत्य थी इस तरह की कोई कल्पना नहीं थी उसके अंदर तो कुछ ऐसा हो गया है मोदी का नाम पूरे संसार में अफ्रीका से लेकर अमेरिका तक जो है ना कि लोग उस नाम को जानते हैं पहचानते हैं तो इसीलिए चुनाव लड़ सकते और वक्त बताएगा मौका कभी ऐसा मिलेगा तब हम उस दिन बताएंगे आपको कि देखो यह चुनाव लड़ा जीत गए.
सवाल: सर विचित्र किंतु सत्य है नरेंद्र मोदी की जो ग्लोबल पॉपुलैरिटी लगातार बढ़ती जा रही है उसे देखते हुए आपको ऐसा नहीं लगता कि कभी प्रधानमंत्री अगर इस्लामाबाद की सड़कों पर कोई रोड शो करें या कोई रैली करें तो वो भी इसी तरह सुपरहिट होगी और वहां पर भी उनको देखने के लिए बेतहाशा भीड़ होगी.
जवाब: अभी तो लोग मोदी भक्त कहेंगे हमें इस प्रश्न पूछने वाले को और जवाब देने वाले को लेकिन वास्तविकता है उसका रीजन है उसका रीजन क्या है कि नरेंद्र मोदी ने अपनी जो पर्सनल केमिस्ट्री पर्सनल जो ब्रांडिंग है उनकी वो भारत को इतना शक्तिशाली उन्होंने बनाया है उससे वो जो ग्लोबल लीडर की उनकी जो छवि बनी है उससे एक जबरदस्त उनकी इमेज एक एक्साइटमेंट उसके लिए क्यूरोसिटी लोगों के दिमाग में है. रही पाकिस्तान की बात तो पाकिस्तान देखिए कितना परेशान है. राजनीतिक अस्थिरता है. आर्थिक संकट है. सेना में झगड़े हैं. पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर के झगड़े हैं. पाकिस्तान अस्त-व्यस्त है. वहां के लोग कई बार ये देखते हैं और सोचते हैं कि काश नरेंद्र मोदी हमारे प्रधानमंत्री होते तो हमारी दुर्दशा नहीं होती. भारत पाकिस्तान तो एक ही थे. एक ही लोग हैं. आज भी जुड़े हुए हैं. ठीक है? राजनीति ने बांट दिया देशों को. अलग-अलग हो गए. जो भी जैसे बाकी तो सेंटीमेंट तो वही है लोगों का. तो ये मेरा दावा है इस बात का कि कभी ऐसी स्थिति बनी कि नरेंद्र मोदी वहां चुनाव लड़ने गए तो आप ध्यान रखना सामने वाली जमानत जब्त हो सकती है पाकिस्तान में मेरे ज्यादातर प्रेडिक्शन सही निकलते हैं. ये प्रेडिक्शन भी मैं सोच समझ के कह रहा हूं आपसे ही सो पॉपुलर और पाकिस्तान भारत में तो खास अंतर नहीं है. और वहां के लोग चाहते हैं कि हमारा भी लीडर ऐसा वहां पे आए. हमें संकटों से उबारे.
सवाल: सर क्या यह सच है कि लोकप्रियता के मापदंडों पर ट्रंप को शी को और पुतिन को पीछे छोड़कर दुनिया में नरेंद्र मोदी अब ग्लोबल लीडर नंबर वन बन चुके हैं.
जवाब: देखिए ट्रंप बर्बाद है अपने इमेज का कोई इशू नहीं है इस समय पुतिन का उस तरह का पॉपुलरिटी का मुद्दा नहीं है चाइना वैसे ही लोकतंत्र नहीं है तो पॉपुलरिटी का मुद्दा नहीं है Facebook पर नरेंद्र मोदी इज द वर्ल्ड्स मोस्ट पॉपुलर फेस लीडर अक्रॉस द ग्लोब ये तो दिख रहा है तो आप देख रहे हैं Facebook पर ही इस नंबर वन दूसरा मेरा कहना यह है कि आज अगर वर्ल्ड में एक ऐसा चुनाव हो ग्लोबल लीडर का कि सारे देश सारे लोग मतदान कर सके इंडिपेंडेंटली आप बताइए कौन खड़ा होगा आज ट्रंप है ना अमेरिका में रैलियां कर सकते हैं. शी चाइना में रैलियां कर सकते हैं. पुतिन रशिया में रैलियां कर सकते हैं. एक ऐसा माई का लाल बताई नरेंद्र मोदी की तरह जिसे कहते हैं जो हजारों मील दूर जाके उस देश में 50 हजार लोगों की रैली कर सके, 40 हजार लोगों की रैली कर सके, 20 हजार लोगों की रैली कर सके. कोई नहीं है वहां पर जो है. तो सवाल काल में Google ने उत्तर भी मतलब यथार्थ पे आधारित है. इस तरह से ऐसी स्थिति आती है तो ही विल सर्टेनली गिव अ टफ़ कम. आप खुद सोचिए ना कि ग्लोबल लीडर का इलेक्शन होता है हम कौन खड़ा होगा नरेंद्र मोदी के सामने आज ट्रंप हो सकता था वो बर्बाद है सब दुनिया में ट्रंप का क्या ग्राफ है शन का कोई बनता नहीं है लोकतंत्र नहीं है पुतिन की भी ये स्थिति है तो ओवरऑल कोई ऐसा व्यक्ति सामने नहीं हालांकि एक सवाल ऐसा है शैक्षणिक सवाल है लेकिन एक दिन ऐसा आ भी सकता है इसी संसार में कि संसार का ग्लोबल लीडर कौन है उसका चयन करो मैं कहता हूं एकेडमिक क्वेश्चन ही अच्छा है तो नरेंद्र मोदी क्वालीफाई दिस रेस.
सवाल: सर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के बेहद भरोसेमंद सलाहकार ने एक बड़ा चौंकाने वाला बयान दिया कि मोदी से हाथ मिलाने के लिए तरस गए हैं हम लोग. आखिर क्यों और कैसे आया यह प्रायश्चित भाव?
जवाब: अब देखिए उसी की पुष्टि है जो पहला प्रश्न आया था अभी कि क्या इस्लामाबाद से चुनाव लड़ सकते हैं? ये देखिए आप क्या जनता का भाव है. जनता के भाव से हटके जो खुद प्रधानमंत्री वहां के उनके निकट के लोग आज नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाने के लिए तरस रहे हैं. लुक एट द सिचुएशन. लुक एट द पॉलिटिकल सिनेरियो. तो नरेंद्र मोदी पाकिस्तान में इक्वली पॉपुलर है. मैं कह सकता हूं आज पाकिस्तान मुझे एक व्यक्ति बताइए जो लीडर हो वहां पे क्या चुनाव लड़ सकते हैं वो? आपके आर्मी चीफ नहीं लड़ सकते. जनता का चुनाव नहीं लड़ सकते. ठीक है. दूसरे जो थे बेगम भुट्टो के जो पुत्र हैं विदेश मंत्री क्या लड़ सकते हैं? नहीं लड़ सकते हैं. तीसरे खुद तो शरीफ लड़ ही नहीं सकते. वैसे वहां से कौन एक चेहरा है ऐसा है भारत और पाकिस्तान के बीच में जो कॉमन चेहरा हो. तो सेट नरेंद्र मोदी है. ठीक है सीमाएं अलऊ नहीं करती, राजनीति अलऊ नहीं करती. पर जो सिचुएशन है वो तो यही है. तो उनका मन का जो प्रायश्चित भाव है ना उस अकेले का नहीं है. ही इज़ रिप्रेजेंटिंग द वॉइस ऑफ़ पाकिस्तानी.
सवाल: आप यूं कहिए एक तरह से जो है सर एक तरफ कुछ पश्चिमी मीडिया संस्था और इंटरनेशनल एजेंसीज भारत के लोकतंत्र और उसकी छवि को लेकर लगातार सवाल उठाने की कोशिश करती हैं तो दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे परिपक्व लोकतांत्रिक देशों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अकल्पनीय स्वागत होता है. तो क्या यह दौरा इन तमाम भारत विरोधी नरेटिव्स के मुंह पर एक तमाचा है?
जवाब: तमाचा क्या मस्ट बी डीमोरलाइज होता है ना आप किसी का विरोध करो और सामने फिर 1 लाख लोग समर्थन में आ जाए आप 1000 लोग उसका विरोध करने खड़े हो तो कोई मतलब नहीं है कहने का इस तरह का जो है तो देयर इज नो पॉइंट सच फर्सेस आर डीमोरलाइज इंडिविजुअल लोग भी कुछ हैं अगर वो मेरिट पे कुछ कहना चाहते हैं अमेरिका में लंदन में ब्रिटेन में विरोध प्रकट करना चाहते हैं आज जो है ठीक है लेकिन अब इस सारी घटना से तो दे फील डीमोरलाइज्ड आप जाकर के न्यूजीलैंड में क्या बोलोगे नरेंद्र मोदी के खिलाफ उस ऑस्ट्रेलिया में बोलोगे यहां 30000 लोग आए थे उस इंडोनेशिया में जाओगे यहां का राष्ट्रपति खुद एयरपोर्ट लेने आ रहा है उनको. कहां जाओगे? कहां बोलोगे? नो मैच. तो ऑल दी फर्सेस और इंडिविजुअल्स दे ऑल स्टैंड डिमोरलाइज इन फ्रंट ऑफ द लेटेस्ट पॉलिटिकल सिचुएशन आफ्टर दिस फॉरेन टूर ऑफ़ नरेंद्र मोदी.
सवाल: सर जीवन के इस मोड़ पर प्रधानमंत्री मोदी का ये नॉनस्टॉप वर्किंग स्टैमिना जो पूरी दुनिया को हैरान करता है. लगातार द्विपक्षीय बैठकें, हजारों प्रवासियों से संवाद और राजकीय भोज बैक टू बैक उड़ाने. एक ग्लोबल लीडर के तौर पर उनकी इस अथक ऊर्जा और टाइम मैनेजमेंट को आप किस नजरिए से देखते हैं?
जवाब: अद्भुत है. गॉड गिफ्ट है. एक्चुअली मैं सुनता हूं लोगों से. 2:00 बजे सोते हैं, कभी 3:00 बजे सोते हैं, 6:00 बजे फिर उठ जाते हैं. आमतौर पर कहा जाता है कि सत्ता व्यक्ति की उम्र बढ़ाती है. सत्ता व्यक्ति की एफिशिएंसी बढ़ाती है. लेकिन कितनी? 3 घंटे सो आप काम नहीं कर सकते. प्रैक्टिस मेक्स अ मैन परफेक्ट. ये भी होता है. लेकिन इस बात के लिए तो नेचुरली उनको सलाम करना पड़ेगा. उनके वर्किंग कैपेसिटी एनर्जी लेवल जो है वो वाकई अद्भुत है.
सवाल: सर जब इंडोनेशिया जैसा बड़ा आसियान देश और फिर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे विकसित देश भारत के नेतृत्व की सराहना करते हैं तो क्या यह मान लिया जाए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अनौपचारिक रूप से ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा और निर्विवाद लीडर मान लिया गया है?
जवाब: ऑफकोर्स कौन ऐसा व्यक्ति है जो चाइना के खिलाफ खड़ा हो सके? कौन ऐसा व्यक्ति है जो ट्रंप भी अगर वहां दादागिरी करके अपना हिस्सा लेना चाहे वहां से उसके खिलाफ खड़ा हो सके. यह गरीब राष्ट्र जो हैं साउथ चाइना सी के आसपास के राष्ट्र हैं. इवन ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड जैसे राष्ट्र हैं. कौन है इनका लीडर? किसकी तरफ देखते हैं आज? किस में इतना नैतिक साहस है चाइना के सामने खड़ा हो सके. केवल और केवल नरेंद्र मोदी. तो निश्चित तौर पर कहा जा सकता है और जो पहले अमेरिका के राष्ट्रपति थे इनसे पहले उन्होंने साफ तौर पे कहा था कि मोदी इस द फ्यूचर लीडर ऑफ ग्लोबल साउथ. तो स्वाभाविक है इसको मैं और सुधार कर सकता हूं. जिसे कहना चाहिए नरेंद्र मोदी इज फास्टली ग्रोइंग एस ए लीडर ऑफ ग्लोबल साउथ. यह फैक्ट है.
सवाल: सर प्रधानमंत्री मोदी जब इन तीन देशों में भारत का परचम लहराकर वापस लौटे हैं तो इसका देश की घरेलू राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? और क्या विपक्ष के पास अब वैश्विक मंच पर भारत की गूंज की आलोचना करने का कोई आधार बचा है?
जवाब: विपक्ष तो वैसे भी विदेश की आलोचना कम ही करते हैं. वो तो यहीं उलझे रहते हैं. मेन विपक्ष कौन है? राहुल गांधी है, कुछ और है. तो कोई खास मतलब नहीं रहा. मतलब विपक्ष है अपनी जगह. लोकतंत्र है. विपक्ष का अपना मान है, सम्मान है, स्थान है. लेकिन विपक्ष भी मोर और लेस साइड लाइन है एक तरह से इन द प्रेजेंट सिनेरियो. जो कंट्री में जो करंट घटनाएं हैं उन्हीं पर उनका कोई प्रभाव ऐसा नहीं दिखाई देता. तो विदेश यात्राओं पे तो उनको कहां फुर्सत है? इसलिए कोई टिप्पणी भी नहीं आती खास उनकी. उन्होंने एक तरह से सबको जो है ओपन फील्ड दे दिया है. एक कहते हैं ना क्लीन चिट या एक तरह से पास ओवर दे दिया नरेंद्र मोदी को कि ठीक हमें कुछ नहीं कहना.
सवाल: सर अभी हाल ही में प्रधानमंत्री की जो तीन देशों की यात्रा हुई छह दिवसीय यात्रा थी वो वापस लौट आए दिल्ली जिसमें इंडोनेशिया है, ऑस्ट्रेलिया है, न्यूजीलैंड है. आपके दृष्टिकोण से ये यात्रा कैसी रही और पिछली जो यात्राएं रही हैं प्रधानमंत्री की उनसे कितनी अलग है ये यात्रा?
जवाब: ये तो फैक्ट है. मैंने भी देखा है. देखो हम लोग लगातार प्रधानमंत्री घर विदेश यात्रा का एनालिसिस करते हैं आपके साथ बैठकर. इस बार कुछ अलग ही था. या तो क्या है कि शेड्यूल बेटर था पहले से या ब्यूरोक्रेटिक अरेंजमेंट्स अच्छे थे या उस देश के लोगों का स्नेह प्यार और वहां की जो लीडरशिप थी उसका ज्यादा कमिटमेंट था. मन से दिल से जुड़ाव था. लेकिन कुछ तो था ऐसा. इस बार की तीनों यात्राएं बहुत ज्यादा बंधी हुई सिस्टमैटिक और एकदम से कसी हुई यात्राएं थी. जैसे कि इसमें एक पल कहीं इधर-उधर का नहीं था. कोई लूज एंगल नहीं था. उसमें से लूज़ पॉइंट नहीं था इस यात्रा के अंदर. तो एक तो ओवरऑल मुझे महसूस होता है कि ये यात्रा जो है पिछली यात्राओं की तुलना में ऑर्गेनाइजेशन के हिसाब से एडमिनिस्ट्रेशन के हिसाब से और रिस्पांस के हिसाब से अन्य देशों की तुलना में बेटर थी और वैसे तय करना बड़ा मुश्किल है व्हिच वास द बेस्ट कंट्री कंपटीशन क्लोज है ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड के बीच में हालांकि नरेंद्र मोदी ने यही कहा है कि बेसिकली तीनों यात्राओं का जो उद्देश्य है इट इज टू बूस्ट ट्रेड इन्वेस्टमेंट जो है मैरिटाइम सिक्योरिटी डिफेंस वो तो टारगेट कॉमन है. फिर दूसरी बात क्या है कि तीनों देशों का देखो तापमान अलग है. तीनों देशों के टाइम लाइन अलग है. तीनों देशों के राजनीतिक समीकरण अलग है. लेकिन सभी लोग एक बात पर ये सहमत हैं कि नरेंद्र मोदी का भव्यता से स्वागत होना चाहिए. और इस फ्रंट पर देखा आपने तीनों राष्ट्रों में नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत हुआ. तो इस एक लाइन में अगर कहा जा सकता है जिसे कि थ्री नेशंस, सिक्स डेज एंड वन लीडर एंड दैट इज ऑब्वियसली नरेंद्र मोदी.
सवाल: सर प्रधानमंत्री मोदी की तीन देशों की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था और क्या यह यात्रा थी भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी एंड महासागर इनिशिएटिव का हिस्सा..
जवाब: ऑफकोर्स वो तो खुद ही कहा कि यात्रा का जो पर्पस है एजेंडा है जो इसका मोमेंटम है नैरेटिव है वो है कि एक तो महासागर को स्ट्रांग करना है एक्ट इस पॉलिसी को जो है स्ट्रेंथन करना है अपनी लीडरशिप को जो है एस्टैब्लिश करना है आप इसको यू समझ सकते हैं इस यात्रा के रेलेवेंस को कि आज वर्ल्ड के अंदर जो है यह जो आपका इंडोपेसिफिक है जो पूरे संसार का जो 60% टोटल ट्रेड है वो इंडोपेसिक से है. मतलब यही इन्हीं देशों से है. 40% जो एनर्जी है वो इन्हीं से है. तो ये तो मास्टर स्ट्रोक है ना मास्टर कैपेसिटी है इन देशों की और इन पर कब्जा करने की होड़ है. चाइना साउथ चाइना सी में आगे बढ़ रहा है धीरे-धीरे. अग्रेसिव एटीट्यूड है चाइना के. उसको रोकना जरूरी है वहां पर. पिछले दिनों ट्रंप गए थे चाइना तो लगता था उन्होंने हाथ मिला लिया कि ठीक है ईस्ट वर्ल्ड का जो ईस्टर्न पार्ट है इंडोपेसिफिक और ये जो है आप रखिए आपकी लीडरशिप रहे इसमें और वेस्ट का पार्ट जो है वो ट्रंप रखेंगे अपने पास में वेस्टर्न कंट्री का जो है और ट्रंप ने यही सोच के अपने यहां से जो उस किताब है इंडोपेसिफिक की उसमें इंडो शब्द हटा दिया उन्होंने वहां से जो है तो दूरगामी में क्यासी है क्या इरादे हैं इन देशों के उसको देखते हुए बहुत जरूरी है कि नरेंद्र मोदी जैसा ही कोई व्यक्ति खड़ा हो सामने तो वो जो पॉलिसी है महासागर की वह इसीलिए बनी है कि इन सबको कंटेन करना है इन फर्सेस को और जो गरीब राष्ट्र हैं आम राष्ट्र हैं जिनका यह होना चाहिए कि फ्री मूवमेंट है सी के अंदर रेस्ट्रिक्टेड मूवमेंट नहीं है सबसे बड़ी बात यही होती है वहां पर जो है उसमें सबके साथ खड़े होना है और चाइना के बढ़ते हुए प्रभाव को रोकना है तो उस दृष्टि से ये पॉलिसी है नरेंद्र मोदी की ये सही है.
सवाल: सर पहले की जो भारतीय विदेश नीति बहुत औपचारिक और फाइलों तक सीमित होती थी लेकिन मोदी डिप्लोमेसी में पर्सनल टच पब्लिक रिलीज और इमोशनल कनेक्ट शामिल है. आप कैसे देखते हैं इस बदलाव को?
जवाब: नरेंद्र मोदी हैज़ रिीडफाइन इंडियन फॉरेन पॉलिसी. ही हैज़ रिीफाइंड इंडियन डिप्लोमेसी. आप देखिए अब उनका क्या है कि ना तटस्थ है ना इस गुड के साथ है ना उस गुड के साथ है. शांति के साथ और बेसिक क्या है? नेशनल फर्स्ट इंडिया सेंट्रिक जो है इंडिया के जो इंटरेस्ट है उसको देखते हुए है यह जो पॉलिसी है तो क्या है कि इंडिया सेंट्रिक है राष्ट्रवादी जिसे कह सकते राष्ट्रवाद से प्रेरित है और दैट वे जो है तो है भारत की नीति में परिवर्तन है और आप देखते हैं नथिंग सक्सीड सक्सेस तो जो फॉरेन पॉलिसी का ट्रेडिशनल तरीका था ब्यूरोक्रेसी ओरिएंटेड ब्यूरोक्रेसी सेंट्रिक विदेश मंत्रालय सेंट्रिक वो सारा चेंज हो गया है वो एक व्यक्ति में सिमट गया आ के हु इस अदरवाइज आल्सो द प्राइम मिनिस्टर ऑफ़ द कंट्री जिसे कहते हैं तो आप कह सकते हैं ही इस प्राइम मिनिस्टर नंबर वन ही विदेश मंत्री आल्सो नंबर वन तो ही हैज़ रिीफाइंड इंडियन पॉलिसी ही हैज़ रिीफाइंड विदेश मंत्रालय वर्किंग एंड इट इज़ सुपरहिट. सो लेट इट गो.
सवाल: सर क्या ये सच है कि मोदी टू रीाइट इंडियास इंडोपेसिफिक प्लेबुक?
जवाब: ऑफकोर्स ये तो है ही सब. इतनी बात यही हो रही थी कि मोदी इस ट्राइंग वेरी हार्ड टू क्रिएट ए यूनिटी अमंग ऑल दीज़ नेशंस, इंडोपेसिफिक नेशंस, ग्लोबल साउथ नेशंस टू स्टैंड अप अगेंस्ट चाइना. बेसिकली तो वहीं से खतरा है. दैट वे जो है तो मोदी रिडिफाइनिंग और मोदी से आशा है और चाइना का जो एटीट्यूड है अग्रेसिव इसमें जो बढ़ रहा है उसको देखते हुए समय की आवश्यकता है. समय की डिमांड है कि कोई उसको रोकने की खड़ा हो. ट्रंप इज नॉट रायबल. वो तो क्या है ना कि ट्रांजैक्शनल आदमी है. कल को जाएगा डील करके आ जाएगा चाइना में. वहां क्या कुछ नहीं होगा? किसके भरोसे हैं आप लोग? ये लोग ब्राजील है, जापान है. ये देश किसके भरोसे हैं? भारत के भरोसे हैं.
सवाल: सर प्रधानमंत्री मोदी ने जिन तीन देशों की यात्रा की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड ये तीनों ही देश इंडोपेसिफिक रीजन में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर सतर्क हैं. तीनों देशों की प्रधानमंत्री मोदी ने बैक टू बैक यात्रा की और वहां पर उनका भव्य स्वागत भी होता है. बीजिंग खेमे में यह कितनी बड़ी चुनौती पैदा करेगा.
जवाब: दे मस्ट बी वरीड. चाइना मस्ट बी वरीड ऑन द ग्रोइंग यूनिटी ऑफ दी कंट्रीज अंडर द लीडरशिप ऑफ नरेंद्र मोदी. आप देखिए. तो इसीलिए तो नरेंद्र मोदी डिफेंस पर एक्ट कर रहे हैं इन सबके साथ में. मेरिट टाइम सिक्योरिटी के नाम से जुड़ते जा रहे हैं. दे विल शेयर इंटेलिजेंस, दे विल शेयर ऑल इन तो कोई जहाज कहां से निकला, कहां गया? तो मोदी विल आल्सो हैव इक्वल मॉनिटरिंग चाइना हैज़ दैट जो है और सारे राष्ट्र जो है भारत का समर्थन दे रहे हैं इसमें जो है तो निश्चित तौर पर कहा जा सकता है इज़ अ ग्रोइंग थ्रेट ऑफ़ चाइना व्हिच हैज़ बीन वेल कंसीव्ड बाय दीज़ कंट्रीज एंड नाउ दे आर लुकिंग अप टू नरेंद्र मोदी.
सवाल: सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन तीन देशों की यात्रा और जापान के प्रधानमंत्री की दिल्ली यात्रा को आप इंडोपेसिफिक और चीन के एंगल से कैसे देखते हैं और क्या-क्या समझौते हुए जापान और भारत में?
जवाब: जापान इज़ आल्सो अंडर थ्रेट फ्रॉम चाइना दैट वो भी देखता है कि किसकी तरफ देखें तो इंडिया इज़ इन नेचुरल अलाय तो वहां के प्राइम मिनिस्टर आई थी अभी तीन दिन यहां पे थी दिल्ली के अंदर जो है और मेजर जो सब समझौते होते हैं आपका डिफेंस का होता है ट्रेड का होता है इन्वेस्टमेंट का है मिनरल्स का है सारा जो है आपका यूपीए पेमेंट्स का है तो ये सारे समझौते हुए उनके साथ जो नॉर्मली हर कंट्री के साथ हम करते हैं. जापान के प्राइम मिनिस्टर का यहां आना अपार्ट फ्रॉम द रूटीन बटरल एग्रीमेंट्स वाज़ एन इंपॉर्टेंट सिग्नल टू अलाइन विद मोदी और अभी नई प्राइम मिनिस्टर बनी है और आते ही आ गई यहां पर तो उनको भी चिंता लगती है कि कि चाइना के खिलाफ कौन खड़ा होगा? द ओनली चॉइस द ओनली रे ऑफ़ होप इज़ इंडिया दैट इज़ नरेंद्र मोदी. तो आई थी यहां पे और अच्छे समझौते हुए उनके साथ.
सवाल: सर क्या नरेंद्र मोदी की इन तीन देशों की यात्रा का जो फोकस है वो समुद्रिक कूटनीतिक यानी कि ओशन डिप्लोमेसी रहा?
जवाब: ऑफकोर्स बिल्कुल रहा ये सारे के सारे देश वही सारी सिचुएशन है इंडोपेसिफिक ग्लोबल साउथ जो है सारे और समुद्र तो प्रिय सब्जेक्ट है नरेंद्र मोदी का देखिए महासागर वगैरह सब बने हैं ना दैट इज ये सब क्या है उसी का पार्ट है ये एक्ट ईस्ट पॉलिसी और महासागर ये क्या है उसी का पार्ट है कि इंडिया की जो फॉरेन पॉलिसी है इस समय में जो है समुद्र कूटनीति भी एक बड़ा इंपॉर्टेंट उसमें आस्पेक्ट है और यह जो यात्रा थी उसका भी एक मेन एजेंडा को मेन फोकस था समुद्र कूटनीति पर ही था जिसमें सब बातें हो रही है इज़ अब्सोलुटली राइट इंडिया इस नाउ गिविंग ड्यू केयर एंड ड्यू रिकॉग्निशन टू इट्स जैसे कहना चाहिए समुद्र और आप देखिए नॉर्मली बात भी यही चलती है दैट वे है कि वन इंडिया वन ओशन एंड वन फ्यूचर ये नारा आया वहां से और लोगों ने माना है कि नरेंद्र मोदी इस नारे को आगे बढ़ा सकते हैं वन वन फ्यूचर में सबका फ्यूचर एक जैसा है. वन लीडर नरेंद्र मोदी वन ओशन ओशन एक है ही ऑलरेडी वहां पर जो है. तो ग्रोइंग सेंटीमेंट जो है इसमें वर्ल्ड में बिटवीन वेस्ट एंड नॉन वेस्टर्न कंट्रीज जो है वो आशा किरणों के साथ में इंडिया की तरफ देख रहे हैं.
सवाल: सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैरिटाइम सिक्योरिटी के महत्व को देखते हुए मिशन मैरिटाइम शुरू किया. इस मिशन का एजेंडा क्या है?
जवाब: इज़ अ ब्रिलियंट वो ऑन द पार्ट ऑफ गवर्नमेंट एंड द प्राइम मिनिस्टर. आप देखिए और इसका मेन एजेंडा यह है कि टू कन्वर्ट इंडिया एस ए मेजर ग्लोबल पावर इन मेरिटाइम सिक्योरिटी यू मस्ट एमवर एंड मस्ट स्ट्रेंथन इंडियन नेवी टू मेक इंडिया एज अ स्ट्रांग मेरिटाइम नेशन. अब 2047 में जो अमृतकाल का इसका एजेंडा है मैरिटाइम का उसमें लिखा हुआ है कि एक करोड़ से ज्यादा लोगों को डायरेक्ट और इनडायरेक्ट एंप्लॉयमेंट भी इससे मिलेगा. दिस इज़ वेरी इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट और ये मेरिटाइम मिशन यह सिद्ध करता है कि समुद्री राजनीति है, ग्लोबल साउथ है, इंडोपेसिफिक है. ये नरेंद्र मोदी की कितनी बड़ी प्रायोरिटी है? ये इसको सिद्ध करता है. इट्स अ गुड मोर्न द पार्ट ऑफ़ गवर्नमेंट ऑफ इंडिया.
सवाल: सर क्या इन तीन देशों की यात्रा के बाद नरेंद्र मोदी का मेक इन इंडिया अब ग्लोबल हो गया है?
जवाब: सुपरहिट हो गया है. जिसे कहना चाहिए शुरुआत हो गई है. ब्रह्मास्त्रस की डील हो गई है. 200 मिलियन डॉलर आ गए हैं. राजनाथ सिंह भी खुश हैं कि चलो नारा लगा था आत्मनिर्भर बनेंगे. स्वदेशी बनाएंगे. अचार भी बेचेंगे लोगों को. वो सपना सच हो गया भारत का. मेक इन इंडिया. आज और जोर से आवाज लगा कर कह सकते हो 200 मिलियन डॉलर जेब में डालने के बाद में यस मेक इन इंडिया. अब्सोलुटली राइट.
सवाल: सर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या और साथ ही वहां पर काम करने वाले प्रोफेशनल्स की संख्या लगातार बढ़ रही है. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन दौरों के बाद वहां पर भारतीयों के प्रति सरकार का नजरिया और जो वीजा नीतियां हैं क्या वो और ज्यादा उदार हो पाएंगी अब?
जवाब: अब्सोलुटली बिल्कुल होगा. आप देखिए ना भारत के लोग वहां जो रहते हैं आपका प्राइम मिनिस्टर जाता है 30,000 40,000 लोग उसको रिसीव करते हैं वहां पर तालियां बजाते हैं भीड़ पड़ती है प्रधानमंत्री साथ में खड़ा है तो सीना तो चौड़ा होता है जैसे कहते हैं ना वो 56 इंच की छाती जो है वो खड़ी होती है ना इन लोगों के मन में सब के मन में आता है और हमारा प्राइम मिनिस्टर है और देखो वहां का जो प्रधानमंत्री कितने गरिमा से कितने सम्मान से इसको मान सम्मान दे रहा है तो इसका जो रिफ्लेक्टेड मैसेज है जो एक्सटेंडेड मैसेज है वो सब में जाता है वहां पे तो नेचुरली द गवर्नमेंट ऑफ़ दैट कंट्रीज इस बाउंड टू रिवाइज इट्स स्टैंड ऑन इंडियन पीपल या एनआरआई पे जो है तो निश्चित तौर पर मानना कि भारत वासियों का उन देशों के दूतावासों में अब सम्मान इस यात्रा के बाद निश्चित तौर पर बढ़ा होगा.
सवाल: सर संसार के कई दूसरे देशों की तरह इस बार इंडोनेशिया ने भी नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया और साथ ही फाइटर जेट्स की सलामी भी दी. आप क्या कहना चाहेंगे इस पर?
जवाब: इज़ नथिंग न्यू फॉर नरेंद्र मोदी. आजकल जहां जाते हैं एक होड़ रहती है कैसा स्वागत करें कैसा सम्मान करें तो इंडोनेशिया कैसे पीछे रहता उन्होंने अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान जो है उन्हें दिया 35वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है नरेंद्र मोदी का ये और आठ सम्मान तो इसी एक साल में आए हैं आप देखिए और फिर रुतबा देखिए मतलब इंडिया का प्राइम मिनिस्टर का कि जैसे एंटर हुए वहां के बॉर्डर में तो पांच सात फाइटर जेट जो है वो उनको पायलट करते हुए ला रहे हैं वहां पे एयरपोर्ट आते हैं तो राष्ट्रपति खुद लेने के लिए मौजूद है वहां पे दैट मी तो रुतबा है.
सवाल: सर इंडोनेशिया के जो राष्ट्रपति हैं प्रबोव सुभियातो उन्होंने बैंकफेट लंच के दौरान कहा कि वो नरेंद्र मोदी के करियर और उनकी प्रगति की कई चीजों की कॉपी कर रहे हैं. आखिर वो क्या कहना चाहते थे और फिर प्रधानमंत्री मोदी ने उनका क्या जवाब दिया?
जवाब: वो जो कहना चाहते हैं वो सच है कि संसार के बहुत सारे देश जो है आजकल ये देखते हैं नरेंद्र मोदी क्या कर रहे हैं? भारत क्या कर रहा है? क्या यूपी ला रहे हैं? कोई और नई पॉलिसी ला रहे हैं. नया रिफॉर्म क्या कर रहे हैं? तो वो भी निगाह है उनकी. तो इस बात से बड़े प्रभावित हैं कि भारत की जो यूपीआई पेमेंट पॉलिसी है यहां की उससे बड़े प्रभावित हैं. आधार कार्ड बना उससे प्रभावित हैं. हमारी जो वेलफेयर स्कीम्स हैं पब्लिक की उससे प्रभावित हैं. तो इसलिए उन्होंने कहा प्राइम मिनिस्टर ने बहुत लाइट मोड में कहा उन्हें कि ठीक है मेरी तो बहुत से कार्यक्रम है. बहुत सी नीतियां हैं. आप फॉलो करिए. मैं आपसे रॉयल्टी नहीं लूंगा. आपसे कॉपीराइट नहीं लूंगा.
सवाल: सर मुस्लिम होकर भी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद शिव मंदिर पूजा अर्चना के लिए लेकर गए. ये पूरा किस्सा क्या है?
जवाब: उस देश को 100 में 100 नंबर मिलने चाहिए. वन ऑफ द मोस्ट सेकुलर नेशन ऑफ द वर्ल्ड कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री वहां देखिए आप मुस्लिम है. इस्लाम धर्म है उनका हिंदू मंदिर में लेके गए हैं. साथ में खुद खड़े हैं वहां प्राइम मिनिस्टर के. प्राइम मिनिस्टर जो है आप देखिए भगवा कुर्ता और नीला जैकेट पहन के उनके साथ खड़े हैं वहां पे और पूजा हो रही है तो बड़ी मतलब सुखद स्थिति है तो मंदिर में पूजा हुई तो बहुत ही अद्भुत है और बहुत मतलब कहना चाहिए वेरी इंप्रेसिव एंड वन ऑफ़ द मोस्ट सेकुलनेशन ऑफ़ द वर्ल्ड जो है तो नरेंद्र मोदी को भी अच्छा लगा होगा और उनका उदारता देखिए आप एक तरह से इस्लाम में होते हुए भी वो हिंदू धर्म के मंदिर में प्रधानमंत्री के साथ खड़े हैं. इट्स टू थिंग्स वन द पर्सनालिटी एंड करिश्मा नरेंद्र मोदी सेकंड इज उनकी उदारता गुड साइड टू सी..
सवाल: सर जो इंडोनेशिया का जो हिंदू मंदिर है ब्रह्मानंद बहुत ऐतिहासिक है ऐसी क्या खास बात है उसमें और आखिर ऐसा क्या है उसमें कि आपको ऐसा लगता है कि भारत देश भी उसके पुनर्निर्माण में भागीदारी दे सकता है क्या खास रहा सर मोदी गए?
जवाब: खास बात ये है कि जो 1000 साल पुराना मंदिर है इंडोनेशिया का सबसे पुराना पुराना हिंदू मंदिर है. ब्रह्मा विष्णु और भगवान शिव का एक साथ मूर्ति जो है भगवान शिव की मूर्ति कहते हैं 47 मीटर ऊंची वहां पे जो है और कोई 40 हेक्टेयर में कहते हैं मंदिर फैला हुआ है. चारप मंदिर छोटे-छोटे सारे कैंपस में बने हुए हैं. दैट वे जो है और सबकी पूजा होती है वहां पर. उसकी खास बात है उस मंदिर की जो है और रही बात पुनर्निर्माण की तो नरेंद्र मोदी को बहुत आनंद आता है छोटे-छोटे देशों में पड़ोसों में भारत में यहां तक कि खुद भी जो है चाहे राजकोट का सवाल हो चाहे वो उज्जैन के महाकाल मंदिर का सवाल हो अयोध्या का सवाल हो सारा जो है आप देखिए केदारनाथ का सवाल हो मंदिरों के पुनर्निर्माण में उनको बहुत रुचि है और उन्हें ऐसा लगता है कि यह मेरे लिए गर्व और सौभाग्य की बात है. इस मंदिर का जो पुनर्निर्माण है उसका काम भी उन्होंने वहां पर उनके साथ में शुरू करवा दिया है. दैट इज वेलकम होम.
सवाल: सर ब्रह्मानंद मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर में है प्रेतों का साया, शाप और पत्थर की राजकुमारी. तो जेसी सर आखिर क्या है ये सारी कीवंतियां?
जवाब: कींतियां मैंने भी पढ़ी है इसमें. बहुत रोचक और सीरियस दोनों प्रकार की. यह जो मंदिर है जहां की अभी बात हो रही थी उससे लगभग 1 किलोमीटर दूर एक दूसरा मंदिर है जिसकी सारी बात हो रही है तो एक कथा है उस समय की कि वहां एक बोको नाम का राज्य हुआ करता था जावा द्वीप में इंडोनेशिया में जावा जावा द्वीप है वहां बोको एक राज्य था वहां पे राज्य का राजा था वो शक्तियां थी उसके पास में भूत प्रेत इनको काबू करने की उसने पड़ोसी राजा पे हमला कर दिया जो है पड़ोसी राजा ईमानदार आदमी आदमी था और मूल्यों को रखता था. हमला में विश्वास नहीं करता था. शांति व्यक्ति था. उसके पास ही भूत प्रेत की शक्तियां थी जो है तो अल्टीमेटली क्या हुआ कि ये जो राजा था बोको वाला पहला प्रभु नाम था इसका हार गया उस राजा से जिस राजा पर हमला हुआ था जो है कब्जा हो गया उसका.
कब्जा हो गया तो उस राजा का जो दूसरा देश था जिसने जीती लड़ाई को जो है उसका एक बेटा था वो भी जो दैविक शक्तियां होती है भूत प्रेत और इन सब को जो है अपने काबू में रखता था जो है तो पिता पुत्र दोनों लड़ाई लड़ी और उस राजा को उन्होंने हरा दिया उस पर कब्जा उस राज्य पर उनका हो गया जब कब्जा लेने के लिए वहां पर गए तो जाते क्या देखा कि उनकी जो पुत्री है हारे हुए राजा की ठीक है वो रो रही थी शौक में बैठी हुई थी तो राजा के पुत्र ने देखा तो उसने कहा कि मैंने ऐसी स्त्री नहीं देखी कि जिसके आंसू है वो गले से ऐसे बह रहे हैं. इस तरह के अद्भुत जो है तो दीवाना हुआ. उसने शादी का प्रस्ताव रखा. लड़की ने कहा तुम मेरे पिता के हत्यारे हो. शादी नहीं कर सकती. लेकिन राजा का दबाव था.
लड़की ने चालाकी सी एक स्कीम बनाई. उससे कहा कि ठीक है मैं करूंगी शादी. दो शर्तें हैं मेरी. एक तो पहले यह है कि तुम दो बड़े कुएं कुदवा के बताओ मुझे 24 घंटे में. विशालकाय जो है और दूसरा 1000 मंदिर मुझे 24 घंटे में बना के दो अपनी शक्तियों के सहारे. तो उस राजकुमार ने मान ली उसकी बात तो कुएं उसने खुदवा दिए. तो एक बड़ा कुआं जो खुद गया तो लड़की ने फिर ये कहा कि कुएं में उतर के बताओ गहरा कितना है? क्या करता बेचारा? प्रेम में डूबा व्यक्ति चला गया नीचे. उस लड़की ने सारे पत्थरों से भर के उस कुएं को बंद कर दिया. ठीक. राजा अपनी देते शक्तियों के प्रभाव से वह जो लड़का था फिर वापस बाहर आ गया जो है तो उसने कहा उसको छोड़ो मैं अब 1000 मंदिर बना के देता हूं आपको ठीक है ना उसने कहा ठीक है बनाइए तो जो 999 मंदिर बने 24 घंटे में अदृश्य शक्तियों के सहारे जो है तो एक मंदिर बचा था तो ऐसा लिखा है लोक कथाओं में कि उस लड़की ने ऐसा स्वांग रचा सुबह दे करने के लिए कि वो मुर्गा जो बांग देता है वो जो धान कूटते हैं सुबह-सुबह वो उसने रात को 3:00 बजे इस काम को चालू करवा दिया. वो जो भूत प्रेत आए हुए थे भूत प्रेत ऐसा कहते हैं रात को ऑपरेट करते हैं. दिन को नहीं ऑपरेट करते हैं.
भूत प्रेत ने समझा कि यार ये तो दिन हो गया भागो यहां से. लोग जाग जाएंगे यहां से. तो सब भूत प्रेत भाग के चले गए. वो मंदिर अधूरा रह गया. एक मंदिर रह गया बाकी. तो लड़की ने कहा कि तुम फेल हो गए. हम तो उस पे जो है उस राजा को बड़ा गुस्सा आया. हम उसने कहा कि तुम इतनी पत्थर दिल हो और तुम मेरा प्रेम नहीं समझ सकी तो ठीक है मैं श्राप देता हूं तुम भी पत्थर हो जाओ आज से और पत्थर हो गई वहां पे तो जो 1000वा मंदिर वहां है वो इसी देवी के नाम का बना हुआ है उसमें कहते हैं पत्थरों में उस लड़की की आत्मा आज भी वहां पे है शापित लड़की थी वो तो ये कथा है वहां की मैंने पढ़ा खुद और फिर मैंने आपको बताया.
सवाल: सर फ्रॉम रमायना टू रियल पॉलिटिक्स नरेंद्र मोदी की इस राजनीतिक यात्रा के सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं के बारे में आप क्या कहेंगे?
जवाब: यह तो देखो ऐसा है रिलीजियस डिप्लोमेसी ऑफ़ नरेंद्र मोदी जिसे कहते हैं पॉलिटिकल के साथ-साथ धार्मिक विषयों को भी जोड़ते हैं तो एक तो वहां के लोगों का दिल छूते हैं आप. एक भारत के लोगों का दिल छूते हैं. जनता का दिल छूते हैं ये तो इज़ अ सक्सेसफुल पॉलिसी कंबाइनिंग टू अ पॉलिटिकल एंड रिलीजियस डिप्लोमेसी.
सवाल: सर इंडोनेशिया दुनिया के सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है और सर ऐसे में वहां की संस्कृति में रामायण और महाभारत की इतिहास की जड़ें बहुत ज्यादा मजबूत है. पीएम मोदी जबजब वहां पर जाते हैं सांस्कृतिक सेतु को रिकनेक्ट वो करते हैं. तो सर आप कैसे देखते हैं इसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति में सॉफ्ट पावर के इस्तेमाल को.
जवाब: पावर का इस्तेमाल तो एक 85% वहां पर मुस्लिम है उस कंट्री में हिंदू संस्कृति मानता है और जो मंदिर की बात आप कह रहे थे क्या खास बात है मंदिर की दीवारों पर रामायण पूरी लिखी हुई है आज भी वहां पे जो है और आप देखिए वहां की जो एयरलाइंस है उसका नाम है गरुड़ एयरलाइंस भारतीय नाम है जो है और वहां की जो करेंसी है उसे भगवान गणेश की फोटो लगे हुए हैं ये तो वो तो भारत का एक हिस्सा है एक तरह से तो नरेंद्र मोदी उसी सेंटीमेंट को रिवाइव कर रहे हैं.
सवाल: सर भारत के कैसे हैं इंडोनेशिया के साथ व्यापार व्यापारिक रिश्ते और इस यात्रा के बाद में क्या-क्या बदलाव आने वाला है इन रिश्तों में?
जवाब: व्यापारिक रिश्ते बहुत अच्छे हैं. जिसे कहना चाहिए कि 24.78 बिलियन डॉलर का व्यापार है दोनों के बीच में और सेकंड लार्जेस्ट हमारा जो ट्रेडिंग पार्टनर है आपका इंडोनेशिया है तो व्यापार अच्छा है और उस यात्रा के बाद में तो व्यापार और बढ़ेगा.
सवाल: सर आखिर क्या है नरेंद्र मोदी की डिफेंस डिप्लोमेसी?
जवाब: डिफेंस डिप्लोमेसी यही है देखिए ब्रह्मोस जो है यह 200 मिलियन डॉलर में बेचना कर लोगों को तो जितने भी छोटे-छोटे देश हैं प्रभावशाली देश भी हैं साउथ चाइना वाले ग्लोबल साउथ वाले इनको मजबूत करना इनसे क्या है कि अपने डिफेंस के पैक्ट्स करना डिफेंस के अरेंजमेंट्स करना एक दूसरे की रक्षा की जिम्मेदारी लेना तो ये डिफेंस डिप्लोमेसी है उनकी एक छोटे-छोटे राष्ट्रों को प्लस इन बड़े राष्ट्रों के साथ मिलके एक पावरफुल डिफेंस अलायंस बनाना बेसिकली अगेंस्ट चाइना.
सवाल: सर इस यात्रा के दौरान डिफेंस के अलावा और कौन-कौन से समझौते हुए भारत और इंडोनेशिया के बीच में?
जवाब: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है. आप देखिए मैरिटाइम सिक्योरिटी है. डिजिटल इनोवेशंस हैं, दैट है और ये कैपेसिटी बिल्डिंग है और फिर बाकी आपके सब हैं. ही क्लीन एनर्जी है, ट्रेड है. ये सारी चीजें हैं. उसके अंदर सारे समझौते हुए हैं. कुल मिला के जो है 14 समझौते हुए हैं. बेसिकली जो है तो अच्छी सी यात्रा और अच्छी प्रोग्राम देने वाली यात्रा थी.
सवाल: सर और आखिर क्या है इंडिया इंडोनेशिया एंड इंडियन ओशियन के बीच में हिस्टोरिकल रिश्ते.
जवाब: हिस्टोरिक रिश्ता देखो हजारों साल पुराना रिश्ता है और इस रिश्ते को समझने के लिए जो है जिसे कहना चाहिए वो एक सेंटेंस ही काफी है जिसे कहा कहना चाहिए कि इंडिया इंडोनेशिया ओशियन ओनली द नेम रिफ्लेक्ट्स द ट्रेडिशनल लीगसी ऑफ ऑल दी कंट्रीज जिसे कहना चाहिए केवल नाम से ही पता लगता कि लिगेसी है इसकी जो वो भारत इंडोनेशिया जैसे देशों के पास है. ओशियन की जो लिगेसी है इनके पास है. तो हिस्ट्री का रिश्ता इनका यही है. हजारों साल पुराने से समुद्री आवागमन रहा है. चीजों का जाना आना रहा है. आपस में जाना आना रहा है. ट्रेड रहा है. मूवमेंट रहा है. हिस्टोरिकल रिश्ते हैं. और अब तो एक सेंटेंस जो मैंने आपसे कहा ना कि आप देखिए इंडिया इंडोनेशिया ओशियन जो है ये ओनली नेम रिफ्लेक्ट्स लीगसी अपनी उसको रिफ्लेक्ट करता है.
सवाल: सर इंडोनेशिया यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी का एक और चमत्कार सर अब वहां पर भी भारत की तरह ईवीएम से चुनाव होगा इसको लेकर आप क्या कहेंगे?
जवाब: हां इट वास वेरी इंटरेस्टिंग मैंने भी देखा तो मुद्दा आया कैसे वहां पर उन्होंने कहा होगा या तो इतने बड़े देश में आप चुनाव कराते हैं इतना बड़ा लोकतंत्र हमें भी कुछ बताइए जो है तो अच्छी बात है कोई हमसे सीखता है तो वेलकम तो ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में चुनाव आयोग के अधिकारी या मुख्य चुनाव आयोग जो है दो चार बार जाएंगे वहां पर उनको ट्रेन करने के लिए बताने के लिए दैट इज़ इट्स अ गुड मूव और यह सिद्ध करता है भारत में विपक्ष कहता है कि ये सब फ्रॉड है धोखा है झूठ है अब देखो दूसरे देश ईवीएम मांग रहे हैं हमसे आप ये सोचिए तो इट इज़ गुड मूव अ वेकनिंग मूव फॉर अपोजिशन आल्सो कि आप जिसके लिए कहते हैं विदेशों में उसकी डिमांड है आज. तो लेट्स सी कि वहां का अगला चुनाव जो ईवीएम से होता है क्या?
सवाल: सर नरेंद्र मोदी ने अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान क्या सुझाव दिए इजराइल और पेलेस्टाइन के झगड़े को सुलझाने के लिए.
जवाब: नरेंद्र मोदी का जो व्यू है वी कंटिन्यू टू सपोर्ट द थ्योरी ऑफ़ टू नेशंस फॉर अ स्टेबल पीस एनवायरमेंट. और उस बात को और वो बार-बार कह चुके हैं. स्यूशन इज़ ऑन द डायलॉग टेबल ओनली. ओनली डायलॉग एंड डिप्लोमेसी कैन सॉल्व द प्रॉब्लम. और फिर उन्होंने इस बार उन्होंने ये भी कहा है कि अभी जो ट्रिबुलेंस टाइम्स हैं आज के उसमें तो ये जो मेरा कहना है उसकी रेलेवेंस और बढ़ गई है कि सशन विल कम ओनली थ्रू डायलॉग एंड डिप्लोमेसी.
सवाल: सर यूएससी नीड्स अर्जेंट रिफॉर्म्स. मोदी टेल्स इंडोनेशियन एमपीस. इसको लेकर सर आप कुछ कहना चाहेंगे?
जवाब: नरेंद्र मोदी के मन में पीड़ा है और लोगों के मन में पीड़ा है कि जो आपकी जो यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल है इट इज़ गाइडेड एंड कंट्रोलोल्ड रिमोटली बाय अमेरिका एंड वेस्टर्न पावर्स. किसी देश का और कोई कहना सुनना नहीं है. फिर टेरर के मामले होते हैं तो अपनी मनमानी करते हैं. कुछ लोग वीटो यूज़ कर देते हैं वहां बैठ के जो है तो इससे लोग दुखी हैं. नरेंद्र मोदी की पॉलिसी बड़ी क्लियर है कि जीरो टॉलरेंस ऑन टेरर एक तरह से एंड नो डबल स्टैंडर्ड्स ऑन टेरर. दैट वे. तो ये वो चाहते हैं कि रिफॉर्म हो वहां पे इस संस्था का और रिफॉर्म होना चाहिए. दैट वे डिमांड उन्होंने वहां भाषण दे दिया उसमें उन्होंने बात कही कि देयर इज़ अर्जेंट नीड फॉर द रिफॉर्म्स.
सवाल: सर यूरेनियम डील विद ऑस्ट्रेलिया और आखिर क्यों इतनी चर्चा हो रही है नरेंद्र मोदी के इस मास्टर स्ट्रोक की और भारत को क्या जरूरत है यूरेनियम की?
जवाब: इट इज अ ग्रेट पॉलिटिकल डिप्लोमेटिक एंड स्ट्रेटेजिक सक्सेस ऑफ़ नरेंद्र मोदी एंड ए सीरियस सेटबैक टू चाइना एक अखबार ने बहुत अच्छा लिखा इस डील की सफलता के बारे में और ये कहा कि फ्रॉम यूरेनियम बैन टू स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप व्हाट ए मिरेकुलस ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ इंडियन ऑस्ट्रेलिया रिलेशनशिप अंडर द लीडरशिप ऑफ नरेंद्र मोदी कितना जबरदस्त लिखा उन्होंने और आवश्यकता इसलिए है बिजली चाहिए यहां पे जो है हमें कोई परमाणु बम तो बनाने नहीं है बनाने तो उसके लिए इसकी जरूरत नहीं है वो सब इंतजाम है इनके पास में दैट विल है तो ऑस्ट्रेलिया क्या है कि यूरेनियम का बहुत बड़ा उत्पादक है 28% वर्ल्ड का यूरेनियम जो है ना उसके यहां होता है वहां पे भारत के भी कैपेसिटी चाहिए कि यहां बिजली उत्पादन से केवल 3% जो है सिविल न्यूक्लियर का कंट्रीब्यूशन है. यहां का टारगेट यह है कि 2047 में हमें जो है एक तरह से 100 मेगावाट का टारगेट हमारा होना चाहिए. उसको स्टार्ट हमें करना चाहिए. दैट व तो ये हम सोच रहे हैं और अभी क्या चार राष्ट्रों से हम पहले से ले रहे हैं. अब ये पांचवा राष्ट्र है ऑस्ट्रेलिया का यूरेनियम लेने की बात हो गई है. बट ये है कि बहुत टाइम से डील रुकी हुई तो नरेंद्र मोदी के जैसे कहना चाहिए इस विजिट की सबसे बड़ा जो हाईलाइट है जो एक हैपनिंग है इस डील का जो आपने कहा मास्टर स्ट्रोक है वो है यूरेनियम डील ग्रेट सक्सेस ऑफ़ नरेंद्र मोदी.
सवाल: सर क्या आपको ऐसा लगता है कि लास्ट मोमेंट पर कोई अड़चन आई थी इस डील के साइन होने में और नरेंद्र मोदी ने अपनी डिप्लोमेसी से उसको ठीक कर लिया?
जवाब: मैंने भी ये पढ़ा कुछ ब्यूरोक्रेसी में होता है ऐसा रेड टेप होता है कभी कोई इशू हटा देते हैं दे वर नॉट वेरी श्योर अबाउट द सेफ्टी ऑफ़ यूरेनियम व्हिच दे आर गिविंग टू अस भारत पहले भी कह चुका इनसे साइन भी कर चुका है पहले जो है कि सेफ्टी की हमारी गारंटी है. लेकिन कुछ हो गया था. फिर गारंटी दी गई. उनको कहा गया कि जो इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी है उसके जितने सेफगार्ड्स हैं वी विल फॉलो 100% डोंट वरी. तो बस फिर नरेंद्र मोदी का इतना कहना बहुत होता है. तो फिर वो डील साइन हो गई. दैट विल बी.
सवाल: सर तो क्या कांग्रेस भी इसका श्रेय लेना चाहती है जो नरेंद्र मोदी की यूरेनियम मास्टर स्ट्रोक रहा है?
जवाब: अब कांग्रेस तो देखो किसी ने मुझे कहा कि यार अब कांग्रेस मरा हुआ शिकार खाती है. ऐसे जो है तो मैंने कहा मरा हुआ तो नहीं हूं. उनके टाइम में भी डील की काफी प्रोग्रेस हुई थी. मनमोहन सिंह के टाइम में इधर-उधर काफी टाइम से चली आ रही है. लेकिन बात यह है ना कि जो अंतिम परिणाम लाता है व्यक्ति अब 13 साल से तो यही लोग हैं ना यही कर रहे हैं. उसको डील जो है और एक असंभव सा काम था उसको करना. हो गया. बहुत झटका लगा चाइना को और अमेरिका को इन देशों को नरेंद्र मोदी ने करवाया कैसे? वरना था कि देखा जाएगा. तो ठीक है कांग्रेस अपनी बात कह सकती है. लेकिन देखो अभी तो ये डील तो नरेंद्र मोदी ने साइन की है. तो जिसे कहना चाहिए एट द मोमेंट तो आपको नरेंद्र मोदी को थैंक यू कहना चाहिए कि देश की एनर्जी के लिए कि आप आपका राज होता उसमें आप कर लेते तो कर लेते तो आपके लिए गीत गाता देश के आपने कर दिया. यश जैसे कहना चाहिए ये डेस्टिनी जो है ये सारी जो प्रोग्रेस है मोदी सरकार के हाथ में लिखी हुई थी तो करवा के डील को ले आए और प्राइम मिनिस्टर खुद गए और करवा के ले आए. क्रेडिट गोज़ टू हिम.
सवाल: सर भारत और ऑस्ट्रेलिया की यूरेनियम डील हुई है उसका कोई टाइमिंग का भी रेलेवेंस है टाइमिंग है?
जवाब: संसार में अचानक एक तो परमाणु परमाणु और इस तरह के न्यूक्लियर सिविल प्राइवेट सेक्टर को खोल दिया भारत ने कितना बड़ा स्टेप उठाया नरेंद्र मोदी ने उदारवादी स्टेप कि काम नहीं रुके पावर जनरेशन नहीं रुके ये फालतू की बातें हैं कि गवर्नमेंट का कंट्रोल है प्राइवेट आए कि नहीं आए किस में क्या है और रेलेवेंसी है कि इंटरनेशनल एक तनाव बन रहा है इस तरह का चाइना का प्रेशर बढ़ रहा है इन कंट्रीज पे दूसरे लोग जो हैं इंडोपेसिफिक के वो सतर्क हो रहे हैं. कुछ ऐसा नहीं हो हर कोई अपने हाथ को मजबूत करना चाहता है. तो अभी क्या और दूसरा क्या है? नरेंद्र मोदी पावर में है. नरेंद्र मोदी अभी उफान में है. उत्साह में है, उमंग में है कि जितने पेंडिंग डील्स हैं करो. जैसे इंडिया में अमित शाह को कहा हुआ है कि जितनी पेंडिंग डील्स हैं वाटर की तुम करो. राजस्थान कर दिया उन्होंने. फिर उस दिन देखा मध्य प्रदेश कर दिया उन्होंने. अमित शाह ने. कितना इफेक्टिवली किया उसको. तो अभी माहौल है सरकार के अंदर कि जितने ऐसे पेंडिंग उनको निपटाओ. तो टाइम यही है सरकार की करने की इच्छा और इंटरनेशनल प्रेशर और इंटरनेशनल सिनेरियो.
सवाल: सर यूरेनियम डील के अलावा और क्या-क्या समझौते हुए हैं भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच जिसमें सबसे पहले डिफेंस कोऑपरेशन पर मैं बात करना चाहती हूं.
जवाब: बस ये तो वही है समझौते हुए जिनको हम कहते हैं दैट वे जो है तो वो डिफेंस हो गया आपका वो सिविल आपकी क्लीन एनर्जी हो गई आपका यूपीआई पेमेंट्स हो गए फिर एजुकेशन हो गया फिर क्रिटिकल मिनरल्स हो गए ये सारे इस तरह के जो है वो एक पैकेज है पूरा जो है वो सारा हुआ है लेकिन मेन जो सक्सेस है मेन जो कहानी है मेन जो हाईलाइट है वो है यूरेनियम डील.
सवाल: सर तो भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच में सर व्यापारिक संबंध कैसे है और सर FTA को कितना बूस्ट मिलेगा?
जवाब: बहुत जबरदस्त जबरदस्त मिलेगा. देखिए सारा जो है जिसे कहना चाहिए एफटी का तो पोष है ही जबरदस्त एफटी का मतलब सीधा सा यह है कहने का कि आपका टैक्स फ्री है. कस्टम ड्यूटी फ्री है और एफटी तो अप्रैल में हो गया था. उसको लागू अभी किया है वहां जाकर के. दैट इज चार अरबों का व्यापार होता था. मान लो अब 8 अरब का हो जाएगा इससे जो है. तो इज़ अ मिरेकुलेस सक्सेस स्टोरी इन ट्रेड एंड फाइनेंस.
सवाल: सर नरेंद्र मोदी ने कहा कि दूध ऑस्ट्रेलिया का लेकिन चाय भारत वाली ही बनती है. मोदी के इस विनोद भाव के बारे में कुछ कहना चाहेंगे आप?
जवाब: देखो नरेंद्र मोदी को वरदान है ईश्वर का. एक सेंटेंस कहते हैं हिट हो जाता है और इसी पे तालियां पीटी इतनी वहां पे कि दूध तो मतलब एक आम धारणा है ना कि दूध तो ऑस्ट्रेलिया से आता है और आता था पहले आज तो नहीं आता. ट्रेडिशनल है कि प्याज दूध वहां से आता है. अब तो अमूल और दूसरे लोग हैं मैदान में. तो कहा भाई दूध तो आपका और चाय फिर यहां बनती है. तो बस एक अच्छा व्यंग था. एक इस तरह से फिर यह भी कहा कि जो प्रवासी हैं वो यहां के माहौल में यहां के जो एटमॉस्फेयर है सारा कल्चर है उसमें ऐसे घुल जाते हैं जैसे कि दूध में शक्कर घुल जाती है. चीनी घुल जाती है. सो दिस इज ऑल एक वहां पहले पीएम थे पिछली बार जो गए थे. उन्होंने कहा मैं खाना बहुत अच्छा बनाता हूं. जो है किसी ने उससे पूछा खाना बनाना छोड़ दिया कि बना रहे हो. तो मैं बना रहा हूं खाना. यस लाइट मूड की बातें.
सवाल: सर 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के लोगों से एक वादा किया था कि आपको 28 साल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. पीएम मोदी ने वादा पूरा किया. आप बता सकते हैं ये किस्सा?
जवाब: बिल्कुल ठीक कह रहे हैं. वादा पूरा किया उन्होंने. 2014 में गए थे वहां पर. अब तो तीसरी चौथी बार गए तो वहां पे गए थे. तो तब तक जो है ना 28 साल से कोई ज्ञान नहीं था. समथिंग तो उन्होंने कहा अभी मैं 28 साल इंतजार नहीं कराऊंगा. एंड एग्जैक्ट तीन बार हुआ है जाकर के तो ऐसे बात आई थी उनकी बात पूरी हो गई जो उन्होंने कहा था.
सवाल: सर ऑस्ट्रेलिया में सरकारें बदलती हैं प्रधानमंत्री बदलते हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति वहां के नेतृत्व का सम्मान और क्रेज नहीं बदलता एंथनी एल्बलिंस से लेकर उनके पूरे प्रशासन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने नतमस्तक होना क्या ऑस्ट्रेलिया की कूटनीतिक मजबूरी है या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल केमिस्ट्री का जादू?
जवाब: नो मजबूरी नो कंपल्शन मोदी मोदी की पर्सनालिटी मोदी का आकर्षण और आप देख रहे हैं जब प्रधानमंत्री बिछा हुआ है तो प्रशासन तो बिछेगा ही ना एंड नॉट ओनली प्रधानमंत्री इन पावर वहां का जो लीडर ऑफ़ अपोजिशन है सबसे एक पावरफुल आदमी है वहां पर उससे मिले वो वहां पे जो है आप देखिए कितनी उदारता और किस तरह का जो है तो ही इस पॉपुलर अक्रॉस द कंट्री.
सवाल: सर ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के रिश्ते अब सिर्फ व्यापारिक नहीं है बल्कि क्वाड के जरिए रक्षा और क्रिटिकल मिलर रहे जैसे कि लिथियम की सप्लाई चेन तक पहुंच गए हैं तो सर इस डेवलपमेंट को आप कैसे देखते हैं?
जवाब: यू अब्सोलुटली करेक्ट. इट इज़ अ चेंजिंग रोल ऑफ़ इंडिया इन ऑल दिस एरिया जिसे कहना चाहिए. समय के हिसाब से इंडिया जो है अपने हिसाब से चेंज करता है. अपनी रिक्वायरमेंट को जो है क्वाड गाने के बाद में क्या है कि अब खाली ये नहीं है कि आप अपना क्रिकेट खेल रहे हैं वो कर रहे हैं. जो है दैट इज़ तो अब्सोलुटली फाइन के इंडिया चेंजिंग इट्स इक्वेशन विद दीज़ कंट्रीज एज़ पर द रिक्वायरमेंट ऑफ़ द डे.
सवाल: सर प्रधानमंत्री मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले उन्हें जो धमकी मिली थी उसके बारे में क्या कहेंगे आप?
जवाब: हां वो कोई खास नहीं निकली. फिर छोड़ दिया उसको तीन तारीख को एक पागल किस्म का आदमी था वहां जैसे होते हैं कई इंडिया में भी कई ऐसे दिखते हैं Facebook पर लिख दिया उन्होंने कि जहां पे फंक्शन हो रहा है वो उसके अगर स्टेडियम की छत को अगर खुला नहीं रखा गया छत को बंद कर दिया गया तो बर्बाद हो जाएगा ऑस्ट्रेलिया इस तरह की मूर्खतापूर्ण बातें वहां पर लिख दी उसने पुलिस एक्शन लेती है एक्शन लिया उसको पकड़ा वहां पे जो है उसने माफी मांग ली और कहा मैंने तो ऐसे लिख दिया था तो छोड़ दिया उसको इज़ नॉट ए थ्रेट करके जो है दिस इज़ नो सीरियस राइट.
सवाल: सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियााईियाई बिजनेस सीईओस को संबोधित करते हुए कहा कि इंडिया इज अ लॉन्ग टर्म बेट. इसके मायने क्या हैं?
जवाब: मायने सही है. मैंने पहले भी कहा नरेंद्र मोदी स्पीक्स इकोनमिक लैंग्वेज दी डेज इन इंटरनेशनल फॉर्म्स. किसी राजनेता को मैंने अदर दैन वेस्टर्न कंट्रीज दो-तीन देशों को छोड़ दो. तो किसी को मैंने ऐसी भाषा बोलते हुए नहीं देखा कि इकोनमिक भाषा कहना चाहिए. जी बिकॉज़ ही गोइंग मी टेकन द फ्रंट सीट इन एवरीथिंग जो है तो उन्होंने सिर्फ 200 लोग थे वहां पे इन्वेस्टर्स थे और कंपनीज़ के सीईओ थे और सब थे. उनसे कहा कि डोंट मिस द बस डोंट मिस द चांस और कारण बताया उन्होंने कि पैसा लगाओ दो पैसे तुम भी कमाओगे. व्यापारी का ससुरा होता है ना पैसा वहां लगाओ दो पैसे वापस आते हैं वहां से जो है उसने कहा सबसे बड़ी बात ये है प्राइम मिनिस्टर ने कहा कि हमारे यहां जो है पॉलिटिकल स्टेबिलिटी है व्हिच इज़ द फर्स्ट प्रीरिक्व्विज़िट रिक्वायरमेंट ऑफ़ एनी डेवलपमेंट एनी मेजर डेवलपमेंट स्टोरी वो हमारे यहां है. बिल्कुल. सेकंड कहा कि डिसाइसिव गवर्नेंस ऑन द स्पोर्ट सिंगल विंडो फैसले होते हैं मेरे यहां जो है. तीसरा
भारत की अर्थव्यवस्था संसार की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है. अभी हम चार पर हैं. कल को तीन पे नंबर पे आने वाले हैं वहां पे और फिर 140 करोड़ों का मार्केट है हमारे पास में. आइए और पैसा लगाइए यहां पे. अच्छी सी बात की उन्होंने. आप देखना रिस्पांस आएगा उसके अंदर.
सवाल: सर क्या गुजरात में भी बड़ा निवेश करेगा ऑस्ट्रेलिया?
जवाब: हां. एक कटसी होती है जहां से प्राइम मिनिस्टर बिलोंग करते हैं तो मन तो करता है ना कि यार थोड़ा आपके इलाके में भी हम काम करें जो है और गुजरात तो आजकल क्या है ना इज अ न्यू डेवलपमेंट सेंटर कितनी चीजें वहां गई है और अच्छा परिणाम दे रही है गुजरात में भी है ना पॉलिटिकल स्टेबिलिटी है लॉ एंड ऑर्डर है कोई दंगा फसाद नहीं है कोई कर्फ्यू नहीं है कोई कुछ नहीं है सारा वहां पे जो है और सिंगल लाइन एडमिनिस्ट्रेशन है दिल्ली का गुजरात गवर्नमेंट का परफेक्ट कोऑर्डिनेशन है तो गुजरात में अभी तो क्या दो यूनिवर्सिटीज हैं उनके वो कैंपस खोलेंगे वहां पे जो है और दिसंबर में शायद कोई सिस्ट मंडल वहां से आएगा. बड़ा डेलीगेशन आएगा और इंडियंस ऑफिशियल साथ वहां बैठकर तय करें गुजरात में कैसे और डेवलप करें. गुजरात में बड़े-बड़े पहले कई प्रोजेक्ट आए हुए हैं. सेमीकंडक्टर का हो रहे हैं. गिफ्ट सिटी बन गई वहां पे. दैट तो आने वाला कल जो है ना इंडस्ट्री का गुजरात है. अगर देखें एक तरह से जो है तो वो लोग आएंगे दिसंबर में.
सवाल: सर मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मदद में नहीं देखते पासपोर्ट का रंग. तो इसके मायने क्या हैं और साथ में सर क्या उन्होंने अपने भाषण में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया है?
जवाब: देखो मायने तो इसके हैं कि उन्होंने कहा हम तो मानवता को सर्वोपरि मानते हैं. मानवता के आधार फैसले करते हैं. हम जो मदद देते हैं वो मानवीय संबंधों को देख के देते हैं. सरकारों की मदद नहीं करते हैं. व्यक्तियों की मदद करते हैं. उन्होंने कवड में मदद करी और मदद करते हैं. अभी पिछले दिनों गए थे. कहा वहां भी पैसा देके आए काफी जो है सारा. तो उसको कहना चाहते थे कि मेरे यहां छोटा बड़ा कोई नहीं है. मानवीय आधार पे हम करते हैं और ह्यूमन एप्रोच जो गवर्नमेंट की है वो हमारी सबसे पहले रहती है. तो ये थोड़ा सा क्लेरिफाई करना चाहते थे कि मैं दान दाता नहीं हूं. एक तरह से जैसे कई बड़े देश कहते हैं दान दे दिया उसको. ऐसा नहीं है. मैं मानवीय दृष्टि से मदद करता हूं लोगों की जो ऑपरेशन सिंदूर तो एक प्रिय सब्जेक्ट है. तो उन्होंने भी उन्होंने कहा कि अभी तो डेमो देखा आप लोगों ने. भारतीय प्रवासी थे वहां पे. अभी तो डेमो देखा आपने और कई बारी आती है ना बात राजनाथ सिंह कहते हैं पिक्चर बाकी है दैट इज है और दूसरा नरेंद्र मोदी ने कहा कि भाई आतंकियों के अड्डे नष्ट हो रहे थे गोलाबारी हो रही थी लेकिन आवाज बहुत दूर तक सुनाई दे रही थी ऑब्वियसली मैसेज था अमेरिका के लिए और देश टर्की के लिए जो पाकिस्तान को सपोर्ट करते हैं कि देखिए क्या हो रहा है वहां पे आते हैं
सवाल: सर मेलबर्न में पीएम मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते वन डे क्रिकेट मैच की तरह.
जवाब: यह मतलब यह है कि रिजल्ट ओरिएंटेड है, स्पेसिफिक हैं. जी. हाथों हाथ हैं. हां. इंटरनेशनल मैच में ये होता है. उनका कि वी मीन बिनेस. प्रसाइली अगर इसका मतलब देखा जाए इसका मतलब है कि वी मीन बिनेस. दिस इज ऑल.
सवाल: सर ऑस्ट्रेलिया द्वारा 16 साल से जो कम आयु के बच्चे हैं उनके सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का पीएम मोदी ने स्वागत किया. क्या भारत भी आगे चलकर इस नीति का अनुसरण करेगा?
जवाब: अब्सोलुटली. इंडिया मे लाइक टू फॉलो द पुट द सेम कर्व्स ऑन सोशल मीडिया और मैंने सुना है कि जो मिनिस्टर है अश्विनी वैष्णव उन्होंने इस काम को अपने हाथ में लिया है प्राइम मिनिस्टर के कहने से और जो इसके डिफरेंट ग्रुप्स हैं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स हैं और जो स्टेक होल्डर्स हैं उनको बुलाया है कि एज रेस्ट्रिक्टेड हम कैसे इसको प्रतिबंधित करें किस तरह से क्या करें और प्राइम मिनिस्टर वहां जाके आए हैं. आई थिंक नाउ दिस विल गेट मोमेंटम एंड अश्विनी वैष्णव विल गेट सम टाइम टू फाइनलाइज द ड्राफ्ट. फिर शायद कैबिनेट में जहां भी जाएगा कहीं पे होगा इट्स अ गुड मूव.
सवाल: सर क्या आपको ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा भारत के फ्यूल फर्टिलाइजर और फॉरेन एक्सचेंज के दर्द की दवा है?
जवाब: जिन देशों से हमें तेल मिलता है ये मिलता है फॉरेन एक्सचेंज. फॉरेन एक्सचेंज तो बचता ही है. जो सब चीजें आती है बाहर से नहीं खरीदना पड़ता है. दैट्स इट. लाइट मूड में किया गया कमेंट है. बट अब्सोलुटली करेक्ट.
सवाल: सर स्पोर्ट्स प्रमोशन के क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलिया के साथ कोई समझौता हुआ. क्या भारत में 2036 में ओलंपिक आयोजन करने को लेकर कोई बातचीत हुई? सर व्हाट आर द हाईलाइट्स?
जवाब: हेडलाइन बेसिकली ये है कि 2036 के ओलंपिक की तो बात हुई. हां. तो उन्होंने कहा हम सपोर्ट करेंगे आपको. कोई इशू नहीं है. कॉमनव्थ शायद 2030 में तो वो भी इंडिया उसमें अपना वो कर रहा है और बात हुई समझौते की तो 2023 में समझौता एक एमओवी साइन हो गया था. फॉर कोपरेशन स्पोर्ट जो है उसी को एक्सपंड करने की उसको फॉलो करने की उसको फास्ट ट्रैक करने की बात हुई है कि आप करिए इसको दैट जो है उसने चेन्नई में जो है दिसंबर में जो बिग बैश लीग जो है 2026 जो है वो है उसका पहला मैच है ये भारत में किसी विदेशी लीग का पहला मैच होगा द क्रेडिट गोज़ टू द प्रेजेंट गवर्नमेंट हो सकता है प्रधानमंत्री वहां जाए उस समय जो है तो आईडिया यह है कि नाउ ऑस्ट्रेलिया व्हिच इज़ नोन फॉर सपोर्ट्स नाउ दे आर एंटिंग इंटू दिस एरिया आल्सो फॉर म्यूचुअल कोपरेशन.
सवाल: सर आपको लगता है क्या आतंकवाद का शिकार ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री और क्या नरेंद्र मोदी से इसको लेकर उनकी कोई चर्चा हुई होगी?
जवाब: इसमें कोई शक नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया एज अ कंट्री हैज़ बीन विक्टिम ऑफ दिस वायलेंस टेरर जो है 2017 में आप देखिए वहां पे कोई प्लेन का हो गया था उड़ाने उड़ाने का एतिहाद एयरलाइंस का इशू था. दो लोग पकड़े गए थे. दोनों भाई थे. एक और सिडनी में इस तरह का बीच में कुछ हुआ. वहां एक पकड़ा गया. पाकिस्तानी मूल का था. यह तो वास्तव में नरेंद्र मोदी ठीक कहते हैं कि पाकिस्तान इज द ओनली इंटरनेशनल कैपिटल ऑफ़ टेररिज्म एंड इज़ एक्सपोर्टिंग टेरर टू एव्री पार्ट ऑफ़ द वर्ल्ड. दैट जो है तो उन दोनों ने यही तय किया भाई टेरर के खिलाफ तो होना चाहिए. देयर इज़ अ कंसेंस बिटवीन द टू मिलके साथ चलेंगे दोनों. साथ मिलके काम करेंगे. गुड.
सवाल: सर तमिलनाडु के मंदिरों से चोरी होकर ऑस्ट्रेलिया पहुंचे 12वीं सदी के मूर्तियों को भारत वापस लौटा लाने की मुहिम को आप कैसे देखते हैं?
जवाब: मुहिम अच्छी है. नरेंद्र मोदी कंसर्न फील करते हैं कि अलग-अलग देशों से नरेंद्र मोदी मूर्तियां ला चुके हैं. इन मूर्तियों में शायद तमिलनाडु वालों का ज्यादा सेंटीमेंट है. इंडिया का सेंटीमेंट है. दैट इज तो गए तो मूर्तियों की बात हुई वहां पे. तीन प्राचीन मूर्तियां हैं. आप देखिए और बड़ी फेमस मूर्तियां हैं. वो है भद्रकाली, नंदी और कार्तिकेय. ये तीन बड़ी प्राचीन मूर्तियां हैं. वो ला रहे हैं वहां से अब आ जाएंगी. अच्छी बात है. अच्छा प्रयास है और जो अवशेष हैं भारतीय संस्कृति के भारतीय धर्म के विदेशों में पड़े हुए हैं जो उनको लाने का सरकार का अच्छा प्रयास है.
सवाल: सर ऑकलैंड में मौजूद रहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 से 30 साल पुराने मफलर का एक बहुत भावुक किस्सा सुनाया. अब पूरा सभागार उस दौरान तालियों से गूंज उठा. किस्सा क्या था?
जवाब: लोकल सेंटीमेंट को टच करते हैं नरेंद्र मोदी. पहली बात है कि 25 30 साल पुराना मफल उन्होंने संभाल के रखा. आप देखो नरेंद्र मोदी कार्यशैली की बात देखिए आप ये फिर संभालने के बाद वो छोटे से कमरे में रहते गुजरात में पहले अब तो थोड़ा ठीक हो गया वो कमरा यहां जो है ये उस कमरे में कहां जगह थी मफत कहीं रखा हुआ अटैच वटची में कहीं पड़ा होगा दैट है वो तो फकीर की तरह रहते हैं ना जब सीएम थे 10 * 12 कमरा था बस उसी में जाते चढ़ जाते ऊपर वापस आ जाते ऐसे रहता था वहां पे जो है शादी की पराकाष्ठा जिसे कहना चाहिए तो फिर अब क्या हुआ कि उनको याद रह गया मफलर ले आए साथ में सर्दी थी तो मफलर पहन लिया मफलर पहन लिया इस घटना का जिक्र किया तो लोकल सेंटीमेंट को टच किया ना तो तालियां की गड़गड़ाहट हुई वहां पे और सवाल यह है कि वो खाली दिखावा करने के लिए नहीं निकाला था कि मैं भाई आपको याद दिला रहा हूं इस घटना की मेरे पास ये मफसर है वो शो करना चाहते थे ऑस्ट्रेलिया के लोग मेरे कितने करीब है दिल के मैं उनका कितना ध्यान रखता हूं कितनी पुरानी बातों को याद रखता हूं कितना भावुक हूं उन चीजों को संभाल के मैं किस तरह से रखता हूं और आज मैं उसको पहन के आया हूं नाइस ही इज़ इमोशनल किंग नरेंद्र मोदी तो एक नई व्याख्या है यह भावना सम्राट भी नरेंद्र मोदी राजनीति के साथ-साथ.
सवाल: सर नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा से ठीक पहले वहां के प्रधानमंत्री ने इंडियन एक्सप्रेस को एक इंटरव्यू दिया और कई महत्वपूर्ण बातें कही. आखिर इस इंटरव्यू के क्या थे हाईलाइट्स?
जवाब: एक नई परंपरा है. अच्छी परंपरा है. नरेंद्र मोदी जहां जाते हैं तो उस देश का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री पहले जो है कई बार तो जॉइंटली या कई बार वैसे इंटरव्यू देते हैं. उससे एक दिशा बनती है. एक माहौल बनता है. एक मोमेंटम बनता है उससे जो है. इसमें तीन बातें उन्होंने बड़ी इंपॉर्टेंट कही. एक तो उन्होंने कहा नरेंद्र मोदी इस ग्लोबल लीडर मैं मिल रहा हूं उनसे जो है दूसरा उन्होंने कहा कि एंटी वीजा जो माहौल है विश्व के अंदर ये गलत है वीजा शुड नॉट बी सो रेस्ट्रिक्टिव अच्छी बात कही तीसरा ये डील के बारे में उन्होंने कहा कि वो आ रहे हैं डील हो रही है भारत के साथ में नए रिश्तों की शुरुआत है और चौथा उन्होंने चाइना की तरफ इशारा करते हुए कहा है कि ब्राजील और भारत जैसे लोग हैं जो सिस्टम में नहीं है अभी इनको सिस्टम में लाया जाए वहां पे सिस्टम मतलब कि इनका ध्यान नहीं रखा जा रहा है ग्लोबल साउथ वाली बात है दैट वे तो चाइना की तरफ उन्होंने इशारा किया वहां पे तो कुल मिला के अच्छा इंटरव्यू था और एक अच्छा मैसेज गया वहां पे.
सवाल: सर न्यूजीलैंड को प्रशांत महासागरीय देशों का प्रवेश द्वार कहा जाता है. क्या इस दौरे के दौरान भारत ने फिजी पापुआ न्यूगनी और छोटे द्वीप के देशों के बीच अपनी रणनीतिक पहुंच को और मजबूत कर लिया. जहां अभी तक चाइना अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहा था.
जवाब: अबब्सोलुटली देखिए जब आप कोई दिल्ली में आएगा कोई व्यक्ति प्रभाव उसका होगा तो जयपुर तक असर जाएगा उसका. लखनऊ तक असर जाएगा. तो जब न्यूजीलैंड गए वहां पे आप देखिए ऑस्ट्रेलिया गए इंडोनेशिया गए असर जाना स्वाभाविक है तो ये छोटे-छोटे राष्ट्र इन राष्ट्रों की बाउंड्रीज के आसपास ही कहीं ना कहीं मैसेज हैज़ ट्रेवल्ड टू देम आल्सो तो उनमें मन में भी आया होगा कि चाइना के खिलाफ सब लोग खड़े हो रहे हैं हम भी इसको आज नहीं तो कल ज्वाइन करेंगे दैट विन दिस इज ऑल.
सवाल: सर आखिर इस यात्रा के दौरान क्या-क्या समझौते हुए भारत और न्यूजीलैंड के बीच?
जवाब: बेसिकली तो जो समझौतों की बात आती तो मतलब मोटे तौर पर तो एक तो एफटीए की बात थी उसमें कि करेंगे इसको जो है तो मोटे तौर पे समझौते वही है देखिए आप मेरिट सिक्योरिटी कर लीजिए ट्रेड कर लीजिए यूपीए पेमेंट कर लीजिए और क्लीन एनर्जी कर लीजिए इस तरह के जो सारे जो स्टैंडर्ड हैं डेवलपमेंट के एरियाज हैं सेक्टर्स हैं इनके समझौते हैं वहां पे हुए हैं कुल मिलाकर गिनती में जाएंगे तो 10 समझौते वहां पे हुए हैं और सबसे बड़ी बात है एफटीए के अंदर भी यह है कि 40 साल बाद पहली बार भारत का प्रधानमंत्री वहां गया है ये सबसे इंपॉर्टेंट आस्पेक्ट है.
सवाल: सर भारत न्यूजीलैंड का एफटीए क्या है आखिर दोनों देशों के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
जवाब: ये देखिए सारा आपका जो एक्सपोर्ट्स हैं सारे के सारे वो कस्टम फ्री हो जाएंगे. सबसे बड़ी बात तो यह है इसके अंदर जो है और फिर दूसरा जो व्यापार है आपका व्यापार बढ़ेगा. मान लीजिए आज जो प्रेजेंट सिनेरियो है वो 3.95 बिलियन डॉलर का व्यापार है जो बढ़ेगा उससे जाकर के आर्थिक क्षेत्र में नई संस्कृति का जन्म होगा वहां पे और व्यापार बढ़ेगा. सबसे बड़ी बात यह है कि सारे आपके एक्सपोर्ट जो है वो आपके ऑलमोस्ट 100% जो है वो फ्री हो जाएंगे.
सवाल: भारत के कैसे हैं न्यूजीलैंड के साथ में व्यापारिक रिश्ते और पीएम मोदी की यात्रा के बाद में यह रिश्ते और मजबूत होंगे कितने मजबूत होंगे?
जवाब: रिश्ते मजबूत होंगे इसमें कोई डाउट जैसे मैंने आपसे कहा ना कि वो एफटीए वाला कि वो फ्री हो जाएंगे और उससे हो जाएगा और दूसरा उन्होंने ये भी रखा है व्यापारिक रिश्तों के अंदर जो है कि अगले 15 सालों के अंदर जो है हम जो है $20 अरब डॉलर का टारगेट रखते हैं ट्रेड का जो है और अगले 4 साल के अंदर मतलब 2030 तक जो है वो हम 35000 करोड़ का टारगेट रखते हैं जो है तो काफी उत्साहजनक घोषणाएं हैं और अच्छे ट्रेड एग्रीमेंट्स भी और आपका ट्रेड का जो वॉल्यूम है वो बढ़ेगा इससे.
सवाल: सर पीएम मोदी के न्यूजीलैंड पहुंचने पर हाका का स्वैग दिखा आखिर क्या है हजारों साल पुराने इस नृत्य का इतिहास?
जवाब: ये ट्राइबल नृत्य है वहां का पुराना नृत्य है जो वीआईपी जाते हैं तो वहां उसको दिखाते हैं दैट इज है और रिलीजियस नृत्य टाइप है मैंने पढ़ा इसमें ये नृत्य क्या होता है तो उन्होंने कहा कि जो लोग डांसर डांस कर रहे होते हैं वो पहले तो क्या करते हैं कि बहुत जमीन पे बहुत जोर से अपना पांव मार मारते हैं. एक पिक्चर आई थी ना साउथ के दो लड़के थे हीरो नाटो नाटो गाना आया था. बड़ा हिट हुआ था. लेक्स का ही कमाल था उसके अंदर गाने के अंदर जो है तो उन्होंने हो सकता है वहां से लिया. वो कहते हैं पांव को बहुत जोर से धरती मारते हैं. इसका फिर अपने दोनों हाथों से छाती को पीटते हैं. पांव को पीटते हैं. जान को पीटते हैं और फिर अपनी आंखों को ऐसे डरावनी आंखें मोटी-मोटी बना के दिखाते हैं. फिर डांस करते हैं वहां पे. ट्राइबल डांस है एक तरह से. तो ये कोई मनोरंजन का गीत नहीं है. कहते हैं भावनाओं से जुड़ा हुआ. वहां की धार्मिक भावनाओं से विरासत से लिगेसी जुड़ा हुआ नृत्य है.
सवाल: सर व्हाट अबाउट एनआरआई
जवाब: एनआरआई तो देखो दिल के करीब हैं. प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं लोग टूट के पढ़ते हैं. इनको भी अच्छा लगता है. ये भी कहते हैं मेरे दिल के करीब हैं. वो भी देखते हैं कि चलो 5000 मील से चल के दूर से भारत का एक व्यक्ति आया और फिर नरेंद्र मोदी आया. फर्क है ना दो में? भारत का कोई व्यक्ति जाएगा तो वैसे ही गले लगाएंगे. और नरेंद्र मोदी जाएगा तो महागले लगाएंगे. मतलब पागलपन की सीमा तक जाएंगे. 10,000, 20,000, 30-000 लोग इकट्ठे होकर आ जाएंगे उनको सुनने के लिए देखने के लिए. दैट वे जो है तो एनआरआई पहले इतना मान सम्मान इनका नहीं था विदेशों में. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद में इनका रिकॉग्निशन इनका मान सम्मान जो है ना एनआरआई का बाहर वो बढ़ा है.
सवाल: सर क्या आपको ऐसा लगता है कि इस बार का जो न्यूजीलैंड यात्रा है वो एक टर्निंग पॉइंट साबित होगी दोनों राष्ट्रों के संबंधों के लिए?
जवाब: हो सकती है क्योंकि जो इस तरह की बातें हो रही है कि 40 साल में पहली बार आप जा रहे हैं वहां पे दैट है इतना आपका स्वागत हो रहा है वहां और आप देखिए ना कि 40 हजार लोग आपको सुनने के लिए आ रहे हैं. फिर इस तरह के मेजर आप एग्रीमेंट कर रहे हैं. फिर इंडोपेसिक में आप उन्हें पॉलिसी बना रहे हैं. ग्लोबल साउथ में पॉलिसी बना रहे हैं. मैरिटाइम में आप सपोर्ट कर रहे हैं. आप डिफेंस की डील्स कर रहे हैं. इंटेलिजेंस शेयर कर रहे हैं. तो कह सकते हैं आने वाले समय में यह नेगलेक्टेड था कंट्री आफ्टर 40 इयर्स नरेंद्र मोदी है टेकन केयर और स्वाभाविक तौर पर ऐसा लगता है कि आने वाले समय में ऐसा लगेगा कि यात्रा जो थी इट वाज़ अ टर्निंग पॉइंट इन द रिलेशनशिप ऑफ द टू नेशंस.
सवाल: सर आखिर न्यूजीलैंड की धरती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कदम रखने से पहले कैसा मास्टर स्ट्रोक खेल दिया न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने?
जवाब: अच्छा था. मास्टर स्ट्रोक था. उनकी भावना थी, स्ट्रेटजी थी. आप कह सकते हैं मास्टर स्ट्रोक था. अभी तक क्या है कि न्यूजीलैंड एक तरह से तटस्थ नहीं था. झुका रहता था चाइना की तरफ. दैट विल आर्थिक दबाव था चाइना का. इस बार उन्होंने ये कहा साफ तौर पे कि हम दबाव से मुक्त है. एंड नाउ इंडिया इस आवर स्ट्रेटेजिक पार्टनर. सबसे बड़ी बात ये है. तो चाइना को बड़ा बुरा लगा होगा इसके अंदर से. तो उनका जो है ना चाइना को छोड़ के भारत के पक्ष में टिल्ट होना उनका यहां की तरफ झुकना ये सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक था. जो नेचुरली एज अ पार्ट ऑफ़ डिप्लोमेसी नरेंद्र मोदी को भी अच्छा लगा होगा. नेचुरली. सो दिस इज आल्सो दे टेकन अ शिफ्ट जिसे कहना चाहिए दे विल मूव टू नरेंद्र मोदी मूव टू इंडिया अब वो समझ रहे हैं कि आने वाली कल की जो लीडरशिप है चाहे वो ग्लोबल साउथ की है या इंडोपेसिफिक की है वो अब भारत के पास है नरेंद्र मोदी के पास.
सवाल: सर आखिर इन तीनों देशों की मीडिया में क्या रिस्पांस मिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन ऐतिहासिक यात्राओं को लेकर?
जवाब: मीडिया का था अच्छा रिस्पांस था वहां पे हम सबसे बड़ा इंटरेस्टिंग पार्ट ये था कि मैंने ये पढ़ा कि एक पत्रकार थे वहीं के एक इंडियन बीट कवर करता दूसरा पत्रकार उसने पूछा यह न्यूजीलैंड की बात हो रही है तो पूछा क्या हु इज नरेंद्र मोदी एंड व्हाई इज कमिंग टू न्यूजीलैंड तो इसने कहा यू डोंट नो नरेंद्र मोदी उसने कहा नहीं जानता हूं थोड़ा आप बताइए क्यों आ रहे हैं क्या है ये हैं तो उसने कहा कि ही इज़ वर्ल्ड्स वन ऑफ़ द मोस्ट पावरफुल लीडर्स एट द मोमेंट ही हैज़ पॉपुलरिटी ऑफ़ 1440 करोड़ इंडियंस ही इज़ द लॉन्गेस्ट सर्विंग इेड प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया दैट जो है और Facebook के सबसे पॉपुलर चेहरा है वो तब उसे समझ में आया कि नरेंद्र मोदी कौन है एक तरह से और फिर वहां के अखबारों ने सर्च मिस्टर इंडिया लिखा है जगह-जगह पर कहीं ये भी लिखा है कि मोदी ऑपरडी करके भी संबोधित किया उनको पॉजिटिव जिसे कहना चाहिए और एक अखबार ने तो ये भी लिखा है ऑस्ट्रेलिया के अखबार ने कि ही इज़ अ हीरो ऑफ़ ग्लोबल साउथ और एक कहा ग्लोबल साउथ की लीडरशिप है नरेंद्र मोदी के पास है दैट वे एंड इट सम सॉर्ट ऑफ़ ए सिग्नल टू चाइना आल्सो तो मीडिया ने बहुत अच्छा लिखा है इस बार वहां ऑस्ट्रेलिया का और न्यूजीलैंड का हो सबका गुड कवरेज.
सवाल: सर खालीस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निजर की हत्या की साजिश में अब तक यह कहा जाता था कि भारतीय एजेंट भारतीय सरकार का नाम है संलिप्तता है. लेकिन अब वही कनाडा की पुलिस ये कहती है कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिसमें भारत की संलिप्तता. तो क्या यह माना जाए कि यह कूटनीतिक जीत है भारत की?
जवाब: यू कैन से इट मेजर स्ट्रेटजिक विक्ट्री ऑफ नरेंद्र मोदी गवर्नमेंट दैट वे 18 जून को कनाडा में गुरुद्वारे के बाहर उनकी हत्या हुई थी. सात लोग पकड़े गए थे वहां से. उसके कुछ महीने बाद में सितंबर 2023 में जो है वहां के प्राइम मिनिस्टर ने पार्लियामेंट में बयान दिया कि वी हैव क्रेडिबल एलगेशंस. ठीक? जिनमें व्हिच हैव पोटेंशियल इंडिकेशन ऑफ़ द इन्वॉल्वमेंट ऑफ इंडियन गवर्नमेंट और इंडियन एजेंट इन द किलिंग ऑफ़ दिस पर्सन. बड़ा हंगामा हुआ उससे गवर्नमेंट ने कहा भारत सरकार अब्स जो है संबंध खराब हुए दोनों देशों के अब जाके वहां ठीक हुए अब अचानक क्या हुआ है कि अमेरिका का जो फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन है उसने जांच करते-करते पाया कि इसके अंदर जो है ना दो इंडिया के जो लोग इनवॉल्व थे वो आपके थे लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बरार ने कि दूसरे लोग जो हैं उनको चार्ज कर दिया और साथ में यह भी कह दिया नो इंडियन इनवॉल्वमेंट इज़ सीन इन दिस केस क्लीन चिट दे दी उस क्लीन चिट के देते ही या उसके आसपास साइमलटेनियस जो है वहां की फेडरल ब्यूरो है उसने क्लीन शीट दे दी कि नो इंडियन इन्वॉल्वमेंट तो बहुत बड़ा एक डिप्लोमेटिक रिलीफ को या जस्टिस हैज़ बीन डन विद इंडिया बाय कनाडा यूं कहिए रेट्रोस्पेक्टिवली जस्टिस हैज़ बीन डन बाय कनाडा एंड यूएसए फोर्सेस टू इंडिया इज़ अ गुड टू थिंग अच्छा जो सरकार कहती थी हमारा कोई इन्वॉल्वमेंट नहीं है. नाउ इट हैज़ बीन वेरीफाइड बाय टू सेपरेट एंड इंडिपेंडेंट इन्वेस्टिगेटिव एजेंसीज़.
सवाल: सर होर्मुज कभी बंद कभी चालू अभी करंट स्टेटस क्या है और दूसरा सर अगर सचमुच रेगुलर होर्मुज नहीं शुरू होता है तो क्या आने वाले दिनों में विश्व युद्ध का कारण बन सकता है?
जवाब: देखो होर्मुज तो एक परपचुअल सिर दर्द बन गया है संसार के लिए यह झगड़ा केवल अमेरिका और उसका नहीं है सारा संसार इससे प्रभावित है अभी कल मैंने देखा कि वो 35 या 36 कोई जो है टैंकर वहां पड़े हुए हैं जिनमें खाने का सामान है फल है सब्जी है दूध है वहां से नहीं आ पा रहा है. ठीक है ना? जी. तो अभी ईरान की दादागिरी है. इस पॉइंट पर मैं मतलब ट्रंप के साथ हूं फॉर ए चेंज. इस पॉइंट पर क्यों खुला हुआ था पहले रास्ता 100 साल से. आपने लड़ाई के चक्कर में उसको बंद कर दिया. लड़ो आप अमेरिका से. बाकी संसार क्यों पनिश कर रहे हो? उसको बंद करके दैट. सारा संसार प्रभावित होता है. आपकी मेरी रसोई प्रभावित होती है. उससे दवाइयां, मेडिकल सब फल सब्जियां सब प्रभावित होते हैं. उससे जो है तो उन्होंने रोका. कई बार रोका, कई बार खोला. अब लेटेस्ट क्या है? इसमें कहने की स्थिति में नहीं है अपन कि वहां बंद है खुला है. रात को बयान आएगा तो मालूम पड़ेगा. हर पल हर एक घंटे में बयान आता है वहां पर कि आज ये चालू आज ये बंद आता है. फिर इसके टाइटल को लेके आता है.
इतने सालों से एक वर्ल्ड की ऐसी प्रॉपर्टी थी एक तरह से सबके लिए फ्री फॉर ऑल था. वहां पे जो है कहता है जो है ईरान के नो इट इज़ अंडर माय कंट्रोल. ट्रंप कह रहे हैं कि नो इट यूनिवर्सल प्रॉपर्टी है. नेचुरल प्रॉपर्टी है. जैसे पहले थी वैसे रखो इसको और मानते नहीं है. यह खुलवाते हैं हमला कर देते हैं जो है ये फिर करते हैं. फिर वो हमला कर देते हैं. तो जनता परेशान हो रही है. अभी एक झगड़ा हुआ कि साइप्रेस का झंडा लगा के एक जहाज निकल रहा था वहां से और पकड़ा गया कहीं तो 10 भारतीय फंस गए. उन्होंने बड़ी मुश्किल से निकाला. एक आदमी अभी भी लापता है. तो कल मैंने पढ़ा कि 32 जहाज आज निकल गए. अब इंडिया का थोड़ा सा उसमें स्मार्ट हैंडलिंग है. पिछले दिनों मैंने पढ़ा कि 18 वहां से टैंकर से निकल के सेफली आ गए झंडे के साथ. वो तो इंडिविजुअल बात हो गई. दैट इज है. तो ये बड़ा इंटरनेशनल इशू है. और अब क्या इजराइल इससे बाहर है इस झगड़े से? दैट इज है. तो हो सकता है कि होर्मुज एक ऐसा मुद्दा बन जाए कि और ट्रंप विल हैव ए वर्ल्ड स्पॉट ऑन दिस इशू. पहली बार ट्रंप के समर्थन में संसार खड़ा हो गया. यार इसको तो खुलाओ. हॉर्मोज को तो खुलाओ. अब ईरान को ठीक करो. आप जो ये हो सकता है बात आगे बढ़ती चली जाए. वर्ल्ड वार का तो ऐसा कोई दूसरा देश तो इसमें आएगा नहीं. वर्ल्ड वार के तो मतलब यह है कि डिस्ट्रक्शन की बात आप कह सकते हो. टोटल डिस्ट्रक्शन जो है जैसे कि ट्रंप को गुस्सा आ गया और वो मानता नहीं है. तो कोई और बहुत बड़ा लेस देन परमाणु कुछ ऐसा हमला हो जाए वहां पे. लेकिन ये सीरियस थ्रेट है एज अ मैटर इनकन्वीनियंस भी है और थ्रेट भी है. दैट जो है तो होमस का तो मतलब इस तरह की स्थिति है.
सवाल: सर तेहरान में खामनेई के अंतिम संस्कार के समय कुछ ईरानी नेताओं के द्वारा ट्रंप की हत्या की खुली धमकी और उस पर ट्रंप के जवाब को आप कैसे देखते हैं?
जवाब: एक्चुअली ऐसा हुआ कि ये जो खुमेनी की जो जनाजा निकला वहां से शव यात्रा निकली वहां से जो है तो कुछ लोगों ने पोस्टर लगा दिए वहां पे. हां किल ट्रंप आप देखिए तो मामला भड़का इससे इसका एक दूसरा पहलू भी सामने आया अभी ऐसी खबर आई इजराइल के एजेंट्स ने खबर दी यूएसए को यूएस एडमिनिस्ट्रेशन को कि ट्रंप की हत्या की कोशिश चल रही है और ईरान वाले हत्या की कोशिश कर रहे हैं तो ट्रंप को तो मौका चाहिए और नेचुरल भी था उन्होंने रिएक्शन दिया कि अगर मेरे पे हत्या का प्रयास हुआ तो 1000 लोडेड मिसाइल जो है ना ये ईरान को बर्बाद कर देंगे इट विल लीड टू टोटल डिस्ट्रक्शन वो नया फिर एक नया झगड़ा चालू हो गया उसके अंदर जो आप देखो एवरीथिंग इज़ फेयर इन लव एंड वार जैसे कहते हैं पहले अमेरिका ने इजराइल ने कोशिश की थी वो जो शिष्ट मंडल आ रहा था उनका उसको प्लेन को उड़ाने की कोशिश हुई थी मैंने अखबार में पढ़ा था उसने फिर इमरजेंसी लैंडिंग किया बीच में फिर बाय रोड वो लोग निकल के वापस तैहरान वगैरह पहुंचे किए थे तो झगड़ा इनका आपस में चल रहा है अब लेटेस्ट पोजीशन ये है कि आज मुझे बताया कि वो ट्रंप कह रहा है कि ये मेरे कंट्रोल में रहेगा और मैं 20% इस पर रॉयल्टी मैं वसूल करूंगा तो टोटल मेस जिसे कहना चाहिए लेकिन इसमें मतलब होर्मुज के बंद होने की निंदा की जानी चाहिए और यह प्रयास होना चाहिए संसार के सभी लोगों का लड़ते रहो तुम चाहे आपस में भगवान के लिए इसको खोल दो लोगों की सप्लाई मत रोको.
सवाल: सर खामनेई के अंतिम जनाजे में लगभग 1 करोड़ लोगों के शामिल होने की खबर आई तो एक हिस्टोरिकल मोमेंट को आप कैसे देखते हैं और दूसरा खामिनेई के बेटे और वर्तमान शासक मुस्तफा इसमें अंतिम जनाजे में शामिल क्यों नहीं हुए? इसी का सर दूसरा पार्ट यह है कि खामनेई की हत्या के बाद जो एक लीडरशिप वैक्यूम नजर आ रहा है उसके बारे में आप कुछ कहना चाहेंगे क्या?
जवाब: यह तो सच में अद्भुत था. वेरी इंप्रेसिव एक करोड़ लोग उस जनाजे में पहुंचे. वो शासक जो कंट्रोवर्शियल था. आधा ईरान जिसके खिलाफ था युद्ध से पहले. इस युद्ध ने खामनेई को हीरो बना दिया. देखिए सारा राष्ट्र एकजुट हो गया. संसार का कोई ऐसा जनाजा आज तक नहीं निकला होगा जिसमें एक करोड़ लोग वहां श्रद्धांजलि देने पहुंचे और रो रहे हो और ऐसा उसका अद्भुत जो है ना वो प्रदर्शन वहां पे हो रहा हो. तो ही बम अगेन हीरो ऑफ द नेशन अगले 10-20 साल तक तो उसका आप उसकी याद को उसकी हीरोशिप को मिटा नहीं सकते वहां पर जो है उनके बेटे का सवाल है तो ही इज़ अंडर सिक्योरिटी थ्रेट मैंने पढ़ा कि आ नहीं सकते कहीं जा नहीं सकते और अभी भी वो डिसएबल्ड है पिछले ट्रंप ने एक बार कहा था कि जिंदा है लेकिन फेयरली हर्ट है वो एक इशू था लीडरशिप वैक्यूम तो अभी तो वैक्यूम एज सच नहीं है लेकिन अब जिस दिन अगर ये भी कभी मारा जाता है अभी जो प्रेजेंट है उसका लड़का जो शासक है तो नेचुरली फिर लीडरशिप वैक्यूम की बात आएगी वैसे भी क्या है कि वो जो राजा है अभी जो सर्वोच्च लीडर है उनका जो बेटा है वह ज्यादा फंक्शनल नहीं है. आर्मी इज़ इन कमांड वहां पर. वहां की जो लोकसभा है उसके जो स्पीकर हैं दैट वे जो है उनका आपस में कुछ चलता रहता है. तो ये है कि वैक्यूम है लीडरशिप का. ये कब तक चलेगा नहीं कहा जा सकता. लेकिन इंस्पाइट ऑफ़ दिस वैक्यूम ईरान इज़ वेल रेस्पोंडिंग टू यूएस अटैक्स.
सवाल: सर दक्षिण फ्लोरिडा के पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का जो आधिकारिक नाम है उसको बदल दिया गया. और प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे ट्रंप इंटरनेशनल एयरपोर्ट कर दिया गया. आप इस ट्रंप के तुगलकी अंदाज को किस तरह से देखते हैं? क्या कहेंगे इस बारे में?
जवाब: मैंने छ महीने पहले ही कह दिया था जेसी शो में कि ऐसा करने जा रहे हैं. वो तो राजा है ना. राजा की मुद्रा में कुछ भी कर सकते हैं. तो कर दिया उन्होंने. एयरपोर्ट तो वहीं का वही है कि लोकेशन चेंज नहीं हुई है. नाम चेंज कर दिया उसका जो है तो ठीक है. वन मोर आर्बिटरी मूव ट्रंप. पूरा संसार इसमें है ना एक लाचार और बेबस स्पेक्टेटर की तरह ट्रंप के मूव्स को देखने के लिए. दिस इज वन मोर इन दैट डायरेक्शन.
सवाल: सर अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक किस्सा हुआ जिसमें एक शख्स ने पहले तो कागज फेंके, उड़ाए और उसके बाद न्यायपालिका को एक अभद्र भाषा में गालियां इस्तेमाल करी और कुछ समय पहले भी तत्कालीन जो चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया है उनकी तरफ एक जूता फेंका गया था. तो यह सब देखते हुए क्या आपको लगता है कि सुप्रीम कोर्ट बार-बार क्षमादान उदारता दिखाते हैं तो उससे लोगों के अंदर एक हिम्मत पड़ रही है गलत तरीके से और दूसरी सबसे बड़ी बात है दुस्साहस तो बढ़ ही रहा है लेकिन कहीं ना कहीं लोग सस्ती लोकप्रियता के चलते न्यायपालिका को ही टारगेट करने लगे.
जवाब: यू आर एब्सोलुटली करेक्ट. देखो मेरा व्यक्तिगत तौर पे यही मानना है कि इनको सजा होनी चाहिए थी और एग्जेंपररी पनिशमेंट होना चाहिए था. ठीक है ना? एज अ जुडिशरी बीइंग द सुप्रीम अथॉरिटी इन द कंट्री वी आल्सो वेलकम एंड जिसे कहना चाहिए अप्रिशिएट देर डिसीजन बट इन माय इंडिविजुअल कैपेसिटी आई डोंट एग्री आई डोंट एंडोर्स दिस दिस क्ष समाधान और दिस उदारता दैट वे जो है ये तो एक मजाक बन गया है एक सॉफ्ट टारगेट बन गया है सुप्रीम कोर्ट लोगों के लिए कोई भी जाए कुछ करके आ जाएगा वहां से सुप्रीम कोर्ट का भय उसकी लेगसी सब सब खत्म हो जाएंगे इस तरह से जो है और दो घंटे पहले हो चुके हैं इनको तो ऐसी सजा मिलनी चाहिए थी कि लोग आइंदा सुप्रीम कोर्ट के सब जाना ही भूल जाए वहां प्रदर्शन करना भूल जाए. दैट वे जो है कि यहां सजा मिलती है. जस्टिस होता है. यहां पे कानून अपना काम करता है. लव द लैंड फंक्शनंस अराउंड सुप्रीम कोर्ट जो है ये इसका होना चाहिए था. तो पूरे देश के अंदर आज है ना इस बड़ी संख्या में लोग ये महसूस करते हैं कि ये जो उदारता लीनेंसी ठीक है ना जो सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई है. मैं उनके जजमेंट को चैलेंज नहीं कर रहा. उनके विचारों को जो है लेकिन जो देश का बड़ा वर्ग है उसमें मैं भी शामिल हूं. वो यह मानता है कि ये गलत हुआ है फैसला. ऐसी उदारता नहीं होनी चाहिए थी. इनको कठोर दंड जाना चाहिए था और कानून कायदे को थोड़ा सा रिलैक्स भी करना पड़ता. उसको करते हुए इनको एग्जांपरी पनिशमेंट ऐसे लोगों को मिलना चाहिए और अभी भी क्या है वक्त गया नहीं है. यकीन मानिए आने वाले दिनों में फिर कोई ना कोई ऐसी घटना होने वाली है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट हैज़ बिकम अ सॉफ्ट टारगेट फॉर पब्लिसिटी. तो मेरा आग्रह है ये जो है कि भविष्य में ऐसा होता है. इस बार जो है ना पीपल शुड नॉट गो स्कॉट फ्री. लॉ ऑफ़ द लैंड शुड फंक्शन अगेंस्ट ऑल सच एलिमेंट्स अगेंस्ट ऑल सच पीपल जिसे कहना चाहिए. आप यह नहीं कह सकते परेशान था ये था इसलिए उसने छोड़ दिया यह आधार नहीं है क्षमा का ये वो कारण नहीं है कहने का ये हमारा व्यक्तिगत विचार हो सकता है लेकिन देश का कानून भी तो है ना सुप्रीम कोर्ट कानून से बांधा हुआ है जो कानून है सामने और कानून में एक आदमी आके उसकी धज्जियां उड़ा रहा है कॉग्निस हैज़ टू बी टेकन कॉग्निस मस्ट वुड हैव बीन टेकन जो है ऐसी आशा करते हैं भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी अगर होंगी तो सुप्रीम कोर्ट विल टेक अ वेरी स्टर्न एक्शन अगेंस्ट ऑल सच पीपल और अगेंस्ट सच एलिमेंट्स और अगेंस्ट सच सच इंडिविजुअल्स हु हैव वायलेटेड द डिसेंस एंड डेकोरम ऑफ द सुप्रीम कोर्ट.
सवाल: सर क्या 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के दौरान पारित हो पाएंगे परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक?
जवाब: देखो मेरा तो शुरू से मानना यह है कि जब तक अमित शाह का है साम दंड भेद के हर आदमी की रणनीति ना पॉलिटिक्स की तो पहली ये होती है. सामदा दाम दंड पॉलिसी जो है ये अमित शाह के रहते हुए शायद ही कोई बिल है जो गिरेगा. अब क्योंकि हालात बदल गए हैं तो मैं तो होपफुल हूं. किसी भी दिन आपको पढ़ने को मिलेगा कि आज संख्या हो गई. कुछ लोग एब्सेंट हो गए, कुछ बैठ गए हैं. कुछ पार्टी छोड़ गए हैं, कुछ मिल गए हैं. कुछ कोई गुणा भाग हो गया, कुछ ऐसा हो गया है. आई एम होपफुल इसी टेन्योर के अंदर जो है ये दोनों बिल परिसीमन और ये जो है ना पास होंगे. इट इज़ अ डिफिकल्ट प्रेडिक्शन. लेकिन मुझे पता नहीं क्यों मैं और कॉन्फिडेंट रहता हूं. अमित शाह की जो रोलर ऑफ़ द हाउस पे जो सक्सेस स्टोरीज है उनसे मैं इंस्पायर होता हूं देख के. तो मुझे लगता है कि इस काम को भी एक ना एक दिन करवा लेंगे. ऐसा मुझे लगता है. मे बी ओवर असेसमेंट ऑफ माइन द टाइम विल टेल. लेकिन मैं तो कॉन्फिडेंट हूं कि आज नहीं तो कल ये बिल वो पास करवा लेंगे फ्लोर ऑफ़ द हाउस पर.
सवाल: सर आखिर कहां तक पहुंचा राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण और क्या इस प्रकरण का कोई नेगेटिव इंपैक्ट या फॉल आउट आप देखते हैं कुछ महीने बाद होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव पर?
जवाब: देखो नेगेटिव तो है ही एक तरह से. इंप्रेशन तो सबका खराब हुआ है. चाहे विश्व हिंदू परिषद हो, आरएसएस हो, बीजेपी हो. सब ने अपनी तरफ से बेस्ट स्टेटमेंट दिए हैं. आरएसएस कम आउट ओपनली. आरएसएस जो नॉर्मली बोलता कम है सर बहुत ओपनली बोला उन्होंने आकर के प्रेस कॉन्फ्रेंस करी और विश्वास दिलाया देश को कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे. उपेंद्र मिश्रा भी सरेआम आए. उन्होंने कहा इनको मृत्यु होने की सजा मिलनी चाहिए. सब कुछ कहा. सब लोग एक ही जगह खड़े हैं. सब एक ही प्लेटफार्म पे हैं कि दोषियों को दंडित किया जाए. ठीक है? लेकिन आप देखिए चढ़ावा की मात्रा कितनी कम होगी. मैं कल पढ़ रहा था कि 25% मात्रा रह गई पिछले 15 दिन के अंदर जो है तो विश्वास भरोसा टूटता है आदमी का, तो अभी तो इट इज़ टू अर्ली चुनाव में समय है अभी और चुनाव में तो क्या होता है नरेंद्र मोदी जो नैरेटिव बनाते हैं ना वो चलता है नरेंद्र मोदी जाएंगे तीन पॉलिटिकल स्टेटमेंट चुनावी सभाओं में ऐसा देंगे कि लोग इस बात को भूल जाएंगे कहीं और दूसरे मुद्दे पर डाइवर्ट हो जाएंगे अभी तक मैंने ये देखा है कितनी सभाओं में चाहे बंगाल हो बिहार हो कोई भी हो वो ऐसा नैरेटिव लेके आते हैं नरेंद्र मोदी ऐसे दो चार सभाओं में अपनी टिप्पणी करेंगे सारा माहौल बदल जाता है चुनाव का जो माहौल उधर चला जाता है दैट विल हां लेकिन आज तो मुझे लगता है कि आज की स्थिति में तो नुकसान है एट कितना है इस पर डिबेट हो सकती है चुनाव दूर है अभी और नरेंद्र मोदी के भाषणों से ही उम्मीद है कि ये जो छाया आई है आई होप कि ये छाया दूर हो जाएगी.
सवाल: सर अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बाद कई और मंदिर बद्रीनाथ केदारनाथ सहित और भी बहुत सारे मंदिर हैं जहां पर इस तरीके की शिकायतें आ रही आपको लगता है कि सरकार इसके लिए कोई ऑल इंडिया पॉलिसी लेकर आ सकती है?
जवाब: बड़ा सेंसिटिव इशू है. मंदिरों कंट्रोल करो. विचार तो ये चल रहा है पूरे देश में कि देयर शुड बी गवर्नमेंट ऑडिट ऑफ ईच एंड एव्री मंदिर जिसका चढ़ावा मान लो साल में 10 लाख से 20 लाख से 50 लाख से एक सीमा तय कर दें. ज्यादा है. अब ये तो बहुत बड़ा सेक्टर है. अभी कल मैं पढ़ रहा था जयपुर में. राजस्थान में कोई गौशाला है. उसमें तो 2.5 करोड़ का हो गया. आज ये तो पिंडारा बॉक्स है. अखबारों में मैंने पढ़ा बद्रीनाथ केदारनाथ. कल को वैष्णो देवी का भी ले आएंगे और ह्यूमन फैक्टर जहांजहां इन्वॉल्वड है ना वहां सारी बातें हो सकती हैं. इट इज़ अ वेरी सीरियस इशू. गवर्नमेंट अगर मंदिरों को कंट्रोल करती है और ये मैसेज चला गया कि बीजेपी गवर्नमेंट मंदिरों को कंट्रोल कर रही है. दैट इज़ नॉट फेयर फॉर द इंटरेस्ट ऑफ़ द पार्टी. दैट विल जो है सेंसिटिव इशू है. लेकिन ये तो फैक्ट है. पहले तो वहां के जो तिरुपति मंदिर थे उसकी बात चली थी कि लड्डू ठीक से नहीं बन रहे हैं. इसमें घी ठीक से नहीं डल रहा है. फिर सब शांत हो गया. लोग वही लड्डू खा रहे हैं, वही जा रहे हैं, वही पूजा कर रहे हैं. वहां पर जो है तो पॉलिसी बन सकती है, रूल्ड आउट नहीं है. उन पे कोई ऑडिट हो सकती है, बात बैठ सकती है. तो सच पॉलिसी नॉट रूल आउट बट नॉट इन द इमीडिएट फ्यूचर.
सवाल: सर पश्चिम बंगाल में नाबालिक लड़की के साथ रेप और हत्या का जो मुख्य आरोपी है एनकाउंटर में मारा जाता है. इस खबर को आप कैसे देखते हैं?
जवाब: कानून अपना काम करेगा. कानून ने अपना काम किया है. बहुत से अखबारों ने लिखा कि आफ्टर यूपी का एनकाउंटर नंबर वन तो ममता के टाइम में भी एनकाउंटर होते थे. लेकिन पहले क्या है कि इन एनकाउंटर अगर किसी निर्दोष व्यक्ति का होता है ना तो सवाल उठता है दैट जो है यह जो एनकाउंटर होते हैं इस तरह के चाहे हो सकता है कि स्टेज मैनेज हो जाए कभी-कभी ये भी आती है ना अखबारों में पढ़ते हैं अपन कि स्टेज मैनेज था एनकाउंटर लेकिन जनता की सहानुभूति पूरी जो है ना पुलिस के साथ रहती है आजकल इसमें और सरकार के साथ रहती है कि स्टेज मैनेज नहीं था तो अच्छी बात है लेकिन स्टेज मैनेज करना था तो कर देते यार जनता का मतलब मैंडेट जो है ना इस समय कोर्ट कचहरी हमेशा कहते हैं कानून अपना काम करे उस तरह से नहीं होना चाहिए लेकिन इतनी इतनी ज्यादा गुंडागर्दी हो गई कंट्री के अंदर वो ममता के टाइम में होते थे. देखा था आपने जो है तो ये जो एनकाउंटर हुआ है इसका पॉलिटिकल मैसेज जो है ना बड़ा जबरदस्त गया है और दूसरा लॉ एंड ऑर्डर का मैसेज बड़ा जबरदस्त गया है बंगाल के अंदर और खासकर बंगाल का एक बैकग्राउंड था तो इंसिडेंटली एक चांस आ गया इस तरह के एनकाउंटर का जिसे आप कहते हैं ये तो इससे चीफ मिनिस्टर को उनकी पार्टी को और जनता का भरोसा बना है कि यह सरकार जो है ना महिलाओं से जो गुंडागर्दी करते हैं बच्चों से महिलाओं से उनको टोलरेट नहीं करेगी. तो एट द एंड ऑफ द डे क्या है? यह जो एनकाउंटर हुआ है विदाउट गोइंग इनू द मेरिट्स ऑफ द केस जो है ना इसका पॉलिटिकल और जो आम आदमी मैसेज है वो प्रॉपर मैसेज गया है इससे और इसका फर्क पड़ेगा.
सवाल: सर पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही बंगलो पॉलिटिक्स और सत्ता के केंद्र में बड़ी सुगबगाहट है. पिछले 50 सालों में लेफ्ट का शासन उसके बाद ममता बनर्जी का शासन सादगी दिखाने के लिए उन्होंने वो बड़े भव्य बंगलों से दूरी बनाए रखी. और वहां पर ब्यूरोक्रेट्स रहते थे. लेकिन अब क्या शुभेंदु अधिकारी वो भव्य बंगले वापस राजनेताओं को लौटाएंगे और सेक्रेटेट नबना से वो जो उसके पास ही वहां पर राइटर्स बिल्डिंग है वापस वहां पर लौटेगा और इसके राजनीतिक मायने क्या होंगे?
जवाब: राइटर्स बिल्डिंग में आ गया वो तो अच्छी बात है ट्रेडिशनल जगह थी राज करने का सेक्रेटेट होता है हर अपने राज्य के अंदर तो वो तो ठीक है दे रेस्टोर्ड द ओरिजिनल स्टेटस ऑफ़ द सेक्रेटेट रूलिंग सेंटर उनका जो वो तो ठीक है ये बंग की जो बात है मिनिस्टर नहीं रहते थे. अब तो मंत्री हैं बकायदा और चीफ मिनिस्टर सुलझे हुए हैं. चीफ सेक्रेटरी मनोज अग्रवाल हैं वह भी सुलझे हुए हैं. वह पहले वहां पर इलेक्शन के थे. चीफ इलेक्शन ऑफिसर थे ये. लेकिन ये बात तो तय है कि कुछ एक बंगले तो ऐसे होंगे जो ब्यूरोक्रेट्स को मिलेंगे. दैट वे जो [गला साफ़ करने की आवाज़] है जो डेजग्नेटेड ब्यूरोक्रेसी के जो असाइनमेंट्स हैं उनको मिलेंगे. तो अपन ये कह सकते हैं इसमें कि आने वाले दिनों में जो बोर का रीडिस्ट्रीब्यूशन होगा जिसमें दे विल हैव इक्वल शेयर.
सवाल: सर बांकीपुर सीट की चर्चा बहुत ज्यादा हो रही है. बांकीपुर सीट में उपचुनाव में इस बार ऊंट किस करवट बैठेगा और क्या बीजेपी रिटेन कर पाएगी नितिन नवीन की इस सीट को?
जवाब: ऊंट तो आजकल एक ही करवट बैठता है. बस वही बैठेगा. बीजेपी का नॉमिनी जीतेगा. बस एक थोड़ी चिंता का विषय रहेगा कि नीतीश फैक्टर का रोल क्या है वहां? बस उस फैक्टर का पता नहीं चलता कभी-कभी. अमित शाह की पैनी नजर रहती है इन सब बातों पर लगता नहीं कि कोई ऐसा करेगा तो बच पाएगा जो है तो पीके का कोई इशू नहीं है कोई फैक्टर नहीं है कोई और कोई मुद्दा नहीं है कांग्रेस का तो वैसे कुछ नहीं है दैट वे जो है और बीजेपी को थ्रेट है तो इंटरनल पॉलिटिक्स से थ्रेट है वहां इंटरनल नॉट विद इन बीजेपी अलायंस की जो है वहां उसमें थ्रेट थोड़ी बहुत है कि कोई ऐसा साबोटेज नहीं करे वहां पर जो है लेकिन आई एम श्योर आखिरी दिनों में एक-दो दिनों में अमित शाह जाएंगे वहां या बुलाएंगे दो चार लोगों को जो है ठीक हो जाएगा. आई थिंक बीजेपी रिटेन कर जाएगी. ऐसा लगता है.
सवाल: सर आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में आखिर क्या होगा आपस में लड़ रही कांग्रेस का? और क्या आपको लगता है कि सिर्फ दलित वोट बैंक के सहारे वो 117 में से 100 सीटें जीत लेगी.
जवाब: पहली बात तो यह है कि बीजेपी स्ट्रेटजी क्या बनाती उसमें नॉट ओनली कांग्रेस. आपके लिए भी चिंता का विषय है. अभी तो अभी सब अच्छा अच्छा दिख रहा है. आखिरी एक डेढ़ महीने में जब अमित शाह वहां कैंप करेंगे 15 दिन का जाके 10 दिन का नरेंद्र मोदी की एक दर्जन सभाएं होंगी तो सारा सिनेरियो एकदम से पलटेगा उससे. अभी आपका लिमिटेड सवाल है कांग्रेस का. तो कांग्रेस का तो ऐसे अभी आज मैंने एक अखबार में पढ़ा कि राहुल गांधी तीन हफ्ते के बाद अपने देश लौट आए हैं. धक्का लगा मुझे कि क्या यह स्थिति हो गई राहुल गांधी कांग्रेस की देश का जनमानस ये ऐसा महसूस करता है कि अपने देश लौट आए हैं. क्या है लीडरशिप? आप बताइए. तो ऐसे माहौल के ऐसे लीडरशिप में और उन्होंने कहा कि इतना क्रिटिकल जब चलता है तो तीन-ती हफ्ते के लिए कितनी बेफिक्री से वो विदेश जाते हैं. विदेश जाओ मना नहीं है किसी को. नरेंद्र मोदी विदेश जाते हैं लेकिन भारत का हिसाब किताब पूरा सेट करके तब जाते हैं. सारी सीटें जीत के सब कुछ देख के कैबिनेट करके फैसले करके तब विदेश जाते हैं वह ऐसे नहीं जाते हैं विदेश जो है अब आप चले गए तीन हफ्ते विदेश जाओ भाई विदेश तो कांग्रेस में तो क्या है जब तक लीडरशिप का इशू डिसाइड नहीं होता और लीडरशिप क्या डिवाइडेड लीडरशिप है फिर भी बार-बार बात आती है सोनिया गांधी प्रियंका गांधी राहुल गांधी दैट वे जो है तो पंजाब में फ्री फॉर ऑल चल रहा है सर रंधावा वर्सेस चेन्नी वो लड़ रहे हैं वहां पे बघेल है वो वर्सेस वहां जो अध्यक्ष है पार्टी का उनमें दोस्ती आपस में उसको लेके लोग उंगली उठा रहे हैं वहां पे तो फ्री फॉर ऑल है और मुझे आश्चर्य नहीं है कि जब चुनाव नजदीक आएंगे तो दो चार लोग फिर जो है ना अमित शाह घर जाके घंटी बजा देंगे शाम को कि साहब हमको ले लो दो चार बड़े लीडर चले जाएंगे और फिर क्या है बीजेपी का आदमी कोई कह देगा आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा फिर क्या करो जब लोग ही आपके घर आ गए आने के लिए तो ठीक है फिर पार्टी को क्या है फिर ठीक है आओ जॉइन करो तुम भी यहां रहो तो कांग्रेस का तो भाई मुझे तो आसार लगता नहीं है और अभी आपने कहा 30% दलित वोट वोट ठीक है अब दलित वोट क्यों कोई बपौती थोड़ी है एक पार्टी की किसी की भी हो ना तो बीजेपी कर सकती है ना वो अब केवल इसलिए कि चन्नी मान लो दलित पॉलिटिक्स को रिप्रेजेंट करते हैं तो सारे वोट उनको मिल जाएंगे उसका कोई कोई सार नहीं बहरहाल ये है इशू के पंजाब में कांग्रेस टोटली डिसऑर्गेनाइज्ड है कोलकाता की तरह हो सकता है राहुल गांधी 15, 20 दिन 25 दिन महीना भर बैठे वहां घूमे वहां पे तो कुछ हालात बने लेकिन जैसे थोड़े हालात सुधारेंगे तो सामने फिर वही बीजेपी खड़ी दिखाई देगी आपको आप खड़ी दिखाई देगी तो इन झगड़ों में हो लगता है कि फिर आप भी टूट गई है. देखिए आप में कितने विभाजन हो गए हैं. शायद अब तो देश के लोगों का मन इस तरह का बन रहा है कि यार एक ही पार्टी को वोट दो ना यही ठीक है. बस राज तो रहेगा पांच साल. रोज के झगड़े तो नहीं होंगे. तो मुझे तो यही लगता है कि कुछ चमत्कार भी हो सकता है. वहां भाजपा आ भी सकती है जो पटना में फहरा गया. भगवा कोलकाता में फहरा गया. तो अभी अमृतसर और चंडीगढ़ में भी हो सकता है. लेकिन बहरहाल कांग्रेस तो नहीं आ रही. कुल मिला के जो अभी आपका सवाल था जो ऐसा लग रहा है.
सवाल: सर मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है और उसके केंद्र बिंदु में हैं दतिया के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा टिकट कटने के बाद पहले तो बगावती सुर फिर उनके जो अपने समर्थक हैं उनका शक्ति प्रदर्शन और फिर उसके बाद अचानक से दिल्ली दरबार से लौटकर नरोत्तम मिश्रा का यह कहना कि पार्टी मेरे लिए सर्वोपरि है और मैं तो एक आम कार्यकर्ता की तरह प्रचार करने वाला हूं. तो इसकी इनसाइड स्टोरी क्या है और सबसे इंपॉर्टेंट बात आखिर दिल्ली में ऐसा क्या हुआ कि नरोत्तम मिश्रा के अचानक से सुर बदल गए.
जवाब: हर बीमारी का एक ही इलाज दिखाई देता है बीजेपी के अंदर जो है ना अमित शाह के अनुशासन का डंडा चल गया. और उनको मैसेज क्लियर हो गया इस तरह से कि पार्टी का टिकट नहीं बदलेगा. पार्टी का जिसको टिकट दे दिया नहीं बदलेगा. पार्टी का फैसला अंतिम है. पार्टी के अनुशासन की सीमा को तोड़ के आप नहीं जा सकते. जाओगे तो फिर मुझे मत कहना जो है तो उनका हद परिवर्तन हो गया. आ गए. वैसे वो नरोत्तम मिश्रा अच्छे व्यक्ति हैं. लेकिन भाग्य की बात है. अभी भाग्य उनके साथ नहीं है. एक वक्त था मुख्यमंत्री बनने की चर्चा चली थी. अब डेस्टिनी तो जन्म पत्री से चलता है. ये काम तो जो है अच्छे व्यक्ति सब कुछ है. लेकिन अब पार्टी का अनुशासन तो मानना पड़ेगा. और उनके लोग कहते थे दतिया है तो मिश्रा है. मिश्रा है तो दतिया है. हालात बदल गए हैं. समय बदल गया है. दैट वे तो मिश्रा घर लौट आए हैं. वापस घर लौट आए से मतलब अनुशासन की धारा में आ गया अच्छी बात है. पार्टी मिलके चुनाव लड़े बाकी हार-जीत तो भाग्य की बात है.
ये भी पढ़ें: JC Mango Fest 2026: अर्जुन राम मेघवाल के साथ डॉ. जगदीश चंद्र की 'आम पर खास चर्चा'