कब और किसने बनाया था भारत का पहला स्वदेशी हेलीकॉप्टर? सियाचिन से समुद्र तक दिखाता है दम, जानें सबकुछ

भारतीय सेना में आज कई आधुनिक हेलीकॉप्टर इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत का पहला स्वदेशी हेलीकॉप्टर कौन सा था.

When and by whom was Indias first indigenous helicopter built ALH Dhruv history
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नई दिल्ली: भारतीय सेना में आज कई आधुनिक हेलीकॉप्टर इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत का पहला स्वदेशी हेलीकॉप्टर कौन सा था. इसका नाम ALH ध्रुव है. यह हेलीकॉप्टर एक-दो साल में नहीं बना, बल्कि इसे तैयार करने में करीब दो दशक की मेहनत, रिसर्च और कई कठिन परीक्षण लगे.

आज भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करते हैं. आइए जानते हैं इसकी पूरी कहानी.

क्यों पड़ी स्वदेशी हेलीकॉप्टर की जरूरत?

1980 के दशक की शुरुआत में भारतीय सेना अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग हेलीकॉप्टर इस्तेमाल करती थी. लेकिन बर्फीले पहाड़, रेगिस्तान और समुद्री क्षेत्रों जैसी अलग-अलग परिस्थितियों में एक ही हेलीकॉप्टर हर जगह बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाता था.

इसके अलावा हर जरूरत के लिए विदेशों से हेलीकॉप्टर खरीदना काफी महंगा था. इसी वजह से सरकार ने फैसला किया कि भारत अपना हेलीकॉप्टर खुद तैयार करेगा.

HAL को मिली बड़ी जिम्मेदारी

साल 1984 में इस परियोजना की जिम्मेदारी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को सौंपी गई. उस समय भारत के पास हेलीकॉप्टर डिजाइन करने का ज्यादा अनुभव नहीं था. इसलिए शुरुआती दौर में जर्मनी की कंपनी Messerschmitt-Bölkow-Blohm (MBB) से तकनीकी सहयोग लिया गया.

इसके बाद भारतीय इंजीनियरों ने अपनी जरूरतों के हिसाब से हेलीकॉप्टर तैयार करने का काम शुरू किया.

1992 में भरी पहली उड़ान

करीब आठ साल की मेहनत के बाद 20 अगस्त 1992 को बेंगलुरु में ALH ध्रुव ने पहली बार उड़ान भरी. यह उड़ान कुछ मिनटों की थी, लेकिन इससे यह साबित हो गया कि भारत अपने दम पर हेलीकॉप्टर बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुका है.

इसके बाद कई साल तक अलग-अलग मौसम और इलाकों में इसकी लगातार टेस्टिंग की गई. ऊंचे पहाड़, रेगिस्तान और समुद्री इलाकों में इसके प्रदर्शन को परखा गया. सभी परीक्षण पूरे होने के बाद साल 2002 में इसे आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना में शामिल कर लिया गया.

'ध्रुव' नाम क्यों रखा गया?

इस हेलीकॉप्टर का नाम ध्रुव तारे के नाम पर रखा गया. भारतीय परंपरा में ध्रुव तारा स्थिरता और भरोसे का प्रतीक माना जाता है. इसी सोच के साथ इस हेलीकॉप्टर का नाम 'ध्रुव' रखा गया, क्योंकि इसे हर तरह की कठिन परिस्थितियों में भरोसेमंद तरीके से काम करने के लिए बनाया गया था.

क्या-क्या काम कर सकता है ध्रुव?

ALH ध्रुव एक बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टर है. इसका इस्तेमाल सैनिकों और सामान को पहुंचाने, घायल जवानों को सुरक्षित निकालने, राहत और बचाव अभियान चलाने, निगरानी करने और मेडिकल इवैक्यूएशन जैसे कई कामों में किया जाता है.

सियाचिन जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में भी इस हेलीकॉप्टर ने अपनी क्षमता साबित की है. यह 20 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में भी उड़ान भर सकता है.

समय के साथ और हुआ आधुनिक

ध्रुव के नए संस्करणों में ज्यादा ताकतवर 'शक्ति' इंजन लगाया गया. इसे HAL ने फ्रांस की कंपनी Safran के सहयोग से विकसित किया. इससे ऊंचाई वाले इलाकों में इसकी क्षमता और बेहतर हो गई.

इसके अलावा इसमें डिजिटल कॉकपिट, आधुनिक एवियोनिक्स और ऑटोमैटिक फ्लाइट कंट्रोल जैसी नई तकनीक भी जोड़ी गई, जिससे इसे उड़ाना पहले से ज्यादा सुरक्षित और आसान हो गया.

ध्रुव से बना रुद्र और प्रचंड

ध्रुव सिर्फ एक परिवहन हेलीकॉप्टर नहीं रहा. इसी प्लेटफॉर्म के आधार पर भारत ने अपना पहला स्वदेशी हथियारबंद हेलीकॉप्टर HAL रुद्र तैयार किया. इसमें 20 मिमी की तोप, रॉकेट और एंटी-टैंक मिसाइलें लगाने की क्षमता है.

इसी अनुभव का इस्तेमाल बाद में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) प्रचंड बनाने में भी किया गया.

विदेशों को भी हो रहा निर्यात

आज भारतीय सेना के साथ-साथ वायुसेना, नौसेना और तटरक्षक बल भी ध्रुव का इस्तेमाल कर रहे हैं. प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्य, बाढ़ में फंसे लोगों को बचाना, पहाड़ी इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाना और मेडिकल मिशन में भी यह अहम भूमिका निभाता है.

भारत अब इस हेलीकॉप्टर का निर्यात भी कर रहा है. मॉरीशस, नेपाल और मालदीव जैसे देशों को ALH ध्रुव की आपूर्ति की जा चुकी है.

आत्मनिर्भर भारत की बड़ी पहचान

करीब 40 साल पहले शुरू हुई यह परियोजना आज भारत की रक्षा तकनीक की बड़ी सफलता मानी जाती है. ALH ध्रुव ने यह साबित किया कि भारतीय इंजीनियर आधुनिक सैन्य तकनीक विकसित करने की क्षमता रखते हैं. यही वजह है कि आज आत्मनिर्भर भारत की बात होती है, तो ध्रुव का नाम सबसे अहम उपलब्धियों में शामिल किया जाता है.

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