तुर्की में शांति वार्ता और सीमा पर गोलीबारी... पाकिस्तान ने फिर तोड़ा सीजफायर, 11 अफगानों की मौत

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद ने एक बार फिर उग्र रूप ले लिया है. तुर्की के इस्तांबुल में जब दोनों देशों के प्रतिनिधि शांति वार्ता में शामिल थे, उसी दौरान सीमा पर गोलाबारी की घटनाओं से हालात तनावपूर्ण हो गए.

Pakistan again broke ceasefire 11 Afghans died
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अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद ने एक बार फिर उग्र रूप ले लिया है. तुर्की के इस्तांबुल में जब दोनों देशों के प्रतिनिधि शांति वार्ता में शामिल थे, उसी दौरान सीमा पर गोलाबारी की घटनाओं से हालात तनावपूर्ण हो गए. गुरुवार को सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में दावा किया गया कि पाकिस्तान की ओर से सीजफायर का उल्लंघन किया गया और अफगान इलाके के भीतर गोलाबारी की गई. इन हमलों में 11 अफगान नागरिकों की मौत और कई अन्य लोगों के घायल होने की सूचना है.

रिपोर्टों के अनुसार, यह झड़प अफगानिस्तान के दक्षिणी कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक जिले के लुकमान गांव में हुई. स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना ने बॉर्डर पोस्टों के साथ-साथ आसपास के बाजारों और घरों पर भी मोर्टार दागे. वीडियो में कई घरों के क्षतिग्रस्त होने और लोगों के सुरक्षित स्थानों की ओर भागने के दृश्य देखे जा सकते हैं.

पाकिस्तान की फौज ने पहले फायरिंग की

अफगान मीडिया संस्था टोलो न्यूज के मुताबिक, पाकिस्तान की फौज ने पहले अफगान सीमा रक्षकों पर फायरिंग की, जिसके बाद दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई. कुछ घंटों बाद फायरिंग रुक गई, लेकिन तब तक कई लोग मारे जा चुके थे.

तालिबान का पाकिस्तान से जवाब मांगना

अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने इस घटना को सीजफायर का उल्लंघन बताया. उन्होंने कहा, “हमने अब तक कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है क्योंकि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन पाकिस्तान का यह कदम गंभीर चिंता का विषय है.” मुजाहिद ने यह भी कहा कि सीमा पर हुई गोलीबारी से स्थानीय नागरिकों में भय का माहौल फैल गया है.

दूसरी ओर, पाकिस्तान ने सभी आरोपों से इनकार किया है. इस्लामाबाद की ओर से जारी बयान में कहा गया कि गोलीबारी की शुरुआत अफगानिस्तानी पक्ष से हुई थी और पाकिस्तानी सैनिकों ने केवल आत्मरक्षा में जवाब दिया. पाकिस्तानी सूचना मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि “स्थिति अब नियंत्रण में है और संघर्षविराम लागू है.”

हाल की घटनाएं और बढ़ता अविश्वास

यह कोई पहली घटना नहीं है जब दोनों देशों के बीच इस तरह की झड़प हुई हो. पिछले महीने भी इसी सीमा क्षेत्र में हुए विस्फोटों और गोलीबारी में 70 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश अफगान नागरिक थे.

अक्टूबर 2025 में कतर में दोनों देशों के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन उसके बाद भी सीमा पर हिंसा की घटनाएं जारी हैं. अब जब तुर्की में तीसरे दौर की शांति वार्ता चल रही है, तब इस ताजा झड़प ने वार्ता की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

तुर्की में वार्ता और भविष्य की राह

तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित वार्ता में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी सीमा सुरक्षा, आतंकवाद, और व्यापारिक मार्गों को लेकर बातचीत कर रहे हैं. जानकारों का कहना है कि सीमा विवाद और एक-दूसरे पर आतंकियों को पनाह देने के आरोप इन वार्ताओं में सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं.

अफगान-पाक संबंधों में तनाव की जड़ ड्यूरंड लाइन को लेकर है, यह वही सीमा रेखा है जिसे ब्रिटिश शासनकाल में निर्धारित किया गया था, लेकिन अफगानिस्तान इसे कभी औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं कर सका. वर्षों से इस सीमा पर तस्करी, आतंकवाद और अवैध आवाजाही की घटनाएं दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा करती रही हैं.

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