Kanpur News: स्ट्रीट फूड का नाम आते ही मोमोज सबसे पहले लोगों की पसंद बनकर सामने आते हैं. हर शाम शहर के बाजारों में इनकी दुकानों पर लंबी कतारें लगती हैं, लेकिन जिस खाने को लोग स्वाद के साथ खा रहे हैं, अगर वही अस्वच्छ माहौल में तैयार हो रहा हो तो यह सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. कानपुर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ताजा कार्रवाई ने इसी लापरवाही की परतें खोल दी हैं. शहर की कई मोमोज यूनिटों में गंदगी, खराब रखरखाव और खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आने के बाद विभाग ने न केवल बड़ी मात्रा में चटनी नष्ट कराई, बल्कि कई नमूने जांच के लिए भी भेज दिए. प्रशासन का कहना है कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त अभियान जारी रहेगा.
जिलाधिकारी के निर्देश पर शुरू हुआ विशेष अभियान
कानपुर में यह विशेष जांच अभियान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर चलाया गया. खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने रावतपुर, साकेत नगर और मसवानपुर क्षेत्र में मोमोज बनाने और बेचने वाली दुकानों तथा उत्पादन इकाइयों का औचक निरीक्षण किया. अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि शहर में बिकने वाले खाद्य पदार्थ स्वच्छता और गुणवत्ता के तय मानकों के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं.
निरीक्षण के दौरान टीम सबसे पहले केशव नगर स्थित आकाश मोमोज पहुंची. इसके बाद रावतपुर में श्री बालाजी मोमोज और साकेत नगर की एक अन्य मोमोज यूनिट की जांच की गई. तीनों स्थानों पर साफ-सफाई के मानकों का गंभीर उल्लंघन पाया गया. कई जगह खाद्य सामग्री खुले और अस्वच्छ वातावरण में रखी गई थी, जिसे अधिकारियों ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया.
बिना पंजीकरण चल रही थी मोमोज बनाने की यूनिट
जांच के दौरान सबसे बड़ी अनियमितता रावतपुर स्थित श्री बालाजी मोमोज में सामने आई. अधिकारियों को पता चला कि यह यूनिट खाद्य कारोबार के लिए आवश्यक पंजीकरण के बिना संचालित की जा रही थी. निरीक्षण में परिसर में गंदगी, खाद्य पदार्थों के अनुचित रखरखाव और स्वच्छता नियमों की अनदेखी भी सामने आई. खाद्य सुरक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से इस यूनिट का संचालन बंद करने के निर्देश दिए. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक संचालक आवश्यक पंजीकरण प्राप्त नहीं कर लेता और सभी कमियों को दूर नहीं करता, तब तक इस यूनिट को दोबारा संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
लाल चटनी बनी सबसे बड़ी चिंता
पूरे अभियान के दौरान अधिकारियों का सबसे ज्यादा ध्यान मोमोज के साथ परोसी जाने वाली लाल चटनी पर रहा. निरीक्षण में कई स्थानों पर यह चटनी बेहद गंदी जगहों पर रखी मिली. कुछ स्थानों पर इसे खुले में रखा गया था, जिससे उसके दूषित होने की आशंका और बढ़ गई. खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने इसकी गुणवत्ता पर संदेह जताते हुए नमूने जांच के लिए सुरक्षित कर लिए. सिर्फ श्री बालाजी मोमोज की यूनिट से लगभग 45 किलोग्राम चटनी मौके पर ही नष्ट कराई गई. पूरे अभियान के दौरान अलग-अलग स्थानों से कुल 115 किलोग्राम संदिग्ध चटनी नष्ट कराई गई.
मोमोज और चटनी के नमूने भेजे गए लैब
कार्रवाई के दौरान विभाग ने मोमोज और चटनी के कई नमूने एकत्र किए हैं. इन सभी नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया है, जहां यह जांच की जाएगी कि इनमें किसी प्रकार के प्रतिबंधित रंग, खराब गुणवत्ता वाली सामग्री या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन तो नहीं हुआ. यदि जांच रिपोर्ट में खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं, तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
सड़क किनारे लगे ठेलों पर भी चला अभियान
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई केवल दुकानों तक सीमित नहीं रही. मसवानपुर क्षेत्र में सड़क किनारे लगाए गए मोमोज के ठेलों की भी जांच की गई. यहां रंगीन फिंगर चिप्स और चटनी भी स्वच्छता मानकों के अनुरूप नहीं मिली. अधिकारियों ने मौके पर ही खराब और संदिग्ध खाद्य सामग्री नष्ट कराई. साथ ही ठेला संचालकों को साफ-सफाई बनाए रखने और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए.
डीएम ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट कहा कि आम लोगों की सेहत के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान लिए गए सभी नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी. यदि किसी भी नमूने में गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.
बारिश के मौसम में बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा
खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान खुले में रखे गए खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीव तेजी से पनपते हैं. विशेष रूप से चटनी, मेयोनीज और अन्य जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तापमान पर रखना बेहद जरूरी होता है. यदि इन्हें गंदगी के बीच तैयार किया जाए या लंबे समय तक खुले में रखा जाए, तो फूड पॉइजनिंग, पेट का संक्रमण, उल्टी, दस्त और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में उपभोक्ताओं को भी खाद्य पदार्थ खरीदते समय स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
आगे भी जारी रहेगा विशेष अभियान
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने संकेत दिए हैं कि शहर में ऐसे विशेष अभियान लगातार चलाए जाएंगे. जिन दुकानों, ठेलों या उत्पादन इकाइयों में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे केवल स्वच्छ और पंजीकृत प्रतिष्ठानों से ही खाद्य पदार्थ खरीदें. यदि कहीं गंदगी, खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ या नियमों का उल्लंघन दिखाई दे, तो इसकी जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके.
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