Pakistan Afghanistan Clash: पाकिस्तान इन दिनों गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है. एक तरफ वह अफगानिस्तान के साथ सीमा पर तनाव झेल रहा है, वहीं दूसरी ओर आंतरिक स्तर पर आर्थिक और पर्यावरणीय आपदाओं से जूझ रहा है. वर्ष 2022 की विनाशकारी बाढ़ ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह हिला दिया था. इस बाढ़ से करीब 30 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ था. इसके बाद पाकिस्तान ने वैश्विक समुदाय से मदद की गुहार लगाई, लेकिन अपेक्षित सहायता नहीं मिल सकी.
पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसन इकबाल ने हाल ही में बताया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उन्हें केवल 60 करोड़ डॉलर की सीधी मदद प्राप्त हुई. शेष सहायता पुराने कर्ज को नए रूप में पेश कर दी गई, जिसे 'नई मदद' कहना सही नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा कि यह एक विडंबना है कि जिन देशों ने जलवायु परिवर्तन के मद्देनज़र 100 अरब डॉलर के क्लाइमेट फंड का वादा किया था, उन्होंने पाकिस्तान को एक अरब डॉलर भी नहीं दिया. यही कारण है कि पाकिस्तान सरकार अब इस संकट से उबरने के लिए घरेलू संसाधनों पर निर्भर रहने की रणनीति बना रही है.
बाढ़ से हुई तबाही के आंकड़े चौंकाने वाले
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से अब तक 1,039 लोगों की जान जा चुकी है और 1,067 लोग घायल हुए हैं. लगभग 6.5 मिलियन लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से करीब 4 मिलियन को अस्थायी रूप से विस्थापित होना पड़ा. कृषि क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जिसका आंकलन लगभग 430 अरब पाकिस्तानी रुपये में किया गया है, जबकि बुनियादी ढांचे को करीब 307 अरब रुपये का नुकसान हुआ है.
घरों की बात करें तो सबसे ज्यादा प्रभावित पंजाब रहा, जहां 2,13,000 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा. बलूचिस्तान, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान में भी हजारों घर प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा सड़कों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और मवेशियों को भी भारी क्षति पहुंची है.
अफगानिस्तान के साथ बढ़ता तनाव
इस आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान को एक और मोर्चे पर लड़ना पड़ रहा है, वह है अफगानिस्तान के साथ सीमा विवाद. पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि अफगानिस्तान की सरजमीं से टीटीपी (तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के आतंकी उसके खिलाफ हमले कर रहे हैं. इसी के जवाब में पाकिस्तान ने सीमा पार कर अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक की. इसके जवाब में तालिबान ने भी हमला किया और दोनों देशों के बीच 48 घंटे के लिए संघर्षविराम हुआ. हालांकि, शुक्रवार को यह सीजफायर टूट गया और तालिबान ने दावा किया कि पाकिस्तान की ओर से फिर एयरस्ट्राइक की गई, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई.
अंदर और बाहर, दोनों तरफ से दबाव
पाकिस्तान इस वक्त एक कठिन स्थिति में फंसा हुआ है. आर्थिक मोर्चे पर बाढ़ और कर्ज ने उसे कमजोर कर दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कमी ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. वहीं, सीमा पर अफगानिस्तान के साथ तनाव ने उसकी सुरक्षा नीति को भी चुनौती दी है. इस दोहरे संकट से निकलने के लिए पाकिस्तान को अब न केवल आंतरिक सुधार की ज़रूरत है, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी सतर्कता बरतनी होगी.
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