'भारत हमारे ऊपर 85 फाइटर जेट से...' पाकिस्तानी अधिकारी ने अपने ही मुल्क को किया बेनकाब, जानें क्या बताया

पाकिस्तान के एक वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक और पाकिस्तान एयर फ़ोर्स के पूर्व एयर कमोडोर खालिद चिश्ती ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में भारत-पाकिस्तान तनाव, चीन-भारत संबंधों और आधुनिक युद्ध क्षमता को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए.

Pakistani officer exposed his own country Operation Sindoor
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पाकिस्तान के एक वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक और पाकिस्तान एयर फ़ोर्स के पूर्व एयर कमोडोर खालिद चिश्ती ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में भारत-पाकिस्तान तनाव, चीन-भारत संबंधों और आधुनिक युद्ध क्षमता को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए. उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य तैयारी, भारत की हवाई शक्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर खुलकर चर्चा की.

चिश्ती ने कहा कि किसी भी देश की असली ताकत युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि युद्ध से पहले की तैयारी और रणनीतिक माहौल से तय होती है. उनका कहना था कि पाकिस्तान को यह समझना होगा कि सुरक्षा क्षमताएँ सालों की सतत योजना और संसाधन निवेश से बनती हैं, न कि अचानक उत्पन्न संकट के समय.

भारत 85 फाइटर जेट लेकर तैयार था- दावा

इंटरव्यू के दौरान चिश्ती ने एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा, "एक मौके पर भारत हमारी सीमा की ओर 85 लड़ाकू विमान तैनात कर चुका था. हर जेट पर 6-7 मिसाइल लगी थीं. यानी हमारे ऊपर 300 से ज़्यादा मिसाइलें दागने की क्षमता सामने थी. उस समय हम पर भारी दबाव था."

यह दावा 2019 के बालाकोट के बाद बने तनावपूर्ण हालात की ओर इशारा करता है, जब दोनों देशों की सेनाएँ अलर्ट पर थीं.

विशेषज्ञ ने स्वीकार किया कि ऐसी स्थिति में पाकिस्तान के पास विकल्प सीमित थे, और यह दिखाता है कि भारत की हवाई क्षमता लगातार बढ़ी है.

भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव

चिश्ती ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर हालात हर पल बदलते रहते हैं. किसी छोटी-सी गलतफहमी से भी बड़ा सैन्य टकराव पैदा हो सकता है.

उनके अनुसार, "दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल ही संघर्ष की जड़ होता है. हथियारों से ज्यादा खतरनाक वह मानसिक स्थिति होती है, जिसमें दोनों सेनाएँ पहुँच जाती हैं."

उन्होंने माना कि 2019 के बाद से कूटनीतिक बातचीत कम होने से गलतफहमी का खतरा और बढ़ा है.

लद्दाख विवाद: 1962 का संदर्भ और वास्तविकता

विशेषज्ञ ने चीन-भारत सीमा विवाद पर भी चर्चा की और कहा कि लद्दाख का क्षेत्र दशकों से संवेदनशील रहा है.

उन्होंने स्वीकार किया कि—

  • चीन की सैन्य क्षमता बहुत बड़ी है,
  • भारत भी अब 1962 वाला देश नहीं है और आज कहीं अधिक मजबूत है,
  • दोनों परमाणु शक्तियों में झड़प पूरे एशिया को अस्थिर कर सकती है.

चिश्ती के अनुसार, संवाद और समझौता ही इस क्षेत्र के लिए एकमात्र स्थायी रास्ता है.

साइबर, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध निर्णायक

हवाई शक्ति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध की परिभाषा बदल चुकी है.

आज जीत तय होती है—

  • साइबर नेटवर्क की सुरक्षा,
  • इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग तकनीक,
  • ड्रोन निगरानी,
  • और सूचना नियंत्रण से.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सहित सभी देशों को अब बहु-स्तरीय युद्ध रणनीति अपनानी होगी, क्योंकि केवल पारंपरिक हथियारों से भविष्य की लड़ाइयाँ नहीं जीती जा सकतीं.

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