'पानी रोका तो मुंहतोड़ जवाब देंगे...' फिर बिलबिलाए शहबाज शरीफ, कहा- मुनीर की लीडरशिप में भारत को हराया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर सिंधु जल समझौते को लेकर भारत पर निशाना साधा है.

Pakistan Vs India Shehbaz Sharif lashes out Indus Water Treaty Kashmir Dispute
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर सिंधु जल समझौते को लेकर भारत पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने या कम करने की किसी भी कोशिश का कड़ा जवाब दिया जाएगा.

गुरुवार को इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का रुख कभी नहीं बदलेगा. उन्होंने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ करते हुए यह भी दावा किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने अपने दुश्मन को हराया है.

शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी देशों के साथ शांति चाहता है, लेकिन उसकी शांति की इच्छा को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए. उन्होंने भारत से अपने रवैये में बदलाव की बात भी कही.

सिंधु जल समझौता क्या है?

सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का समझौता है. यह समझौता 19 सितंबर 1960 को भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हुआ था.

इसके तहत:

  • भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के पानी के इस्तेमाल का अधिकार मिला.
  • पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का पानी मिला.

भारत ने समझौता क्यों रोका?

अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस समझौते को निलंबित कर दिया. भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भरोसेमंद और ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक यह रोक जारी रहेगी.

दूसरी तरफ पाकिस्तान का कहना है कि इस समझौते को एकतरफा तरीके से निलंबित नहीं किया जा सकता और यह अब भी लागू है.

पाकिस्तान में पानी की कमी बढ़ रही है

रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है. देश की लगभग 80 प्रतिशत खेती सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर निर्भर है. सिंध और बलूचिस्तान जैसे इलाकों में पानी की कमी बढ़ने की बात कही जा रही है.

सुक्कुर बैराज में पानी का स्तर घटने की खबरों के कारण कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की चिंता भी बढ़ गई है. इसलिए सिंधु जल समझौता दोनों देशों के बीच एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है.