नई दिल्ली: भारत अपनी सीमाओं पर रेलवे नेटवर्क को मजबूत बनाने की बड़ी तैयारी कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश से सटे इलाकों में करीब ₹45,000 करोड़ की लागत से रेलवे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बना रही है.
बताया जा रहा है कि अगले 18 से 24 महीनों के दौरान इस योजना पर तेजी से काम किया जाएगा. इसका मकसद सीमावर्ती इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी देना और जरूरत पड़ने पर सेना की आवाजाही को तेज बनाना है.
कई राज्यों में बिछेंगी नई रेलवे लाइनें
इस योजना के तहत पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में नई रेलवे लाइनें बिछाई जा सकती हैं. इसके अलावा कई रेलवे स्टेशनों और प्लेटफॉर्म का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा.
रिपोर्ट के अनुसार, यह परियोजना अगले दो वर्षों में रेलवे के कुल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का बड़ा हिस्सा हो सकती है.
सेना की तैयारी होगी और मजबूत
इस प्रोजेक्ट को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि इसका इस्तेमाल आम लोगों के साथ-साथ सेना भी कर सके.
सीमा पर किसी भी आपात स्थिति या तनाव के दौरान सैनिकों, टैंक, तोप, हथियार और जरूरी सामान को कम समय में सीमा तक पहुंचाना आसान होगा. इससे सेना की तैनाती पहले के मुकाबले और तेज हो सकेगी.
सीमावर्ती इलाकों के लोगों को भी मिलेगा फायदा
रेल नेटवर्क मजबूत होने से दूर-दराज के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को हर मौसम में बेहतर आवाजाही की सुविधा मिलेगी.
इससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर बढ़ सकते हैं. साथ ही लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी जरूरी सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी.
बदलते हालात के बीच बढ़ी योजना की अहमियत
भारत की सीमाएं चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती हैं. हाल के वर्षों में इन सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हैं. ऐसे में सरकार सीमावर्ती इलाकों में मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करने पर जोर दे रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर रेल नेटवर्क से सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी.
चीन की तैयारियों का जवाब
पिछले कुछ वर्षों में चीन ने अपनी सीमा के पास सड़क, रेलवे और हवाई ढांचे का तेजी से विस्तार किया है. भारत भी अब सीमावर्ती इलाकों में अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है.
देश पहले ही जम्मू-कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बना चुका है. वहीं, पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर भारत में करीब 1,700 किलोमीटर नई रेलवे लाइनें भी बिछाई गई हैं.
इसके अलावा कई पुराने एयरबेस और हवाई सुविधाओं को भी फिर से तैयार किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके.
अगर यह नई योजना तय समय पर पूरी होती है, तो इससे सीमा सुरक्षा के साथ-साथ सीमावर्ती राज्यों के विकास को भी बड़ी गति मिल सकती है.
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