Parliament Committee: केंद्र सरकार ने आखिरकार संसद की 24 स्थायी समितियों के पुनर्गठन पर अंतिम मुहर लगा दी है. ये वे समितियां हैं जो सरकार की नीतियों, विधेयकों और मंत्रालयों के कामकाज पर बारीकी से नजर रखती हैं. इस बार समितियों के गठन में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ है, बल्कि अधिकतर चेहरों को फिर से वही जिम्मेदारियां दी गई हैं, जो वे पहले निभा रहे थे.
सरकार के इस फैसले से कांग्रेस सांसद शशि थरूर, बीजेपी के निशिकांत दुबे, और अन्य वर्तमान अध्यक्षों को राहत मिली है. थरूर जहां विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे, वहीं राजीव प्रताप रूडी को फिर से जल संसाधन समिति की कमान दी गई है.
सभी दलों को मिला प्रतिनिधित्व
प्रमुख नियुक्तियां:
आखिर ये समितियां करती क्या हैं?
संसदीय स्थायी समितियां संसद के सत्रों के बीच काम करने वाला एक मजबूत तंत्र होती हैं, जिन्हें 'मिनी संसद' भी कहा जाता है. ये समितियां न सिर्फ कानूनों की समीक्षा करती हैं, बल्कि मंत्रालयों की जवाबदेही तय करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं. इनमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य होते हैं और यह शासन के हर क्षेत्र पर नजर रखती हैं.
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