Libya Plane Crash: पाकिस्तान और लीबिया के बीच कथित तौर पर हुए अरबों डॉलर के हथियार सौदे के तुरंत बाद लीबिया के आर्मी चीफ मुहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद की विमान दुर्घटना में मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. यह हादसा तुर्की में हुआ, जो हाल के वर्षों में पाकिस्तान और लीबिया दोनों का ही अहम रक्षा साझेदार बनकर उभरा है.
जिस समय यह हादसा हुआ, उससे कुछ ही समय पहले पाकिस्तान और लीबिया के बीच करीब 4.5 अरब डॉलर की आर्म्स डील की खबरें सामने आई थीं. इस सौदे की टाइमिंग और परिस्थितियों ने इसे एक सामान्य दुर्घटना से कहीं आगे की बहस में ला खड़ा किया है.
गुपचुप तरीके से हुआ हथियार सौदा
पाकिस्तान जिस तरह की गंभीर आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है- जहां बीते समय में खाद्यान्न संकट तक की खबरें आई थीं, ऐसे देश से इतने बड़े स्तर पर हथियार खरीदने की क्षमता फिलहाल केवल युद्धग्रस्त लीबिया जैसे देश में ही दिखती है.
इस डील की अहमियत इसी से समझी जा सकती है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर खुद हाल ही में लीबिया के शहर बेनगाजी पहुंचे थे. माना जा रहा है कि यह दौरा इसी हथियार समझौते से जुड़ा था.
हालांकि, यह सौदा ऐसे समय में हुआ जब लीबिया 2011 से संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंधों के दायरे में है. ऐसे में इस डील ने न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा, बल्कि कई देशों की चिंता भी बढ़ा दी है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्यों बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के जरिए लीबिया तक पहुंचने वाले हथियारों में चीन में निर्मित तकनीक शामिल हो सकती है. इससे आशंका जताई जा रही है कि ये हथियार आगे चलकर हिजबुल्लाह, हमास और अन्य उग्रवादी संगठनों के हाथों तक भी पहुंच सकते हैं.
ये वही संगठन हैं जो इजरायल समेत कई देशों के लिए लंबे समय से सुरक्षा चुनौती बने हुए हैं. यही वजह है कि पाकिस्तान-लीबिया हथियार सौदे को लेकर सिर्फ इजरायल ही नहीं, बल्कि आतंकवाद से प्रभावित अन्य देशों में भी असहजता देखी जा रही है.
पाकिस्तान के भीतर भी उठ रहा विरोध
इस हथियार सौदे का विरोध सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मंचों तक सीमित नहीं है. पाकिस्तान के अंदर भी, खासकर बलूचिस्तान के राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने इस डील पर कड़ा ऐतराज जताया है.
बलूच नेताओं का कहना है कि जब देश के अंदर सुरक्षा हालात बिगड़े हुए हैं, अफगानिस्तान के साथ तनाव बना हुआ है और आंतरिक विद्रोह की स्थिति है, तब विदेशी हथियार सौदों पर ध्यान देना गंभीर चिंता का विषय है.
कुछ नेताओं ने यहां तक आशंका जताई है कि अगर इस तरह के सौदे सामान्य होते गए, तो भविष्य में पाकिस्तान अपने परमाणु संसाधनों को लेकर भी जोखिम भरे फैसले कर सकता है और तुर्की या ईरान जैसे देशों तक संवेदनशील तकनीक पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है.
तुर्की में विमान हादसा: संयोग या साजिश?
लीबियाई आर्मी चीफ की मौत जिस विमान हादसे में हुई, वह तुर्की में हुआ और यही तथ्य इस मामले को और रहस्यमय बना देता है. तुर्की, हाल के वर्षों में पाकिस्तान और लीबिया दोनों के साथ रक्षा सहयोग को लगातार मजबूत कर रहा है.
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान अकेले इतनी बड़ी आर्म्स डील को अंजाम देने की स्थिति में नहीं है. ऐसे में चीन की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यह आशंका भी जताई जा रही है कि पाकिस्तान के माध्यम से चीनी हथियारों को संघर्षग्रस्त क्षेत्रों तक पहुंचाने की एक रणनीति पर काम हो रहा हो.
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