रूसी जहाजों का काल बना यूक्रेन, 3 हफ्ते में 200 टैंकरों पर किया हमला, जानें क्या है 'ऑपरेशन मोलोचका'

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में पिछले कुछ समय से रूस को समुद्र के मोर्चे पर बड़े झटके लग रहे हैं. यूक्रेन लगातार रूस के तेल नेटवर्क और समुद्री सप्लाई सिस्टम को निशाना बना रहा है.

Operation Molochka Ukraine becomes the nemesis of Russian ships tankers
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में पिछले कुछ समय से रूस को समुद्र के मोर्चे पर बड़े झटके लग रहे हैं. यूक्रेन लगातार रूस के तेल नेटवर्क और समुद्री सप्लाई सिस्टम को निशाना बना रहा है. वहीं, ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे यूरोपीय देश भी रूस के संदिग्ध तेल जहाजों पर कार्रवाई कर रहे हैं.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए तेल से होने वाली कमाई बेहद अहम मानी जाती है. ऐसे में तेल ले जाने वाले जहाजों पर हो रहे हमले रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकते हैं.

यूरोप ने रूस के तेल टैंकरों पर शुरू की कार्रवाई

रूस की तथाकथित शैडो फ्लीट से जुड़े तेल जहाजों पर यूरोपीय देशों ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है. इन जहाजों पर आरोप है कि वे पश्चिमी प्रतिबंधों को नजरअंदाज कर रूस का तेल दुनिया के बाजारों तक पहुंचाते हैं.

हाल ही में इटली की अगुवाई वाले यूरोपीय संघ के नौसैनिक मिशन ने एक रूसी तेल टैंकर को रोका. अधिकारियों ने हेलीकॉप्टर से कमांडो उतारकर जहाज की जांच की. यह जहाज सिसिली के पास रोका गया था. जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि क्या जहाज ने प्रतिबंधों से बचने के लिए गलत जानकारी या फर्जी झंडे का इस्तेमाल किया था.

ब्रिटेन और फ्रांस भी कर चुके हैं कार्रवाई

रूस के तेल नेटवर्क पर कार्रवाई करने वालों में ब्रिटेन भी शामिल है. ब्रिटेन ने इंग्लिश चैनल में रूसी शैडो फ्लीट के एक टैंकर पर ऑपरेशन चलाया था. इस दौरान कमांडो ने जहाज पर पहुंचकर जांच की थी. ब्रिटेन ने इसे रूस पर दबाव बनाने वाली बड़ी कार्रवाई बताया था.

इसके बाद फ्रांस ने भी एक संदिग्ध तेल टैंकर को रोका था. फ्रांस का कहना था कि वह रूस से जुड़े ऐसे जहाजों पर नजर रख रहा है जो प्रतिबंधों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

यूक्रेन का समुद्री ऑपरेशन, कई जहाजों पर हमला

यूरोपीय देशों की कार्रवाई के बाद यूक्रेन ने भी रूस की समुद्री सप्लाई लाइन पर हमले तेज कर दिए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन ने एक विशेष अभियान शुरू किया, जिसका मकसद रूस के तेल टैंकरों, कार्गो जहाजों और सप्लाई जहाजों को नुकसान पहुंचाना था.

इस अभियान के दौरान ड्रोन हमलों के जरिए कई जहाजों को निशाना बनाया गया. यूक्रेन का कहना है कि उसका उद्देश्य हर जहाज को डुबाना नहीं, बल्कि उनकी इंजन, संचार और नेविगेशन व्यवस्था को खराब करना है, ताकि वे काम न कर सकें.

तीन हफ्तों में 200 से ज्यादा जहाज निशाने पर

यूक्रेन के समुद्री ड्रोन बलों के अधिकारियों के अनुसार, करीब तीन हफ्तों में 200 से ज्यादा रूसी जहाजों को निशाना बनाया गया.

इनमें से कई जहाज आजोव सागर और काला सागर में थे. यूक्रेन का दावा है कि कुछ जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे रूस की समुद्री सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हुई है.

रूस का बड़ा जहाज भी हुआ नुकसान का शिकार

इन हमलों के बीच यूक्रेन ने रूस के एक बड़े कंटेनर जहाज को भी निशाना बनाने का दावा किया. यूक्रेन के अनुसार, इस हमले में जहाज को नुकसान पहुंचा और वह डूब गया.

हालांकि रूस ने इसे एक नागरिक जहाज बताया और घटना को अलग नजरिए से पेश किया.

रूस के जहाजों को क्यों बनाया जा रहा निशाना?

अमेरिका और यूरोपीय देशों का आरोप है कि रूस की शैडो फ्लीट प्रतिबंधों से बचकर तेल बेचने में मदद करती है.

रूस को तेल से मिलने वाला पैसा उसकी अर्थव्यवस्था और युद्ध खर्च के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी वजह से यूक्रेन और पश्चिमी देश रूस की समुद्री सप्लाई लाइन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. आने वाले दिनों में रूस और यूक्रेन के बीच समुद्री मोर्चे पर तनाव और बढ़ने की संभावना है.

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