हमास में गाजा शांति प्रस्ताव को लेकर फूट! तीन इस्लामिक देशों के साथ दोहा में जारी है बातचीत

Gaza Peace Plan:गाजा में लंबे समय से चल रही हिंसा और अस्थिरता को खत्म करने की कोशिशें एक बार फिर जटिल होती दिख रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शांति योजना को लेकर अब हमास ने बड़ा बयान दिया है.

Hamas splits over Gaza peace proposal talks continue in Doha three Islamic countries
Image Source: Social Media/X

Gaza Peace Plan:गाजा में लंबे समय से चल रही हिंसा और अस्थिरता को खत्म करने की कोशिशें एक बार फिर जटिल होती दिख रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शांति योजना को लेकर अब हमास ने बड़ा बयान दिया है.

दोहा में हुई हालिया बैठक के दौरान हमास के नेताओं ने साफ किया कि वे ट्रंप के प्रस्ताव के कुछ अहम बिंदुओं पर सहमत नहीं हैं, खासतौर पर हथियार डालने और हमास सदस्यों को गाजा से हटाने जैसे मुद्दों पर.

कतर, मिस्र और तुर्की से हमास की मुलाकात

मंगलवार को दोहा में हुई अहम बैठक में हमास नेताओं ने कतर, मिस्र और तुर्की के अधिकारियों से मुलाकात की और इस शांति प्रस्ताव पर चर्चा की. हमास ने संकेत दिया है कि वे जल्द ही इस पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया देंगे.

क्या कहता है ट्रंप का शांति प्लान?

इस प्रस्ताव के तहत युद्धविराम लागू होगा. साथ ही हमास को 72 घंटे के भीतर सभी बंदियों को छोड़ना होगा और हथियारों का त्याग करना होगा. इसके बाद इजराइल को धीरे-धीरे गाजा से पीछे हटना होगा. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही इस प्लान को अपना समर्थन दे चुके हैं.

हमास ने रखी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी की शर्त

हमास की प्रमुख मांगों में है कि इजराइल पूरी तरह से गाजा से हटे. इस प्रक्रिया की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और सुरक्षा गारंटी दी जाए. भविष्य में किसी भी हमास सदस्य या नेता की टारगेट किलिंग न हो. गौरतलब है कि 9 सितंबर को इजराइली सेना ने दोहा में हमास नेताओं पर हमला किया था, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई थी. यह हमला तब हुआ जब वे युद्धविराम पर चर्चा कर रहे थे.

आंतरिक मतभेद भी बड़ी चुनौती

हमास के भीतर भी इस प्रस्ताव को लेकर एकराय नहीं है. एक वर्ग बिना शर्त शांति के पक्ष में है, तो दूसरा वर्ग शर्तों को "खतरनाक" मान रहा है. खासतौर पर हथियार त्याग और निर्वासन जैसे प्रावधानों को लेकर संगठन के भीतर विरोध देखने को मिल रहा है.

कतर का रुख भी सख्त लेकिन संतुलित

कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कहा कि यह प्रस्ताव शुरुआत हो सकता है, लेकिन इसमें कुछ बिंदुओं पर दोबारा चर्चा जरूरी है. खासतौर पर इजरायली सेना की पूर्ण वापसी पर. उन्होंने दोनों पक्षों से अपील की कि वे व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए इस पर आगे बात करें.

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