'सेना को बदला लेने से रोक रखा है'...पाकिस्तान से क्यों बदला नहीं ले रहा अफगानिस्तान? किया खुलासा

पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में एयरस्ट्राइक किए जाने के बाद भी अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार ने शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का पक्ष लिया है. पाकिस्तान के इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए तालिबान ने फिलहाल कोई जवाबी कार्रवाई न करने का फैसला किया है.

Pakistan Taliban War has been prevented from taking revenge
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पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में एयरस्ट्राइक किए जाने के बाद भी अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार ने शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का पक्ष लिया है. पाकिस्तान के इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए तालिबान ने फिलहाल कोई जवाबी कार्रवाई न करने का फैसला किया है और 18 अक्टूबर 2025 को कतर की राजधानी दोहा में होने वाली शांति वार्ता में हिस्सा लेने के लिए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा है.

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुहाजिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल दोहा पहुंच चुका है. उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान के एयरस्ट्राइक में तीन स्थानीय क्रिकेटरों की मौत हुई, जो अत्यंत दुःखद घटना है. लेकिन तालिबान ने साफ किया कि फिलहाल वे सीजफायर की गरिमा और क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार की प्रतिकारात्मक कार्रवाई से बचेंगे. उनका मानना है कि शांति वार्ता का माहौल शांतिपूर्ण और सम्मानजनक बने रहना सबसे जरूरी है.

तालिबान ने किया पाकिस्तान के उकसावे का आरोप

तालिबान की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान का हमला एक उकसावे वाली कार्रवाई है, जिसका मकसद क्षेत्र में संघर्ष को और बढ़ावा देना है. बयान में उल्लेख है, हमें पता है कि हम पाकिस्तान के हमले का जवाब देने का पूरा अधिकार रखते हैं, फिर भी हमने संयम दिखाने और नए संघर्ष से बचने का फैसला किया है. तालिबान ने पाकिस्तान पर शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे क्षेत्रीय समाधान और सुरक्षा में विश्वास करते हैं.

दोनों पक्षों ने दोहा में बातचीत के लिए जताई प्रतिबद्धता

पाकिस्तान की ओर से भी एक प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता में हिस्सा लेने के लिए दोहा पहुंच चुका है. दोनों पक्षों के बीच यह वार्ता क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मौके पर दोनों देशों द्वारा संयम बरतना और वार्ता के लिए सकारात्मक माहौल बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि क्षेत्रीय स्थिरता कायम रहे.

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