पाकिस्तान की हुई भारी फजीहत! जिसे मारने के लिए अफगानिस्तान पर किया एयर स्ट्राइक, वो निकला जिंदा

Noor Wali Mehsud: काबुल पर की गई एयरस्ट्राइक के कुछ ही दिनों बाद, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है. जिस "बड़ी सफलता" का दावा पाकिस्तान सरकार और सेना ने किया था, वह अब सवालों के घेरे में आ गया है.

Pakistan embarrassment The person who was targeted for an airstrike in Afghanistan alive
Image Source: Social Media/X

Noor Wali Mehsud: काबुल पर की गई एयरस्ट्राइक के कुछ ही दिनों बाद, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है. जिस "बड़ी सफलता" का दावा पाकिस्तान सरकार और सेना ने किया था, वह अब सवालों के घेरे में आ गया है. बात हो रही है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के चीफ मुफ्ती नूर वली महसूद की, जिनके मारे जाने का दावा किया गया था. लेकिन अब सामने आए एक वीडियो ने पूरी कहानी पलट दी है.

करीब आठ मिनट के वीडियो में महसूद न सिर्फ ज़िंदा दिख रहे हैं, बल्कि खुलेआम पाकिस्तान की सेना को चुनौती दे रहे हैं. उन्होंने कहा, “मैं अफगानिस्तान में नहीं हूं, बल्कि खैबर एजेंसी में हूं. पाकिस्तानी सरकार झूठ फैला रही है.” वीडियो में उनके पीछे पाकिस्तानी सेना की चेकपोस्ट्स भी दिखाई दे रही हैं, जो यह इशारा करती हैं कि वह उन्हीं इलाकों में सक्रिय हैं जिन्हें पाकिस्तान “क्लियर” बता चुका है.

पाकिस्तान के झूठ की पोल खोलता एक वीडियो

महसूद का यह वीडियो सिर्फ उनकी मौजूदगी का सबूत नहीं देता, बल्कि पाकिस्तान की सैन्य और कूटनीतिक रणनीतियों को कठघरे में खड़ा करता है. उन्होंने वीडियो में साफ कहा कि “झूठ से जीत नहीं मिलती.” उनका दावा है कि TTP आज भी कई कबायली इलाकों में सक्रिय है और पाकिस्तान इसे छिपाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने की कोशिश कर रहा है.

FATF की नजर, लेकिन ISPR का नरेटिव?

भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान ने जानबूझकर महसूद के मारे जाने की झूठी खबर फैलाई ताकि यह दिखाया जा सके कि वह आतंकवाद के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई कर रहा है, खासकर FATF और पश्चिमी दुनिया को खुश करने के लिए. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ISPR से जुड़े बॉट्स ने सोशल मीडिया पर इस फर्जी खबर को फैलाने में अहम भूमिका निभाई.

क्या दोबारा लौट रहा है उग्रवाद?

TTP के मजबूत होते नेटवर्क और महसूद के इस वीडियो से साफ है कि पाकिस्तान के अंदर चरमपंथ एक बार फिर सिर उठा रहा है. खासकर खैबर और वजीरिस्तान जैसे इलाकों में हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं. महसूद के सार्वजनिक संदेश से न केवल पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसियों की नाकामी उजागर होती है, बल्कि यह भी जाहिर होता है कि सेना द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन 'क्लियरेंस' महज दिखावा बनकर रह गए हैं.

महसूद का संदेश, जिहाद जारी रहे

अपने वीडियो में महसूद ने अपने अनुयायियों से जिहाद जारी रखने की अपील की. साथ ही, उन्होंने पाकिस्तानी सेना को “इस्लाम का दुश्मन” बताया और अपने लड़ाकों से स्थानीय लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करने को कहा, ताकि उन्हें जन समर्थन मिलता रहे. यह बयान दर्शाता है कि महसूद न केवल एक कमांडर हैं, बल्कि वह TTP के लिए वैचारिक नेतृत्व भी कर रहे हैं.

पाकिस्तान के सामने अब दोहरी चुनौती

एक ओर देश की आर्थिक स्थिति चरमरा रही है, दूसरी ओर चरमपंथी संगठनों का हौसला बुलंद होता जा रहा है. महसूद का यह वीडियो न सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य प्रतिष्ठा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाता है कि क्या पाकिस्तान अब भी आतंकवाद के खिलाफ वाकई गंभीर है?

यह भी पढ़ें- Zerodha के फाउंडर नितिन कामत हुए फ़िशिंग स्कैम का शिकार, X अकाउंट हैक