अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर अपने चरम पर है. बीते कुछ हफ्तों से सीमा के दोनों ओर गोलाबारी और हवाई हमलों की घटनाओं ने इस क्षेत्र में अशांति को और गहरा कर दिया है. इसी बीच, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का ताजा बयान आग में घी डालने जैसा साबित हुआ है. बुधवार को उन्होंने अफगान तालिबान शासन को खुले शब्दों में धमकी दी — “अगर पाकिस्तान की जमीन पर हमला हुआ, तो हम अफगानिस्तान के अंदर तक जाएंगे और उन्हें गुफाओं में वापस धकेल देंगे.”
हाल ही में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में हवाई हमले किए थे. इन हमलों में तीन अफगान क्रिकेटरों समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी. बताया गया कि यह कार्रवाई पाकिस्तान की ओर से सीमा पार से हो रहे आतंकी हमलों के जवाब में की गई थी. लेकिन इस हमले के तुरंत बाद अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने भी पलटवार किया. तालिबान के लड़ाकों ने डूरंड रेखा के पार पाकिस्तानी सेना की चौकियों को निशाना बनाया, जिसमें 50 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. दोनों देशों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि सीमावर्ती इलाके जंग के मैदान में बदल गए.
तुर्की में हुई शांति वार्ता रही नाकाम
इन संघर्षों के बाद तुर्की के इस्तांबुल में पाकिस्तान और तालिबान शासन के बीच शांति वार्ता की कोशिश की गई. चार दिनों तक चली इस बैठक में तुर्की और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई. लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हो सका.पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बातचीत समाप्त होने के बाद बयान जारी किया “तुर्की में हुई यह वार्ता किसी भी व्यावहारिक समाधान तक नहीं पहुंच सकी. अफगान धरती से होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने के मुद्दे पर तालिबान की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला.
"Will conduct strikes": Pak Defence Min warns Taliban "to push them back to caves"
— ANI Digital (@ani_digital) October 29, 2025
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ख्वाजा आसिफ का तीखा बयान: “हम चुप नहीं बैठेंगे”
वार्ता विफल होने के बाद ही पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आक्रामक रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब “संयम” नहीं दिखाएगा. अगर अफगानिस्तान की तरफ से किसी भी तरह का आतंकी हमला हुआ, तो पाक सेना “अंदर घुसकर” जवाब देगी. उनके शब्दों में — “हमने बहुत धैर्य रखा है, लेकिन अगर हमारी धरती पर हमला हुआ, तो हम अफगानिस्तान में गहराई तक जाएंगे और उन्हें वहीं खत्म कर देंगे. उन्हें गुफाओं में लौटने पर मजबूर कर देंगे.” आसिफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान के भीतर तालिबान समर्थित हमलों में तेजी आई है. खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे सीमावर्ती प्रांतों में आतंकी घटनाओं की संख्या बढ़ी है.
तालिबान की चुप्पी और सीमा पर बढ़ता तनाव
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने अब तक ख्वाजा आसिफ के बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अफगान सेना को सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट पर रखा गया है. वहीं, पाकिस्तान की ओर से भी अफगान सीमा के करीब सैन्य गतिविधियां बढ़ाई जा रही हैं. विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच यह टकराव केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं है. असल संघर्ष “सीमापार आतंकवाद” और “राजनयिक अविश्वास” का है, जो पिछले दो दशकों से लगातार बढ़ता आया है.
डूरंड रेखा: विवाद की जड़
दरअसल, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच 2,600 किलोमीटर लंबी डूरंड रेखा ही विवाद की सबसे बड़ी वजह है. अफगानिस्तान इसे एक “औपनिवेशिक विरासत” मानता है, जबकि पाकिस्तान इसे अपनी आधिकारिक सीमा कहता है. यही सीमा आज फिर से संघर्ष की लकीर बन चुकी है. तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान को उम्मीद थी कि काबुल सरकार के साथ उसके रिश्ते सुधरेंगे. लेकिन हुआ इसका उलट — अफगान सरजमीं से पाकिस्तान के खिलाफ आतंकी हमलों में तेजी आई, जिससे दोनों देशों के बीच भरोसा टूटता गया.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
तुर्की और कतर जैसे देशों ने इस विवाद को शांत करने की कोशिश की, लेकिन फिलहाल नतीजे नज़र नहीं आए हैं. संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी शक्तियाँ भी इस बढ़ते तनाव पर चिंता जता रही हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह स्थिति नियंत्रण से बाहर गई, तो दक्षिण एशिया एक बार फिर बड़े सुरक्षा संकट की ओर बढ़ सकता है.
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