भारत अंतरिक्ष में लगाएगा बड़ी छलांग! सरकार की हरी झंडी के बाद लॉन्च होंगे NVS-03 और GISAT-1A सैटेलाइट

भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी रणनीतिक क्षमता को लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में दो बेहद महत्वपूर्ण सैटेलाइट NVS-03 और GISAT-1A लॉन्चिंग के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

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नई दिल्ली: भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी रणनीतिक क्षमता को लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में दो बेहद महत्वपूर्ण सैटेलाइट NVS-03 और GISAT-1A लॉन्चिंग के लिए पूरी तरह तैयार हैं. दोनों उपग्रह कई सप्ताह से श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर में मौजूद हैं, लेकिन अंतिम सरकारी मंजूरी का इंतजार अभी भी जारी है. इनका मिशन केवल वैज्ञानिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा, निगरानी और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने से भी जुड़ा माना जा रहा है.

लॉन्च की सभी तैयारियां पूरी

सूत्रों के अनुसार NVS-03 और GISAT-1A के साथ इन्हें अंतरिक्ष में पहुंचाने वाला GSLV-Mk2 रॉकेट भी लॉन्च के लिए तैयार है. लॉन्च प्रक्रिया शुरू करने के लिए रॉकेट में प्रोपेलेंट भरने का काम भी प्रारंभ किया गया था, लेकिन अंतिम अनुमति न मिलने के कारण इसे बीच में ही रोक दिया गया. दोनों सैटेलाइट तकनीकी रूप से उड़ान भरने की स्थिति में हैं और लॉन्च विंडो मिलने का इंतजार कर रहे हैं. इस बीच, ISRO के दो प्रस्तावित PSLV मिशनों पर भी अब तक कोई आधिकारिक अपडेट सामने नहीं आया है, जिससे देश के लॉन्च कार्यक्रम की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है.

NVS-03 और GISAT-1A क्यों हैं बेहद अहम?

NVS-03 भारत की दूसरी पीढ़ी की NavIC नेविगेशन प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके जरिए देश को अधिक सटीक और भरोसेमंद पोजिशनिंग तथा नेविगेशन सेवाएं मिलेंगी, जिनका उपयोग नागरिक क्षेत्रों के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में भी किया जाएगा. वहीं GISAT-1A एक अत्याधुनिक जियो-इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे भारतीय भूभाग की लगभग रियल-टाइम निगरानी के लिए विकसित किया गया है. सीमाओं पर गतिविधियों पर नजर रखने, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियों को तेज़ी से जानकारी उपलब्ध कराने में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

पिछले मिशनों की विफलता के बाद बढ़ी अतिरिक्त सतर्कता

ISRO के लिए बीता वर्ष तकनीकी चुनौतियों से भरा रहा. जनवरी 2026 में हुए PSLV-C62 मिशन में तीसरे चरण की तकनीकी गड़बड़ी के कारण पेलोड निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच सका था. इससे पहले मई 2025 में PSLV-C61 मिशन भी तीसरे चरण में दबाव कम होने की समस्या के चलते सफल नहीं हो पाया था. हाल ही में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि PSLV-C62 की जांच समिति ने तकनीकी कारणों की पहचान कर ली है, हालांकि राष्ट्रीय हितों को देखते हुए रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी. इन घटनाओं के बाद ISRO हर आगामी लॉन्च को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है.

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