New Tax Bill: केंद्र सरकार ने देश को वैश्विक निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और डेटा हब बनाने के लिए ‘द टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) बिल, 2026’ पेश किया है. यह बिल लोकसभा से पास हो चुका है. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य भारत में विदेशी निवेश बढ़ाना, ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बेहतर बनाना है. इस बिल से इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, डायमंड ट्रेड, फंड मैनेजमेंट और बिजनेस ट्रस्ट (REITs/InvITs) जैसे क्षेत्रों में निवेश करने वालों को फायदा मिलने की उम्मीद है.
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को बड़ी राहत
भारत को मोबाइल, लैपटॉप और सर्वर मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाने के लिए सरकार ने अहम बदलाव किए हैं. पहले विदेशी कंपनियों को भारतीय फैक्ट्रियों के लिए कस्टम बॉन्डेड वेयरहाउस में रखे गए पार्ट्स और कंपोनेंट्स पर 2% प्रेज़म्प्टिव टैक्स देना पड़ता था.
अब इस टैक्स को पूरी तरह खत्म करके 15 साल तक टैक्स छूट देने का प्रस्ताव है. इसके अलावा, भारतीय कंपनियों को मशीनरी और टूलिंग उपलब्ध कराने वाली विदेशी कंपनियों के लिए टैक्स छूट की अवधि 5 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी जाएगी.
छोटे निवेशकों के लिए अच्छी खबर
रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों को भी राहत मिलेगी. पहले अगर किसी बिजनेस ट्रस्ट की ऑपरेटिंग कंपनी नया टैक्स सिस्टम चुनती थी, तो निवेशकों को मिलने वाला डिविडेंड टैक्स-फ्री नहीं रहता था. नए बिल के अनुसार, यूनिट होल्डर्स को मिलने वाले डिविडेंड पर टैक्स छूट फिर से बहाल की जाएगी. सरकार का कहना है कि इसका असर छोटे निवेशकों की जेब पर नहीं पड़ेगा.
डेटा सेंटर और AI डेटा सिटी को बढ़ावा
सरकार भारत में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर और AI डेटा सिटी विकसित करना चाहती है. इसके लिए विदेशी क्लाउड कंपनियों और भारतीय डेटा सेंटर ऑपरेटरों को अब अलग-अलग सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी. साथ ही, भारतीय कंपनियां लीज पर ली गई जमीन या बिल्डिंग में भी डेटा सेंटर चला सकेंगी, जिससे शुरुआती लागत कम होगी.
डायमंड ट्रेड को मिलेगा फायदा
मुंबई और सूरत के स्पेशल नोटिफाइड जोन (SNZ) में रफ डायमंड यानी कच्चे हीरों की खरीद-बिक्री और प्रदर्शनी को 15 साल तक टैक्स-फ्री किया जाएगा. इसका लाभ विदेशी माइनिंग कंपनियों, ब्रोकर्स, साइटहोल्डर्स, एग्रीगेटर्स और ऑक्शन हाउसेज को भी मिलेगा. सरकार का लक्ष्य वैश्विक हीरा व्यापार को भारत की ओर आकर्षित करना है.
कारोबार करना होगा आसान
सरकार विदेशी निवेश फंडों का प्रबंधन करने वाले भारतीय फंड मैनेजर्स को भारत में काम करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है. नए बिल में विदेशी फंडों पर लगने वाले अनावश्यक टैक्स और कागजी प्रक्रियाओं को कम किया जाएगा.
सरकार का मानना है कि इससे GIFT City (IFSC) और भारत के अन्य शहरों से वैश्विक फंड मैनेजमेंट का काम करना आसान होगा. कुल मिलाकर, नया टैक्स संशोधन बिल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, छोटे निवेशकों, डायमंड ट्रेड और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
ये भी पढ़े-ं 5 महीने की जंग ने खोली अमेरिका की पोल! खत्म होने की कगार पर हाईटेक मिसाइलों का भंडार?