3 दिन पहली और 3 दिन दूसरी पत्नी के साथ रहेगा पति, एक दिन मिलेगा 'वीकली ऑफ', यूपी में अनोखा बंटवारा

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से सामने आए एक अनोखे मामले ने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है.

Panchayat divides husbands to resolve dispute between two wives
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Meta AI

रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से सामने आए एक अनोखे मामले ने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है. यहां एक व्यक्ति की दो पत्नियों के बीच चल रहे लगातार घरेलू विवाद को खत्म करने के लिए गांव की पंचायत ने ऐसा फैसला सुनाया, जो अब हर किसी के लिए कौतूहल का विषय बन गया है. पंचायत के इस निर्णय के मुताबिक, पति को सप्ताह के छह दिन अपनी दोनों पत्नियों के बीच बांट दिया गया है, जबकि सातवां दिन यानी रविवार उसे पूरी तरह निजी समय के रूप में दिया गया है.

इस फैसले को गांव में ‘वीकली शेड्यूल फॉर्मूला’ कहा जा रहा है, जिसका उद्देश्य घर में शांति बनाए रखना और रोज-रोज के झगड़ों से निजात दिलाना बताया गया है.

कहां का है मामला और कैसे शुरू हुआ विवाद?

यह मामला अजीमनगर थाना क्षेत्र के नगलिया आकिल गांव का है. जानकारी के अनुसार, मुस्लिम समुदाय से जुड़े इस युवक ने दो शादियां की हैं. उसकी पहली शादी परिवार की सहमति से हुई थी, जबकि दूसरी शादी उसने अपनी पसंद से की थी. समय के साथ दोनों पत्नियों के बीच पति को लेकर तनातनी बढ़ती चली गई.

दोनों ही पत्नियां पति पर पूरा अधिकार जताने लगीं और उसे अपने पास रखने की जिद पर अड़ गईं. घर में आए दिन होने वाले झगड़ों ने न सिर्फ पारिवारिक माहौल बिगाड़ दिया, बल्कि बात थाने तक पहुंच गई. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद भी जब समस्या का स्थायी हल नहीं निकल पाया, तो गांव के बुजुर्गों और पंचों ने पंचायत बुलाने का फैसला किया.

पंचायत का ‘3-3-1’ फार्मूला

पंचायत में पति और दोनों पत्नियों की बात विस्तार से सुनी गई. इसके बाद आपसी सहमति से एक लिखित समझौता तैयार किया गया, ताकि भविष्य में विवाद की गुंजाइश न रहे. इस समझौते में पति के सप्ताह का स्पष्ट बंटवारा तय किया गया:

  • सोमवार से बुधवार तक पति पहली पत्नी के साथ रहेगा.
  • गुरुवार से शनिवार तक वह दूसरी पत्नी के घर रहेगा.

रविवार को पति को पूरी तरह स्वतंत्र रखा गया है. इस दिन वह न तो पहली पत्नी के पास रहेगा और न ही दूसरी के साथ, बल्कि अपने लिए समय बिताएगा.

पंचायत ने यह भी तय किया कि किसी खास परिस्थिति में तीनों की आपसी सहमति से दिन बदले जा सकते हैं, लेकिन मूल व्यवस्था में बिना कारण बदलाव नहीं किया जाएगा.

लिखित समझौते पर हुए हस्ताक्षर

पंचायत के फैसले को मजबूती देने के लिए इस समझौते को कागजों पर दर्ज किया गया और पति व दोनों पत्नियों से हस्ताक्षर कराए गए. गांव के लोगों का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब घरेलू विवाद सुलझाने के लिए इतना व्यवस्थित और लिखित समाधान निकाला गया हो.

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

रामपुर का यह मामला भले ही अनोखा लगे, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. पिछले साल फरवरी में बिहार के पूर्णिया जिले से भी इसी तरह की घटना सामने आई थी. वहां एक व्यक्ति ने पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी कर ली थी. मामला पुलिस परिवार परामर्श केंद्र तक पहुंचा था.

गिरफ्तारी के डर और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए वहां भी दोनों पत्नियों के बीच समझौता कराया गया था. उस मामले में भी पति को तीन-तीन दिन दोनों पत्नियों के साथ रहने और एक दिन अपनी मर्जी से बिताने का विकल्प दिया गया था.

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