नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद भारतीय सेना ने एक बार फिर अपने दम का जोर दुनिया को दिखा दिया है. राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्च सिस्टम की लाइव फायरिंग ड्रिल आयोजित की गई, जिसने न सिर्फ आसमान को गूंजा दिया, बल्कि यह भी साफ संदेश दिया कि भारत हर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है. यह अभ्यास पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट चेतावनी माना जा रहा है.
‘पिनाका’ नाम की पौराणिक शक्ति
भारत की सैन्य शक्ति में शामिल यह रॉकेट सिस्टम भगवान शिव के पौराणिक धनुष ‘पिनाका’ से प्रेरित है. जिस तरह शिव का धनुष अपराजेय माना जाता था, उसी तरह पिनाका भी तेजी और विनाशक क्षमता के लिए जाना जाता है. इसे DRDO ने तैयार किया है और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स एवं लार्सन एंड टुब्रो जैसे निजी उद्योगों की मदद से आधुनिक तकनीक के साथ विकसित किया गया है.
कुछ सेकंड में बरसा सकता है आग का पहाड़
पिनाका की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह 44 सेकंड में 72 रॉकेट दाग सकता है. इतनी तेजी से हमला करने की क्षमता किसी भी देश के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है. इसकी मारक क्षमता करीब 60 किलोमीटर तक है. वहीं इसका अपग्रेडेड संस्करण पिनाका MK-II ER दुश्मन पर 90 किलोमीटर दूर तक प्रहार कर सकता है. एक और एडवांस्ड वर्जन पर काम जारी है, जो 150 किलोमीटर से अधिक रेंज का होगा.
इतनी तेज रफ्तार कि रोक पाना लगभग असंभव
GPS आधारित गाइडेड सिस्टम के साथ आने वाले पिनाका रॉकेट्स की रफ्तार मैक 4.7 तक पहुंच जाती है, यानी करीब 5,800 किमी प्रति घंटे. इतनी तेज गति वाले रॉकेट को बीच में रोकना या इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है, यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है.
सेना में तैनाती और कीमत
भारतीय सेना में फिलहाल चार पिनाका रेजिमेंट तैनात हैं और छह नई रेजिमेंट का निर्माण तेज गति से जारी है. युद्ध के समय पिनाका का मुख्य काम दुश्मन के महत्वपूर्ण इलाकों को कम समय में भारी नुकसान पहुंचाना होता है. जनवरी में सरकार ने इसके लिए 10,200 करोड़ रुपए की गोला-बारूद खरीद को मंजूरी दी थी. पिनाका का निर्यात आर्मेनिया को किया जा चुका है और अब फ्रांस के साथ भी संभावित डील पर चर्चाएं चल रही हैं.
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