प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे, जो भारतीय विमानन इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है. एयरपोर्ट का पहला चरण पूरा हो चुका है और यहां 3.9 किलोमीटर लंबा रनवे तैयार है, जिस पर विमान अब समानांतर रूप से उड़ान भरने और लैंडिंग करने में सक्षम होंगे. इस अत्याधुनिक एयरपोर्ट की सुविधाओं का मकसद भारतीय विमानन क्षेत्र को और भी आधुनिक और सशक्त बनाना है.
समानांतर उड़ान और लैंडिंग की सुविधा
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बनाए गए 3.9 किलोमीटर के रनवे पर विमान अब एक साथ लैंड और उड़ान भर सकेंगे. यह सुविधा भारत में अब तक केवल दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट पर उपलब्ध थी. दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर चार रनवे हैं, जिन पर अक्सर समानांतर लैंडिंग होती है, वहीं मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी समानांतर उड़ान और लैंडिंग की सुविधा है. अब नोएडा एयरपोर्ट इस रैंक में तीसरा एयरपोर्ट बनेगा, जहां इस सुविधा का लाभ मिलेगा.
आईएलएस तकनीकी और कैट थ्री सिस्टम का इस्तेमाल
इस एयरपोर्ट पर आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) के अत्याधुनिक कैट थ्री तकनीकी सिस्टम का उपयोग किया जाएगा, जिससे विमान खराब मौसम जैसे घने कोहरे और बारिश में भी सुरक्षित रूप से उड़ान भरने और लैंडिंग करने में सक्षम होंगे. इस तकनीकी की मदद से पायलट कम विजिबिलिटी के बावजूद लैंडिंग कर सकेंगे, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी.
समानांतर उड़ान में कोई परेशानी नहीं होगी
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तैयार किया गया रनवे इतना विशाल है कि यहां एक घंटे में 30 विमानों की लैंडिंग और उड़ान संभव होगी. जब एयरपोर्ट अपनी पूरी क्षमता से काम करेगा, तो यह सुनिश्चित करेगा कि यात्रियों को समय पर उनके गंतव्य तक पहुंचाया जाए. इसके लिए एयरपोर्ट की तकनीकी टीम उद्घाटन के बाद इस प्रणाली की ट्रायल शुरू कर देगी, ताकि बाद में कोई भी परेशानी न हो.
अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधा
न केवल भारत, बल्कि विदेशों में भी कुछ चुनिंदा एयरपोर्ट्स पर ही समानांतर उड़ान और लैंडिंग की सुविधा है. उदाहरण के तौर पर, शिकागो ओ’हेयर, लॉस एंजिल्स (एलएएक्स), और सैन फ्रांसिस्को (एसएफओ) एयरपोर्ट्स पर यह सुविधा उपलब्ध है. इन एयरपोर्ट्स पर रनवे 750 फीट की दूरी पर स्थित होते हैं, जिससे विमान एक साथ उड़ान भर सकते हैं और लैंड कर सकते हैं.
नोएडा एयरपोर्ट का विस्तार
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास कुल छह रनवे के साथ किया जाएगा. इस एयरपोर्ट को एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनाने का लक्ष्य है, और इसकी कुल लागत 29,561 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. पहले चरण में एक रनवे बनकर तैयार हो चुका है, और इसके बाद के तीन चरणों में बाकी रनवे तैयार किए जाएंगे. इस एयरपोर्ट की कुल निर्माण लागत विभिन्न चरणों में विभाजित है: पहले चरण में 4,588 करोड़ रुपये, दूसरे चरण में 5,983 करोड़ रुपये, तीसरे चरण में 8,415 करोड़ रुपये, और चौथे चरण में 10,575 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
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