Zerodha के फाउंडर नितिन कामत हुए फ़िशिंग स्कैम का शिकार, X अकाउंट हैक

Nitin Kamat Account Hack: देश के सबसे बड़े ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म Zerodha के फाउंडर और सीईओ नितिन कामत हाल ही में एक बड़े साइबर हमले का शिकार हो गए. उन्होंने खुद इस पूरी घटना को माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) पर शेयर किया और बताया कि कैसे एक छोटी सी चूक उन्हें बड़ा नुकसान पहुंचा सकती थी.

Zerodha founder Nitin Kamat falls victim to phishing scam X account hacked
Image Source: Social Media/X

Nitin Kamat Account Hack: देश के सबसे बड़े ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म Zerodha के फाउंडर और सीईओ नितिन कामत हाल ही में एक बड़े साइबर हमले का शिकार हो गए. उन्होंने खुद इस पूरी घटना को माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) पर शेयर किया और बताया कि कैसे एक छोटी सी चूक उन्हें बड़ा नुकसान पहुंचा सकती थी.

नितिन कामत के मुताबिक, उनके इनबॉक्स में एक ऐसा ईमेल पहुंचा जो उनके स्पैम और फ़िशिंग फिल्टर्स को बाइपास कर गया. यह मेल “Change Your Password” जैसे अलर्ट के साथ आया था. मेल इतना असली लग रहा था कि उन्होंने उस पर क्लिक कर दिया और अपना पासवर्ड एंटर कर बैठे. बस यहीं से शुरू हुआ अकाउंट हैक होने का सिलसिला.

सिंगल लॉगिन सेशन से स्कैमर्स ने पाया एक्सेस

पासवर्ड डालते ही स्कैमर्स को उनके ट्विटर अकाउंट का एक लॉगिन सेशन मिल गया. इसके बाद कामत के अकाउंट से क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े स्कैम लिंक ट्वीट किए गए. हालांकि, नितिन पहले से अपने अकाउंट पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) इनेबल किए हुए थे, जिसके चलते स्कैमर्स को पूरा कंट्रोल नहीं मिल सका और बड़ा नुकसान टल गया.

क्या यह AI से हुआ ऑटोमेटेड अटैक था?

नितिन ने इस पूरे अटैक को "AI-ऑटोमेटेड" बताया. उनका मानना है कि यह हमला व्यक्तिगत रूप से नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर ऑटोमेटेड फ़िशिंग नेटवर्क का हिस्सा था. ईमेल और लिंक इतने असली दिख रहे थे कि किसी को भी धोखा हो सकता था. यूज़र इंटरफेस को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह X जैसा ही लगे, जिससे यूज़र्स भ्रमित हो जाएं और अपने लॉगिन क्रेडेंशियल्स शेयर कर बैठें.

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से टला बड़ा नुकसान

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन इस केस में एक बड़ा सेफगार्ड साबित हुआ. कामत ने कहा कि अगर यह सुरक्षा उपाय न होता, तो स्कैमर्स उनके अकाउंट को पूरी तरह से कंट्रोल में ले सकते थे. हालांकि, 2FA भी इंसानी गलतियों को नहीं रोक सकता, अगर कोई गलत लिंक पर क्लिक करता है, तो उसके बाद तकनीक भी सीमित हो जाती है.

आम यूज़र्स के लिए बड़ा अलर्ट

कामत के अनुभव से ये बात साफ हो जाती है कि कोई भी चाहे वो कितने ही टेक्नोलॉजी-सेवी क्यों न हों, फ़िशिंग अटैक का शिकार हो सकता है. खास बात ये है कि अब स्कैमर्स AI की मदद से ऐसे ईमेल तैयार कर रहे हैं जो असली से कम नहीं लगते. इससे बचने के लिए केवल तकनीकी सुरक्षा नहीं, बल्कि सजगता और सतर्कता भी ज़रूरी है.

साइबर सुरक्षा सिर्फ IT टीम की जिम्मेदारी नहीं

इस घटना ने एक बार फिर यह बात साबित की है कि साइबर सिक्योरिटी केवल टेक्निकल सेटअप या IT टीम की जिम्मेदारी नहीं है. हर यूज़र को जागरूक होना होगा. ज़रूरत है कि कंपनियां और व्यक्ति दोनों नियमित रूप से साइबर हाइजीन पर फोकस करें, ट्रेनिंग लें और संदिग्ध मेल से दूर रहें.

सबक: एक क्लिक भी हो सकता है खतरनाक

नितिन कामत की इस घटना में बड़ा नुकसान तो टल गया, लेकिन यह घटना हर डिजिटल यूज़र के लिए एक चेतावनी है. एक छोटी सी गलती, एक ईमेल क्लिक आपकी डिजिटल सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है. सतर्क रहें, 2FA ऑन रखें और किसी भी संदिग्ध मेल या लिंक पर सोच-समझकर ही प्रतिक्रिया दें.

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