अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है. सोमवार देर रात पाकिस्तान ने अफगान सीमा के भीतर नई एयरस्ट्राइक की, जिसकी पुष्टि तालिबान प्रशासन ने आधिकारिक बयान में की. इस हमले में कम से कम 10 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई, जिनमें 9 बच्चे और एक महिला शामिल बताए जा रहे हैं.
तालिबान की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, हमला खोस्त प्रांत के गरबज जिले के मुगलगई इलाके में स्थित एक घर पर हुआ. आधी रात लगभग 12 बजे पाकिस्तानी विमानों ने टारगेट पर बम गिराए, जिससे पूरा घर ध्वस्त हो गया और उसमें मौजूद सभी लोग मारे गए.
खोस्त के बाद कुनार और पक्तिका में भी हमले
तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने बताया कि हमला सिर्फ खोस्त तक सीमित नहीं रहा. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों में भी हवाई या जमीनी छापेमारी की, जिसमें चार अन्य नागरिक घायल हुए.
अफगान प्रशासन ने इन हमलों को “सीमा का उल्लंघन” और “अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ कार्रवाई” बताया. वहीं पाकिस्तान की सेना और विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर अब तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
पाकिस्तान खुद भी हमलों की चपेट में
एयरस्ट्राइक उसी दिन हुई जब पाकिस्तान के अंदर भी गंभीर सुरक्षा घटनाएं सामने आईं. सोमवार शाम पेशावर में स्थित फ्रंटियर कांस्टेबुलरी मुख्यालय पर आत्मघाती हमला किया गया. यह मुख्यालय सैन्य कैंटोनमेंट क्षेत्र के बिलकुल पास है.
इस हमले में:
पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि आत्मघाती हमलावर चादर ओढ़कर सुरक्षा चौकी तक पहुँचा और वहां खुद को विस्फोट से उड़ा लिया.
पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों में गिरावट
दोनों देशों के बीच बीते कुछ महीनों में तनाव तेजी से बढ़ा है. अक्टूबर में सीमा पर दोनों सेनाओं के बीच गंभीर संघर्ष हुआ था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी. 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद यह अब तक की सबसे हिंसक भिड़ंत मानी गई.
घटनाक्रम के मुख्य बिंदु:
पाकिस्तान कहता है कि अफगानिस्तान उसकी जमीन पर सक्रिय TTP (पाकिस्तान-तालिबान) को रोकने में नाकाम है. अफगानिस्तान इन आरोपों से बार-बार इनकार करता रहा है.
TTP का मुद्दा दोनों देशों के बीच बड़ी दरार
पाकिस्तान वर्षों से आरोप लगाता है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकाने बनाकर पाकिस्तान पर हमले करते हैं. हालांकि अफगान प्रशासन का कहना है कि वे अपने क्षेत्र में किसी भी संगठन को हिंसक गतिविधियां नहीं करने देते.
कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक:
अफगानी पत्रकार शब्बीर अहमद के अनुसार, तालिबान TTP को आतंकवादी संगठन नहीं, बल्कि “विचारधारा के साथी” और “लंबे संघर्ष के दौरान सहयोगी” की तरह देखता है. यही वजह है कि तालिबान शासन TTP के खिलाफ कठोर सैन्य कार्रवाई नहीं करता—उसे डर है कि ऐसा कदम संगठन के भीतर बगावत को जन्म दे सकता है.
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