PAK की आंखों में साफ दिख रहा भारत का खौफ, बंकर में जा छिपे पाकिस्तान के आर्मी चीफ!

भारत में मंगलवार को हुई मोदी सरकार की चार अहम सुरक्षा बैठकें पाकिस्तान में खलबली मचाने के लिए काफी साबित हुईं. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के सख्त रुख ने पड़ोसी देश की नींद उड़ा दी है.

Pakistan Army Chief Asim Munir Hide himself in a bunker pak pmo
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भारत में मंगलवार को हुई मोदी सरकार की चार अहम सुरक्षा बैठकें पाकिस्तान में खलबली मचाने के लिए काफी साबित हुईं. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के सख्त रुख ने पड़ोसी देश की नींद उड़ा दी है. पाकिस्तानी मंत्री आधी रात को टीवी चैनलों पर भारत के संभावित हमले की आशंका जता रहे हैं, वहीं सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के बारे में दावा किया जा रहा है कि वे बंकर में शरण लिए हुए हैं. 

सूत्रों का कहना है कि जनरल मुनीर इस हमले की पार्श्व साजिश में शामिल रहे हैं और अब पाकिस्तान के भीतर ही उनके खिलाफ असंतोष खुलकर सामने आ रहा है. कई वरिष्ठ पत्रकारों और रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों ने उनके कट्टरपंथी दृष्टिकोण पर सवाल उठाए हैं.

क्या फिर से सक्रिय हो गया है 'ऑपरेशन टोपैक'?

जनरल मुनीर की रणनीति को लेकर पाकिस्तान में एक बड़ा सवाल उठ रहा है. क्या वे 1980 के दशक के जनरल जिया-उल-हक के 'ऑपरेशन टोपैक' की तर्ज पर काम कर रहे हैं? इस ऑपरेशन के जरिए कश्मीर में आतंकवाद को संगठित रूप से बढ़ावा दिया गया था. अब ऐसा ही पैटर्न एक बार फिर नजर आने लगा है. धार्मिक उन्माद, भारत के खिलाफ बयानबाज़ी और सीमा पार साजिशें.

वायरल बयान और नतीजे

एक वायरल वीडियो में जनरल मुनीर को यह कहते हुए सुना जा सकता है, "कश्मीर हमारी गर्दन की नस है. हमने इसके लिए तीन युद्ध लड़े हैं और इसे नहीं भूलेंगे." इसी बयान के बाद पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की जान गई. भारत अब इस पूरे मामले पर आक्रामक रुख अपना चुका है. सेना पूरी तरह हाई अलर्ट पर है और खबरों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई के लिए तैयारियां पूरी हैं.

आसिम मुनीर की मानसिकता पर सवाल

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के एक अधिकारी ने गोपनीय बातचीत में जनरल मुनीर की सोच को "साइकोपैथ जैसी" बताया है. उन्होंने कहा कि मुनीर को उम्मीद थी कि आतंकी हमले से देश में उनकी लोकप्रियता बढ़ेगी, लेकिन उल्टा असर हुआ. सऊदी अरब और UAE की एजेंसियों ने भी मुनीर के बयानों और फैसलों पर नाराज़गी जाहिर की है.

कट्टरपंथ से रणनीति तक क्या यही था मकसद?

ऐसा कहा जा रहा है कि मुनीर को सेना की कमान एक मौलाना-स्टाइल एजेंडे के तहत सौंपी गई थी. जनता को धार्मिक आधार पर भारत के खिलाफ भड़काने के लिए. लेकिन अब नतीजा यह हुआ है कि पाकिस्तान खुद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग और दबाव में आ गया है.
 

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