India Palestine Relations: एक बार फिर भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिलिस्तीन के पक्ष में अपनी दृढ़ और संतुलित आवाज़ उठाई है. युगांडा की राजधानी कंपाला में आयोजित 'गुट निरपेक्ष आंदोलन' (NAM) की मंत्रीस्तरीय बैठक में भारत ने वैश्विक समुदाय को दो टूक संदेश दिया कि फिलिस्तीन से किए गए वादों को केवल दस्तावेज़ों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें निभाया भी जाए.
भारत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा संघर्ष का समाधान सिर्फ़ और सिर्फ़ कूटनीति और संवाद के ज़रिए ही संभव है, और इसी दृष्टिकोण से भारत ने हमेशा फिलिस्तीन की संप्रभुता और आत्मनिर्णय के अधिकारों का समर्थन किया है.
MoS MEA Kirti Vardhan Singh tweets, "Delivered the national statement at the meeting of the NAM Ministerial Committee on Palestine held in Kampala today. The Committee was established under India's Chairmanship of NAM in 1983. Recalled India's humanitarian assistance to the… pic.twitter.com/Nq1MWTCYR0
— ANI (@ANI) October 15, 2025
शांति, कूटनीति और ज़िम्मेदारी
केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बैठक में कहा कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद से जो घटनाएं घटित हुईं, उन्होंने न सिर्फ मध्य-पूर्व क्षेत्र को, बल्कि वैश्विक स्थिरता को भी प्रभावित किया है. उन्होंने कहा, “भारत आतंकवाद की हर प्रकार से निंदा करता है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि निर्दोष नागरिकों की पीड़ा और मौत का कोई स्थान नहीं होना चाहिए.”
भारत की मानवीय सहायता, राहत से लेकर शिक्षा तक
भारत ने अब तक 135 मीट्रिक टन दवाइयां और राहत सामग्री फिलिस्तीन को भेजी है, जिसे संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसियों के माध्यम से ज़रूरतमंदों तक पहुँचाया जा रहा है. यह सहायता सिर्फ तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाओं में भी उपयोग की जा रही है.
भारत हर वर्ष UNRWA को 5 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद देता है, और 40 मिलियन डॉलर के अतिरिक्त प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है.
फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले पहले देशों में शामिल
भारत ने एक बार फिर दोहराया कि वह फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय, संप्रभुता और स्वतंत्रता के अधिकारों का पूर्ण समर्थन करता है. भारत का दीर्घकालिक लक्ष्य है कि "Two-State Solution" जिसमें फिलिस्तीन और इज़राइल दोनों, परस्पर सम्मान और सुरक्षित सीमाओं के तहत, शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहें.
वैश्विक शांति के साझेदार
भारत ने NAM के सदस्य मिस्र और कतर के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने फिलिस्तीन-इज़राइल संघर्ष के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण मध्यस्थता की है. भारत ने शर्म अल-शेख शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री के विशेष दूत के रूप में भाग लिया और अमेरिका की शांति पहलों का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका को भी सराहा.
नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि, भारत की मानवीय अपील
भारत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी निर्दोष नागरिकों को सामान्य, भय-मुक्त जीवन जीने का अधिकार है. संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को संयम और ज़िम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए. भारत ने कहा, “जब तक हम सभी अपने-अपने दायित्वों का सम्मान नहीं करते, तब तक टिकाऊ शांति संभव नहीं होगी.”
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