इस्लामाबाद/काबुल/नई दिल्ली: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर हाल ही में हुए पाकिस्तानी हवाई हमले ने न केवल दक्षिण एशिया में कूटनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, बल्कि भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के त्रिकोणीय संबंधों में भी नई तल्ख़ी ला दी है. इस हमले को लेकर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के एक पूर्व मंत्री जान अचकजई ने बयान देकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है.
भारत से 'प्रॉक्सी वॉर' का संदेश: पाकिस्तानी नेता
बलूचिस्तान के पूर्व सूचना मंत्री जान अचकजई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि पाकिस्तान द्वारा कथित रूप से काबुल पर किया गया हवाई हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि तालिबान को भारत के प्रभाव से दूर रहने की चेतावनी भी है.
उनके मुताबिक, यह हमला पाकिस्तान की बदलती क्षेत्रीय रणनीति को दर्शाता है, जो अब अपनी सीमाओं से बाहर जाकर भी अपने "राष्ट्रीय हितों" की रक्षा करने की बात कर रही है. अचकजई ने इसे एक "ऐतिहासिक ऑपरेशन" करार दिया और कहा कि इससे पाकिस्तान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अफगानिस्तान के अंदर भारत समर्थित तत्वों को सहन नहीं करेगा.
भारत-अफगान निकटता पर असहमति?
पाकिस्तान की ओर से यह हवाई हमला उस वक्त हुआ जब अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी भारत के दौरे पर थे. यह दौरा, दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को धीरे-धीरे पुनः स्थापित करने की संभावनाओं की ओर इशारा करता है. वहीं, पाकिस्तान इसे अपने रणनीतिक प्रभाव के लिए खतरे के रूप में देख रहा है.
जान अचकजई ने दावा किया कि पाकिस्तान अब तीन मोर्चों पर जंग लड़ रहा है:
उन्होंने कहा कि काबुल पर किया गया हमला अफगान नेतृत्व को यह बताने के लिए था कि भारत के साथ कोई भी रणनीतिक गठबंधन या सहयोग पाकिस्तान के लिए अस्वीकार्य होगा.
टीटीपी के खिलाफ हमला या राजनीतिक संदेश?
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स और सैन्य सूत्रों के मुताबिक, यह हवाई हमला टीटीपी सरगना नूर वली महसूद को निशाना बनाकर किया गया था. हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है. तालिबान प्रशासन की ओर से इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया आई है, और इसे अफगान संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया गया है.
तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस प्रकार के हमले दोहराए गए, तो अफगानिस्तान मूकदर्शक नहीं रहेगा.
भारत की धरती से तालिबान की चेतावनी
भारत यात्रा पर आए तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने नई दिल्ली से ही पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया. उन्होंने कहा, "पाकिस्तान अफगान जनता के धैर्य की परीक्षा न ले. उसे अमेरिका, नाटो और सोवियत संघ से पूछना चाहिए कि अफगानिस्तान के साथ टकराने का अंजाम क्या होता है."
मुत्ताकी का यह बयान एक स्पष्ट संकेत था कि तालिबान अब कूटनीतिक रूप से खुद को अलग-थलग नहीं देखना चाहता और भारत जैसे क्षेत्रीय शक्तियों के साथ संबंध बनाने के पक्ष में है.
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