JC Mango Fest 2026: भारत 24 द्वारा आज (बुधवार, 8 जुलाई) JC मैंगो फेस्ट का आयोजित किया गया. JC मैंगो फेस्ट ( JC Mango Fest ) एक ऐसा आयोजन बन गया जहां राजनीति, पत्रकारिता और भारतीय स्वाद एक साथ नजर आए. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शिरकत की. वहीं भारत 24 के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ डॉ. जगदीश चंद्र कार्यक्रम में शामिल हुए. इस मौके पर आम की विभिन्न किस्मों का स्वाद चखते हुए देश के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई.
सवाल: आम को लेकर आपकी कोई ऐसी याददाश्त आपकी माताजी को लेकर बचपन को लेकर आपको याद हो?
जवाब (अर्जुन राम मेघवाल): दुनिया में आम को फलों का राजा माना जाता है और इसलिए समय-समय पर इसके फेस्टिवल भी होते रहते हैं. मैं धन्यवाद देना चाहूंगा भारत 24 को कि आम जैसे फल जिसका भारतीय संस्कृति में बहुत प्रभाव है. जीवन के आचार और विचार पर प्रभाव है. बहुत से संतों ने जैसे आम मीठा होता है. ऐसे मीठी वाणी बोलिए. ऐसे आम का उल्लेख करके कहा है. हमारी संस्कृति का भी पार्ट है. जैसे आपने कहा प्रकृति का भी पार्ट है. और अभी बीच में आप जिक्र भी कर रहे थे कि मैंगो डिप्लोमेसी. राजनीति संभावनाओं का खेल होता है. इसलिए डिप्लोमेसी सब जोड़ दी होगी. कोई आदमी डिनर देता है तो कहते हैं डिनर डिप्लोमेसी हो रही है. तो मैंगो फेस्टिवल में भी कुछ लोग जोड़ देते हैं कि क्या मैंगो फेस्टिवल से भी कोई डिप्लोमेसी हो रही है क्या? मैं सिर्फ इतना ही बताना चाहता हूं कि राजनीति हमेशा संभावनाओं का खेल होता है. ये अटल जी ने कहा है.
सवाल: बिल्कुल सर अभी जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात करते हैं. उसमें एक बहुत खास बात उन्होंने कही जो मुझे लगता है कि सबको बार-बार ये सुननी चाहिए. उन्होंने आम का जिक्र किया. प्रधानमंत्री मोदी की कही हुई यह बात कि अर्थव्यवस्था में आम का योगदान है. वो कैसे देखते हैं?
जवाब (अर्जुन राम मेघवाल): उन्होंने जिक्र करते हुए कहा था कि भारत का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है. जहां आम का उत्पादन नहीं होता है और आम की अच्छी वैरायटी अब्सोलुटली और हर उस लोकलिटी में रहने वाला सोचता है कि मेरी आम की वैरायटी का बहुत महत्व है. महत्व है. इसलिए आम जब भी किसी के घर जाता है तो वातावरण एकदम सुखद वातावरण कर देता है. आम कि अगर कहीं भी कहीं टोकरी आती है या कोई से सामान भेंट करता है तो उस जगह का वातावरण पॉजिटिव हो जाता है. इस आम में खासियत है. पॉजिटिविटी फैलाने की भी इसमें ताकत है. अगर आम की अह जो संस्कृति हमारी है उसके तहत अगर हम आम को उत्पादन में भी और हम लेनदेन में भी और इसका प्रचार प्रसार करेंगे तो हमारी इकोनमी की साइज बढ़ेगी. ऐसा प्रधानमंत्री जी कह रहे थे.
सवाल: सर आप का तो दिल बच्चा हो जाता है. मैंने कई बार देखा कि एक तो चैनल खबर को लेकर कि खबर ही जीवन है. उनका हमेशा से मूल मंत्र रहा है. लेकिन अगर बात खाने पर आती है, फलों पर आती है तो आम के बारे में सोचते हैं. आम और आपका संबंध समझना चाहेंगे.
जवाब (डॉ. जगदीश चंद्र): मैं कभी अपने बालक मन को मरने नहीं देता. इसलिए आम को उठाना उसको देसी स्टाइल में खाना. सड़क पर खड़े हो के गोलगप्पे खा जाना. मिठाई के दुकान से कार रोक के लड्डू लेके बीकानेर जा रहे हैं तो खा लेना. दो पूरी खाना. बालक मन नहीं मरना चाहिए. जीवन में साग बना के रखता है. जहां तक आम का सवाल है, आम से मेरा संबंध 15 वर्षों से तो खासकर है. पहले ईटीवी चलाते थे 10 साल तक. यूपी चलाते थे तो वहां पे क्या मलियाबाद एक जगह है 50 किमी लखनऊ से वहां 100-150 किस्म के आम होते हैं तो हर साल मैं वहां जाता था 10 साल जाता रहा वहां उसको ₹500 देते थे पांच सात आम थोड़ा-थोड़ा खाकर आ जाते थे फिर एक दिन मैंने सोचा कि उम्र जारी है ईटी भी नहीं है उधर लखनऊ जाना कम होता है हालांकि भारत है अपने पास में जो है तो मैंने सोचा आम अब घर में होने चाहिए जो है तो मैंने पवन अरोड़ा से कहा कि आम के दो चार पेड़ लगा दो तो उन्होंने घर में चार पेड़ लगा दिए इस बार 250 तो आम उतरे उससे वेरी गुड. और खास बात क्या होती है कि आम जो लटकता है ना आप जब कमरे से निकलते हैं और अपने गार्डन में या घर के पिछवाड़े में चार पेड़ों में लटकते हुए आम देखते हैं एक अलग अनुभूति होती है.
सवाल: आप दोनों एक दूसरे को बहुत पहले से जानते हैं जब सर्विस में थे तो कुछ ऐसी स्मृतियां मेघवाल सर को लेकर आपके मन में कुछ हो.
जवाब (डॉ. जगदीश चंद्र): शुरू से ही साइलेंट परफॉर्मर हैं. विनम्र मैंने इनके जीवन में आज तक कोई विवाद नहीं देखा ऊंचे स्तर में बोलते हुए नहीं देखा गुस्सा करते हुए नहीं देखा सेवा में भी नहीं देखा और राजनीति में नहीं देखा और हैरानी की बात यह है कि एक फॉर्मेट है प्राइम मिनिस्टर का डॉक्टर जितेंद्र सिंह होते हैं आप साथ होते हैं एक सा भाव एक सा हो वरना कई बार क्या होता है प्रधानमंत्री के साथ चलते हुए भी आदमी उपकचुक हो जाता है ऐसा उनका ओरा और इनका आभामंडल रहता है बिल्कुल विनम्र बिल्कुल नॉर्मल जिस तरह से तो मैं ये कहता हूं कि वन ऑफ द बेस्ट मिनिस्टर इसलिए कहता हूं इनको हर दृष्टिकोण से ठहरे हुए व्यक्ति बात का उत्तर मिलेगा अभी चैनल की बात थी चैनल भी देखते हैं वेल इनफॉर्म जिसे कहते हैं. बीकानेर में क्या मेरा जन्म हुआ? इसी रिश्ता इनके साथ थोड़ा ऐसे मैं मानता हूं बीकानेर में. 1950 में मेरा जन्म वहां गवर्नमेंट हॉस्पिटल में हुआ था. आप बीकानेर से हैं. तो एक प्यार, स्नेह या भावनात्मक लगाव भी रहता है आपके साथ में. और वैसे इतने अनुभव के आधार पर मैं कह सके कितने मंत्रियों से मैं मिलता हूं और मिला हूं आज तक मैं हर लेवल पर जो है. ठहरे हुए बैलेंस और स्थाई मंत्री है ना कोई, वो अर्जुन मेघवाल हैं.
सवाल: सर जैसे डिनर डिप्लोमेसी होती है तो मैंगो डिप्लोमेसी आपने की है कि कोई मामला इधर-उधर है चलिए मैंगो भेज देते हैं मामला ठीक हो जाएगा कभी आपके चाहे राजनीतिक कार्यकाल में चाहे सर्विस के कार्यकाल में आपने कभी मैंगो डिप्लोमेसी की है?
जवाब (अर्जुन राम मेघवाल): सर्विस हो चाहे राजनीति हो हम ये मैंगो डिप्लोमेसी शब्द ठीक है इजाद कर लिया इसमें डिप्लोमेसी जैसी कोई चीज नहीं है इसमें हैप्पीनेस आती है मैंगो अगर आप देखते हैं तो जैसे आपने बताया ना कि मेरे घर के बाहर अब खा नहीं थे देखने से अभिनेश आती है तो खाने से तो मन प्रसन्न होता ही है ना तो जिस जिस फल में प्रसन्नता के भाव सबसे ज्यादा हो उसका आदानप्रदान भी होता है हमारी संस्कृति का पार्ट है प्रसन्नता हैप्पीनेस एक दूसरे को हम एक्सचेंज करते हैं.
सवाल: सर राजनीति में और आम में एक समानता है कि दोनों का जब मौसम आता है तो उसकी खूबी पता चलती है. राजनीति में कोई भी व्यक्ति जब इलेक्ट हो के आता है जब टेस्टिंग पीरियड आता है मौसम आता है कि कहां पर फायदा दिख रहा है तब उसकी असली विचारधारा पता चलती है. राजनीति देखी ये जो दल बदल जो देखने को मिल रही है, कितना सही लगता है सर आपको?
जवाब (अर्जुन राम मेघवाल): देखिए एक जमाना था जब हमारे संविधान निर्माता संविधान बना रहे थे तब इस पे इस तरह की कल्पना नहीं की गई थी. ना ऐसा सोच आया था. एक आयाराम गयाराम करके हम विषय चला हरियाणा में जी तब सोचा गया अमेंडमेंट आना चाहिए. तो एंटी डिफेक्शन लॉ आया 10th शेड्यूल्ड संविधान में जुड़ा उसमें पहले वन थर्ड का प्रावधान था फिर पता चला वन थर्ड से भी पार नहीं पड़ रही है थोड़ा प्रावधान कड़ा करो जी 2 थर्ड करा अब 2 थर्ड आदमी अगर किसी दल के कहते हैं कि हम असली दल है हम तो हम उसको दबा तो नहीं सकते ना 23 थर्ड आदमी संख्या बड़ी है ना राइट अब रहा बात आपने एंटी डिफेक्शन बिल में क्या संशोधन होना चाहिए? इस पर बहुत से आर्टिकल आए हैं. अभी पिछले विगत 15 दिनों में काफी ज्यादा आए हैं. जो भी आर्टिकल आते हैं कोई लिखता है तो हम अध्ययन करते हैं और आपने ठीक कहा कानून मंत्रालय भी इसमें अध्ययन करता है कि लेकिन हम अभी जो मामले हैं अभी स्पीकर साहब के यहां लंबित है. जी जो मान्यता वाले मामले जिसका आपने जिक्र किया वो उनको तय करना है कि कौन से डिसिडेंट ग्रुप को वो मान्यता दे. लेकिन स्पीकर साहब के कार्यालय से पता चला कि यह इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के पास पहुंच गए हैं. वो कह रहे हैं हम असली टीएमसी हैं. एक ही दल का ज्यादा बड़ा विषय आया हुआ है टीएमसी का. 20 एमपी उससे अलग हुए हैं. वो कहते हैं हम ही असली टीएमसी हैं. हमें ही चुनाव चिन्ह मिलना चाहिए. हम नाम भी टीएमसी हमारे पास ही रहना चाहिए. अब ये इलेक्शन कमीशन जो प्रैक्टिस है, परंपराएं हैं, रूल्स हैं, 10 शेड्यूल्ड है, उनको देख के निर्णय करेगा.
सवाल: जैसे आम को देखकर सर एक मुस्कुराहट आती है चेहरे पर वैसे ही मानसून सत्र से पहले देश भर की जो महिलाएं हैं उनको एक तरह की मुस्कुराहट है और नरेंद्र मोदी का जो आत्मनिर्भर भारत का जो सपना है वो शायद पूरा हो सकता है और आत्मनिर्भर भारत तब होगा जब आत्मनिर्भर महिलाएं होंगी. क्या भारतीय जनता पार्टी एनडीए के पास इतना नंबर आ चुका है कि महिला आरक्षण बिल लागू हो जाएगा.
जवाब (अर्जुन राम मेघवाल): देखिए 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास किया था तब इसी भाव से ही किया था कि 2029 का जो इलेक्शन हो वो नारी शक्ति वंदन अधिनियम के साथ हो उसमें दो प्रावधान जोड़े हुए थे सेंसस का और डीलिमिटेशन का उसी का ही हम एक जो पिछला हमारा बजट सत्र गया उसमें 16 17 18 अप्रैल को हमने विशेष सत्र बुला करके उसको पास कराने का प्रयास किया. अपोजिशन ने विरोध किया. अब हो सकता है उनके समझ में आया होगा कि यह विरोध करना ठीक नहीं रहा होगा क्योंकि आधी आबादी अह नारी शक्ति को रिप्रेजेंट करती है. और अगर हम 10% 11% महिलाओं का रिप्रेजेंटेशन ही है लोकसभा में. इसको कैसे बढ़ाएंगे? कोई तरीका तो निकालना पड़ेगा. इसलिए यह 33% लोकसभा में और राज्यों की विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व हो महिलाओं को. इसके लिए नरेंद्र मोदी जी ने प्रयास करके यह बिल बनाया. आपने कहा कि मानसून सत्र में क्या उनको हक मिलेगा? क्या हक मिलेगा? तो हम तो बिल तो पास किया हुआ ही है. उसको लागू करने के तरीके के लिए ही वो अप्रैल में अमेंडमेंट लेकर के आए जी तो हम तो उस एजेंडे पर ही हैं.
सवाल: विपक्ष को आम खट्टे लग रहे हैं सर. वह कह रहे हैं कि यह जुगाड़े हुए नंबर हैं.
जवाब (अर्जुन राम मेघवाल): नहीं ऐसा कुछ नहीं है. विपक्ष को भी पता है. विपक्ष को जब हम बात कर रहे थे ना पहले जी बजट सत्र में थी कांग्रेस को छोड़कर किसी ने भी ऐसा विरोध किया ही नहीं. कांग्रेस ने कहा 29 अप्रैल के बाद सत्र बुलाओ. उन्होंने विरोध नहीं किया है. लेकिन बाद में उन्होंने कहा नरेंद्र मोदी जी लेकर आ रहे हैं. उनकी पॉपुलरिटी बढ़ जाएगी. ऐसा एक भाव कुछ सांसदों में सांस नहीं कांग्रेस के सांसदों में आया. डीएमके ने अपना स्टैंड थोड़ा बदला. सपा ने पहले कहा हम पास करेंगे. फिर कहा असली महिलाओं को आप रिप्रेजेंटेशन देते हो क्या? अपना स्टैंड बदला. टीएमसी ने कहा पहले संगठन में दो. डीएमके ने कहा कि साउथ को नुकसान हो जाएगा. जब अमित शाह जी खड़े होकर के बोल रहे थे तब उन्होंने कहा भाई आप कैसे कह रहे हो साउथ को नुकसान हो जाएंगे. यह आंकड़े रहे. तो उन्होंने कहा इसको आप बिल में ले आओ. बोला आधे घंटे एडजन करो. हम बिल में ही लेकर के आ जाते हैं. तो कांग्रेस ने कहा कि नहीं डीलिमिटेशन भी अलग करो. बोला नहीं यह नहीं होगा. डीलिमिटेशन उसका पार्ट है. तो हम तो प्रयास में उस समय भी थे. और आगे भी प्रयास में रहेंगे.
सवाल: जेसी सर सर की बात से तो यह बात समझ आई कि इस बार महिला बिल भी पास हो रहा है. डीलिमिटेशन भी और डीएम के सॉफ्ट है और सपा की तरफ से भी समर्थन या वॉर्कआउट मिल सकता है.
जवाब (डॉ. जगदीश चंद्र): मैं हाई कोर्ट जाता हूं जयपुर में तो मिलना होता है सब लोगों से. तो देश भर की जुडिशरी में ये मैसेज है "ही एंजॉयस द टोटल ट्रस्ट एंड कॉन्फिडेंस ऑफ़ नरेंद्र मोदी अमित शाह." तो इनके कार्यकाल में जो पेंडिंग अपॉइंटमेंट थे जजेस के सुप्रीम कोर्ट में थे, हाई कोर्ट में थे. उसमें अद्भुत स्पीड आई है. अद्भुत प्रगति हुई है.
ये भी पढ़ें: THE JC Show Live : 'भारत-सेशेल्स... रिश्तों का MAHASAGAR'