अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सपना टूटा है. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता की घोषणा की जा चुकी है. इसी के साथ ये भी साफ हुआ कि ये प्राइज ट्रंप को नहीं मिला. वेनेजुएला की लोकतंत्र की बहाली के लिए अथक संघर्ष के लिए मरिया कोरीना मचाडो को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
क्योंकि नोबेल पुरस्कार की घोषणा हो चुकी है. कहा जा रहा है कि इस घोषणा के बाद ट्रंप की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि पिछले काफी समय से इस प्राइज के लिए ट्रंप अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे.
इस अदम्य साहस की हुई तारीफ
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरीना मचाडो ने पिछले एक वर्ष से छिपकर रहने के बावजूद अपनी लड़ाई जारी रखी है. नोबेल समिति ने उनके इस अदम्य साहस की जमकर प्रशंसा की है और कहा है कि उनके जीवन को जबरदस्त खतरा होने के बावजूद भी उन्होंने अपने देश में बने रहना चुना, जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.
बहादुरी और प्रतिबद्धता का प्रतीक
नोबेल कमेटी ने मचाडो के साहस को लोकतंत्र की रक्षा में एक अहम कदम बताया. उन्होंने कहा कि जब देश में तानाशाही ताकतें शासन संभालती हैं, तब ऐसे नायक जो डर के आगे झुकने के बजाय आवाज उठाते हैं, उन्हें पहचाना जाना चाहिए। मचाडो ने इस चुनौतीपूर्ण दौर में जो हिम्मत दिखाई, वह लोकतंत्र के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है.
स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अनमोल योगदान
समिति ने आगे कहा कि लोकतंत्र उन्हीं लोगों की वजह से बचा रहता है, जो डर के बावजूद चुप नहीं रहते और अपने अधिकारों के लिए लड़ते हैं. मारिया कोरीना मचाडो ने यह साबित किया कि आजादी को कभी भी कमतर नहीं आंका जाना चाहिए, बल्कि इसे साहस, संकल्प और मजबूत इरादों के साथ सुरक्षित रखना आवश्यक है. मारिया की इस बहादुरी ने न केवल उनके देशवासियों को बल्कि पूरी दुनिया को याद दिलाया है कि स्वतंत्रता की कीमत कितनी अहम होती है और इसके लिए लड़ना कभी भी बंद नहीं करना चाहिए.
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