तकनीकी दुनिया में एक बड़ी खबर आई है. OpenAI ने अपना सबसे नया और एडवांस्ड AI मॉडल GPT-5 लॉन्च कर दिया है. इस मौके पर कंपनी के सीईओ सैम आल्टमैन ने भारत की बड़ी तारीफ की और इसे आने वाले समय का सबसे बड़ा AI मार्केट बताया. उन्होंने कहा कि भारत आने वाले कुछ वर्षों में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए AI क्षेत्र में विश्व का नंबर-1 बाजार बन जाएगा. फिलहाल भारत, OpenAI के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मार्केट है और यहां लाखों लोग ChatGPT जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं.
वहीं, दूसरी ओर भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ वॉर की स्थिति बनी हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है, जिससे भारत में बने उत्पादों की अमेरिकी बाजार में मांग प्रभावित हो सकती है. खासकर ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में बनने वाले आईफोन की योजना इस विवाद से खतरे में आ गई है.
सैम ऑल्टमैन ने क्यों कही ये बात?
GPT-5 की लॉन्चिंग के दौरान सैम ऑल्टमैन ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे ज्यादा तेजी से ग्रो होने वाला मार्केट है. यहां इंडिविजुअल यूजर्स से लेकर बिजनेस यूजर्स इन दिनों तेजी से एआई को अडॉप्ट कर रहे हैं. एआई का इस्तेमाल क्रिएटिव फील्ड से लेकर प्रैक्टिल डेली लाइफ में भी हो रही है. सैम ऑल्टमैन ने कहा कि वो भारतीय रीजन को देखते हुए स्पेसिफिक प्रोडक्ट डिजाइन कर रहे हैं. इसके लिए वो लोकल पार्टनर के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. यह प्रोडक्ट भारतीय यूजर्स की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाएगा.
ट्रेड वॉर का मेक इन इंडिया पर असर
एप्पल ने चीन और अमेरिका के बीच बढ़ते ट्रेड तनाव के बीच भारत में आईफोन की मैन्युफैक्चरिंग शुरू की थी, जिससे भारत वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बना. लेकिन अब ट्रंप के टैरिफ की वजह से भारत में बने आईफोन की कीमतें अमेरिका में बढ़ सकती हैं, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है. हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान को फिलहाल टैरिफ से छूट दी गई है, लेकिन कंप्यूटर चिप्स और सेमीकंडक्टर पर 100% टैरिफ लगाया गया है, जो तकनीकी उद्योग के लिए चिंता का विषय है.
भारत के लिए दोनों पहलुओं का महत्व
एक तरफ भारत AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है, तो वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय व्यापार विवादों से उसे कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है. OpenAI जैसे बड़े तकनीकी खिलाड़ियों का भारत को भविष्य का प्रमुख मार्केट मानना देश की टेक्नोलॉजी विकास यात्रा को और मजबूत करता है. साथ ही, टैरिफ विवादों का समाधान निकाले बिना भारत की मेक इन इंडिया योजनाओं को पूरी ताकत से आगे बढ़ाना जरूरी होगा.
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