रोड सेफ्टी, एथेनॉल ब्लेंडिंग, VVIP कल्चर... भारत 24 के मंच पर खुलकर बोले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Building Bharat Leadership Summit' में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शिरकत की. इस मौके पर उनसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई. 

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नई दिल्ली: भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Building Bharat Leadership Summit' में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शिरकत की. इस मौके पर उनसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई. 

सवाल: आज जब पूरी दुनिया में ऑयल को लेकर इमरजेंसी क्रिएट हो गई है तो भारत कहां खड़ा है. जो आपने 2014 से लेकर अब तक वैकल्पिक ईंधन पर काम किया है इथेनॉल, इथेनॉल ब्लेंडिंग पर क्या हम आत्मनिर्भर के आसपास हैं या कहां तक हमें और जाना है. 

जवाब: हमारे देश में 86% जो एनर्जी है वह इंपोर्ट होती है. अगर आत्मनिर्भर भारत बनाना है तो हमें स्वावलंबी बनना होगा. यह 86% जो एनर्जी हम इंपोर्ट कर रहे हैं, इसकी कीमत है 22 लाख करोड़. यानी हमारे देश से इतना पैसा देश के बाहर जा रहा है. यह पेट्रोल, डीजल, गैस यह जो आता है जिसको हम फॉसिल फल कहते हैं वो 23 लाख करोड़ की इंपोर्ट होती है. यह तो देश के बाहर पैसा जाता है. यह तो समस्या है ही. पर इसके अलावा दूसरी महत्वपूर्ण समस्या यह है कि यह पूरी फ्यूल लाकर हमारे देश में हमने एयर प्रदूषण में बढ़ोतरी की है. 

मैं जिस विभाग का मंत्री हूं 40% ऑफ द एयर पोल्यूशन के लिए मैं जिम्मेदार हूं. क्योंकि रोड पर आप जो पेट्रोल और डीजल के वाहन चलाते हैं उससे जो प्रदूषण होता है उसके दुष्परिणाम क्या है यह हमें दिल्ली के लोगों को समझाने की आवश्यकता नहीं है. अगर इसी प्रकार से प्रदूषण चलता रहेगा तो एक समय ऐसा आएगा कि हमारे यहां दिल्ली जैसे बड़े शहरों में लोगों के जीवन में 5 से 10 साल की कमी हो जाएगी. एयर पोल्यूशन, वाटर पोल्यूशन एंड साउंड पोलशन यह देश के लिए बहुत बड़ी समस्या है. और इसलिए तीन बातें इंपॉर्टेंट है. एथिक्स, इकोनमी, इकोलॉजी एंड एनवायरमेंट. तो इकोलॉजी एंड एनवायरमेंट को प्रोटेक्ट करना और सस्टेनेबल डेवलपमेंट करना यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. 

गांधी जी कहते थे कि हमारा देश गांव में रहता है. एक समय 80% से ज्यादा आबादी गांव में रहती थी. और आज स्थिति ऐसी हो गई कि वह 60% पर आई है. यह 20 टू 25% जो लोग गांव से निकले हैं यह दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु में आकर बसे हैं. बड़े शहरों में यह खुशी से नहीं आए हैं. मजबूरी से आए हैं. गांव में रोजगार नहीं, शिक्षा की सुविधाएं नहीं, स्वास्थ्य की सुविधाएं नहीं, गांव में रोड नहीं. इन सब समस्याओं को देखते हुए लोगों ने गांव को छोड़ दिया. वह शहरों के झोपड़ पट्टे में आने लगे. यह नई समस्या है. मैं जो बात करता हूं वो डायवर्सिफिकेशन ऑफ एग्रीकल्चर टुवर्ड्स एनर्जी एंड पावर सेक्टर. यह पॉलिसी की बात करता हूं. अब इसका अर्थ आप समझिए कि हमारे देश में आज जीडीपी ग्रोथ में सबसे ज्यादा कंट्रीब्यूशन जो है वो सर्विस सेक्टर का है. 52 से 54% 22 से 24% मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का कंट्रीब्यूशन है. और केवल 12% एग्रीकल्चर एंड अलाइड सेक्टर का है. 60% पापुलेशन देश की ग्रोथ में 12% कंट्रीब्यूट कर रही है. और परिणाम यही है कि वहां रोजगार नहीं है, भुखमरी है, गरीबी है और गांव गरीब मजदूर किसान दुखी है. और इस पार्श्वभूमि पर 2004 से एक मिशन के रूप में मैं काम कर रहा हूं. पहली बात हम हमारी खेती की समस्या क्या है? शुगर सरप्लस, कॉर्न सरप्लस. इस साल हमने वर्ल्ड में सबसे नंबर वन पर राइस का प्रोडक्शन किया है. राइस सरप्लस, गेहूं सरप्लस. 

हमारे यहां मुंबई शहर में बर्तन माजने की राख 30 और ₹40 किलो मिलती है और गेहूं और चावल के भाव उससे सस्ते हैं. फर्टिलाइजर और इंसेक्टिसाइड के भाव बढ़ते जा रहे हैं. और हमारे किसान के उपज के भाव कुछ नहीं है. क्योंकि हम ग्लोबल इकॉनमी में है. कॉर्न का भाव अमेरिका तय करती है. सोयाबीन का भाव अर्जेंटीना तय करती है. शुगर का भाव ब्राजील तय करती है और इसलिए हमने हमारे देश में इंपोर्ट सब्स्टट्यूट कॉस्ट इफेक्टिव पोल्यूशन फ्री और इंडीजीनियस सॉल्यूशन निकाले हैं. और उसमें से पहला जो है हम शुगरकेन जूस से, मोलाइसेस से, कॉर्न से, ब्रोकन राइस से और बांबू से हमने इथेनॉल बनाना शुरू किया है. 

मैं अभी जो गाड़ी में आया आप नीचे आई थी वो Toyato की हाइब्रिड एनओआई फ्लेक्स इंजन की उसमें 100% इथेनॉल है और वह चलते-चलते 60% बिजली तैयार करती है और पेट्रोल के भाव को अगर पकड़ा जाए तो जो एवरेज मिलता है वो इस गाड़ी का ₹25 लीटर पेट्रोल का भाव होगा. यानी कंज्यूमर का भी फायदा है. इंपोर्ट भी बचेगा. प्रदूषण जीरो है. मेरे गाड़ी में जीरो प्रदूषण है. ग्रीन फ्यूल है. अब हम ट्रैक्टर भी ऐसा तैयार कर रहे हैं क्योंकि मैं ट्रांसपोर्ट मंत्री हूं. अब मैंने ट्रैक्टर वालों पर दंडा चलाया है कि एग्रीकल्चर इक्विपमेंट और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट में भी हम अल्टरनेटिव और बायोफेल का उपयोग करेंगे. तो सीएनजी का और फ्लेक्स इंजीनियर इथेनॉल का अब ट्रैक्टर मार्च में मुझे मिल रहा है. मैं वह अभी मार्केट में ल्च होगा. तो यह सब होने से क्या होगा? इंपोर्ट बचेगा. 

अब उदाहरण के लिए बताता हूं कि हमने एक निर्णय किया. मैं बहुत दिनों से पीछे था कि हम मक्के से कौन से इथेनॉल बनाएंगे. जी. तब मक्के की एमएसपी ₹1800 क्विंटल थी और मार्केट प्राइस ₹1200 थी. यानी बिहार यूपी में तो किसानों का खूब नुकसान हुआ. और जैसा हमने निर्णय किया कि हम मक्के से इथेनॉल बनाएंगे तो मक्के का भाव ₹800 क्विंटल पहुंचा. और यूपी और बिहार के किसानों के जेब में ₹45,000 करोड़ गए क्योंकि मक्के से इथेनॉल बनना शुरू हुआ. अब जैसे इथेनॉल हुआ तो यह परली राइस्ट्रॉ जलाते हैं. परली यह राइस स्ट्रॉ पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी सब जगह जलाते हैं. अभी हमने करीब 4000 प्रोजेक्ट देश में अभी चार दिन पहले पुणे में उसके ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस हुई. मैं इनोगेशन में था. उसमें से 400 प्रोजेक्ट का काम शुरू है. 180 प्रोजेक्ट शुरू हो गए हैं. और कॉटन स्ट्रॉ विट स्ट्रॉ बगास प्रेस मड स्पेंट वाश और म्यनिसिपल ऑर्गेनिक वेस्ट को डालकर और गोबर से डालकर पायो सीएनजी बन रहा है. और आज जो आप बोल रहे हैं ना कि आज चल रहे सब न्यूज़ जी कि गैस की कमी है. जी होटल वालों ने कहा कि अब हम होटल बंद करेंगे. खाना नहीं देंगे. तो यह सब गैस देश में पैदा होगा तो हम किसी के ऊपर डिपेंड नहीं रहेंगे. 

सवाल: आपने कहा कि कचरे से बायोफ्यूल भी बनाऊंगा और आपने किया भी. इथेनॉल आप बता ही रहे हैं मक्का से पराली से. इथेनॉल 20% ज्यादातर ब्लेंडिंग हो गई है. हम कब उस प्रोडक्टिविटी पर पहुंच जाएंगे 90% कि हमको मिडिल ईस्ट से तेल लेना ही नहीं होगा. 

जवाब: 2004 में सब प्रकार की कोशिश करने के बावजूद अल्टरनेटिव फ्यूल और बायोफ्यूल की इकॉनमी 2 लाख करोड़ की बनी है. राइट और हिंदुस्तानियों को वरदान है, एक्सपर्टाइज है कि पॉपुलेशन कैसे बढ़ाना और ऑटोमबाइल का नंबर कैसे बढ़ाना. अब घर में पांच लोग हैं, सात गाड़ियां हैं. राइट सर. और आपके यहां दिल्ली में तो ऐसे धनवान लोग सबके घर पर मैं जाता हूं. क्योंकि मैंने अपना घर नियमों से बनाया. अंदर में आठ गाड़ियों का पार्किंग है. तो ये चार-चार मजली मार्बल ग्रेनाइट लगा के घर बनाते हैं और गाड़ियां रोड पर रख देते हैं. बिल्कुल सर. तो पार्किंग नहीं होगा. रोड कैसे कहां से जाएंगे लोग? और दूसरी ओर प्रदूषण बढ़ेगा. राइट? तो आने वाले समय में हमें अल्टरनेटिव और बायोफ्यल को बढ़ाना होगा. अब इसमें अच्छी बात बताता हूं. जी जब मुझे याद है चैनल का नाम नहीं लेता ताज पैलेस में कार्यक्रम था और मैंने उसी समय पहली इलेक्ट्रिक कार को ल्च किया था. जी तो मुझे प्रश्न करती महिला ने पूछा कि इलेक्ट्रिक गाड़ी अगर रास्ते में बंद होगी तो धक्का मारने के लिए आओगे क्या? अब कोई गाड़ी बंद पड़ी क्या?

अब इलेक्ट्रिक स्कूटर अब दिल्ली में पूरी इलेक्ट्रिक बस हो गई. अब इलेक्ट्रिक कार इलेक्ट्रिक स्कूटर अब इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर आ गया. इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट्स आ रहे हैं. और जो लिथियम आयन बैटरी थी जिसकी कीमत $50 पर किलवाइट पर आवर थी. अब वो $55 पर किलवाइट पर आवर यानी वन थर्ड हो गई. और लिथियम आयन फिर बैटरी केमिस्ट्री में सोडियम आयन जिंक आयन एलुमिनियम एयर टेक्नोलॉजी एक दिल्ली के आईआईटी के लड़के ने ढूंढा है उसको फोर्ट कंपनी ने अवार्ड दिया और अब एलुमिनियम शीट जो है वो फ्यूल बनेगी और वो हमारे यहां के बहुत बड़े ऑटोमबाइल इंडस्ट्री टेक्नोलॉजी खरीद ली है तो अब अल्टरनेटिव फ्यूल और बायोफ्यूल में इथेनॉल मिथेनॉल बायोडीजल एलएनजी इलेक्ट्रिक और आखरी में जो फ्यूचर है वो ग्रीन हाइड्रोजन है. 

हाइड्रोजन इज अ फ्यूल फॉर द फ्यूचर. हम ऊर्जा को आयात करने वाला देश है. 86% एनर्जी आयात करते हैं. 23 लाख करोड़ देश के बाहर जाते हैं. हमारा विज़न है हमारी कमिटमेंट है कि एक दिन ऐसा होगा कि वो हम ऊर्जा को आयात करने वाला नहीं तो ऊर्जा को निर्यात करने वाला देश बनेगा. और यह जो हाइड्रोजन बनेगा यह चार प्रकार का हाइड्रोजन है. जो पेट्रोलियम का बाय प्रोडक्ट है वह ब्राउन हाइड्रोजन है. जो कोयले से बनता है वो ब्लैक हाइड्रोजन है. जो पानी से इलेक्ट्रोलाइजर प्रोसेस से बनता है वो ग्रीन हाइड्रोजन है. पर इलेक्ट्रोलाइजर प्रोसेस में 1 केजी हाइड्रोजन को 50 यूनिट पावर लगती है. अगर सोलर की पावर पकड़े तो भी ₹150 की हो गई. जी. तो बहुत महंगा है. तो जो मैंने मैं जो आग्रह कर रहा हूं और जिसमें हम काम कर रहे हैं वह है कि म्यूसिपल सॉलिड वेस्ट को सेग्रगेट करके उसमें ग्लास, प्लास्टिक और मेटल रिसाइक्लिंग करेंगे और ऑर्गेनिक वेस्ट को बायोडाइजेस्टर में डालेंगे और बायोडाइजेस्टर में मिथेन तैयार होगा और मिथेन से दो अल्टरनेटिव होंगे. एक तो हम सीएनजी तैयार करेंगे या हम हाइड्रोजन तैयार करेंगे ग्रीन और मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि अगले महीने में कचरे से यह प्रोजेक्ट पूरा हुआ है. इसका इनोगेशन नागपुर म्यनिसिपल कॉरपोरेशन में हो रहा है. और अब वो सीएनजी 28 टन पर डे बना रहे हैं. उसको सीएनजी के बजाय हम हाइड्रोजन बना सकते हैं. 

इसमें दिक्कत एक ही है कि ट्रांसपोर्ट ऑफ हाइड्रोजन यह समस्या है और हाइड्रोजन फिलिंग स्टेशन यह समस्या है. अभी मेरी गाड़ी मेरे पास गाड़ी है हाइड्रोजन की शायद आपने देखी है. जी बिल्कुल सर. उसका नाम है मिराई. मिराई जापानी वर्ड है और मिराई का मीनिंग है भविष्य फ्यूचर. अब प्रॉब्लम यह है कि ट्रांसपोर्ट और फिलिंग स्टेशन इसमें ₹ करोड़ लगते हैं फिलिंग स्टेशन में. इसमें टेक्नोलॉजी डेवलप हो रही है. उसमें आज काम करने की आवश्यकता है. हाइड्रोजन मिशन को हमने काफी ग्रांट्स दी है. और मैं अभी 10 प्रोजेक्ट कर रहा हूं देश में जो विशेष रूप से हाइड्रोजन पर है. वो कुछ दिन पहले मैंने हाइड्रोजन की तीन ट्रक टाटा की ताज पैलेस होटल में. एक जो थी वह इसमें थी अपने अह आईसी इंजन यानी डीजल पेट्रोल इंजन में हाइड्रोजन डाल के ट्रक चलती थी. ओके. और दूसरी हाइड्रोजन फ्यूल सेल पर थी. तीनों ट्रक का ट्रक का लांच किया है. अब हाइड्रोजन की गाड़ियां बसेस तैयार हुई है. और हम लोग चार रूट 10 रूट 600 करोड़ का हमने प्रोजेक्ट लिया है. पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ है. वो प्रोजेक्ट की लिस्ट मेरे पास है. अभी मैं आपको दूंगा. और वहां Tata, Ashok Leeland, IOCL, Volvo, IPCL, NTPC.. ये सब 10 कंपनियां हैं और हम देश के 10 राष्ट्रीय महामार्गों पर हाइड्रोजन का फीलिंग स्टेशन होगा, ट्रक होगी, बसेस होगी. यह पायलट प्रोजेक्ट अभी हम शुरू कर रहे हैं. काम शुरू हुआ है उसका. 

सवाल: आपने बताया कि पेट्रोल सीएनजी स्टेशंस वैसे ही लॉजिस्टिक इशू यूज़र्स का ये है कि जो ईवी चलाते हैं गाड़ियां या फिर इथेनॉल ब्लेंडिंग को ये कह रहे हैं कि जो वाहन है वो उपयुक्त नहीं है अभी. ऐसा लोगों का मानना है कि अभी ईवी की गाड़ियां रुक जाती हैं कई बार. इश्यूज हैं. आपको लगता है कि अभी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में भी कुछ ऐसा बदलाव आने की जरूरत है?

जवाब: यहां से नजदीक सोनीपत है हम और शिपिंग में एक बशी एंड कंपनी है. बहुत प्रसिद्ध है. अब वहां मैंने एक प्रोजेक्ट लांच किया कि रेणुका शुगर के जो मुरकुंडी करके है उन्होंने एक चाइनीस कंपनी से कोलैबोरेशन किया और 60 टन का ट्रक है और उसमें स्वैपिंग टेक्नोलॉजी है. और जेएनपीटी कांडला और मुद्रा के कंटेनर यह सोनीपत पर आते हैं और सोनीपत के कंटेनर जेएनपीटी और वहां जाते हैं और 60 टन का ट्रक है. 10 मिनट में बैटरी निकालते हैं. चार्जिंग बैटरी रखते हैं. अब ₹110 का डीजल जहां लगता है वहां ₹20 की बिजली लगती है. और चार्ज हो जाता है. अभी मैं आपको बताऊंगा यह तो देश बदलने वाली बात है. जी कि हमारे चाइना की लॉजिस्टिक कॉस्ट 8% है. यूरोप और अमेरिका की कॉस्ट 12% है. और हमारी 16% थी पिछले साल. जी. पर आई एम बेंगलुरु, आईआईटी कानपुर और आईआईटी चेन्नई ने एक स्टडी किया और उन्होंने कहा कि यह जो राष्ट्रीय महामार्ग बने हैं जैसे दिल्ली से देहरादून अभी रोड बन गया है. उद्घाटन केवल होने का है. 2 घंटे में होगा. तो दिल्ली से मुंबई 12 घंटे में होगा. 

चेन्नई से बेंगलुरु 2 घंटे में होगा. दिल्ली से मेरठ 4 घंटे था. 1 घंटे में होगा. दिल्ली से अमृतसर 4 घंटे में होगा. कटरा छह घंटे में होगा. श्रीनगर 8 घंटे में होगा. यह ऐसे कम से कम 50 रोड बना रहे. दिल्ली से चेन्नई 320 कि.मी. डिस्टेंस कम हो रहा है. हम नया हाईवे बना रहे हैं. सूरत से नासिक, नासिक से अहमदनगर, अहमदनगर से सोलापुर, सोलापुर से कर्नूल और करनूल से चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोचीन, त्रिवेंद्रम. अब मुंबई, पुणे जाने की जरूरत नहीं. 320 करोड़ कम हो रहे हैं. तो उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की लॉजिस्टिक कॉस्ट 6% कम हुई है. यानी 16 से 10 पर आई है. और मैं आज आपके कार्यक्रम में घोषणा करता हूं कि आज हिंदुस्तान के लॉजिस्टिक कॉस्ट सिंगल डिजिट में यानी 9% पे है. और मैं विश्वास दिलाता हूं कि अच्छे रोड और चेंज इन फ्यूल में हम चाइना से भी कम हमारी लॉजिस्टिक कॉस्ट अगले 3 साल में होगी. यह आपको वचन देता हूं और अमेरिका के राष्ट्रीय महामार्ग जो है उसका जो स्टैंडर्ड है उसमें भारत के राष्ट्रीय महामार्ग अमेरिका के राष्ट्रीय महामार्ग के बराबर होंगे. बिहार, यूपी, अरुणाचल, मेघालय, त्रिपुरा तक यह भी बात आपको बताता हूं. 

उत्तर प्रदेश का जो है आगरा दिल्ली रोड, वहां जाने के लिए शायद अभी यह हाईवे से ढाई घंटा लगता है. फिर आगरा से ग्वालियर मैं नया ग्रीन हाईवे बना रहा हूं. जिसका टेंडर निकल गया काम चालू हो गया. भूमि पूजन करना है. तो वो हो जाएगा 2 घंटे में. यानी दिल्ली से आगरा अब 4 घंटे में पहुंच जाएंगे. अब मेरी आईडिया क्या है? मैं आपको बताता हूं. मैं एक चंबल एक्सप्रेस हाईवे बना रहा हूं और वहां जमीन ही जमीन पड़ी है और मैंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को सलाह दिया कि अब दिल्ली से यह 5 घंटे में हो जाएगा तो जमीन पड़ी है तो आप यह गुड़गांव में और ये नोएडा में इतने जमीन के भाव बढ़ गए हैं तो आप डिक्लेअ कर दो कि जो यह आएंगे यहां यह मुरैना चंबल और यह इटावा इस साइड में जो पूरा लैंड पड़ी है वेस्ट लैंड यहां जो इंडस्ट्री डालेंगे उनको हम ₹1 पे जगह देंगे कंडीशन इतनी है कि 3 साल में इंडस्ट्री शुरू करें फोकट में तो पूरी रोजगार मिलेगा गरीबी दूर हो जाएगी इनकी राइट सर तो जो चंबल एक्सप्रेस हाईवे है वो अपना कोटा नहीं अपना इटावा जी इटावा से कोटा मुंबई दिल्ली हाईवे को मिल जाएगा और दिल्ली से ग्वालियर मैक्सिमम 4 घंटे में हो जाएगा. तो मुझे आप बताइए कि मैं आपको आज डिक्लेअ कर रहा हूं कि अगले तीन महीने के अंदर दिल्ली से देहरादून फ्लाइट बंद हो जाएगी. फिर दिल्ली से जयपुर अभी फ्लाइट मुझे लगता नहीं 3 महीने में वह बंद हो जाएगी. मेरे पर विश्वास रखिए. मैंने मुंबई पुणे हाईवे बनाया था तो आठ फ्लाइट थी. जेट एयरवेज के दिल्ली और मुंबई के बीच में और मैंने डिक्लेअ किया था कि पुणे से मुंबई फ्लाइट बंद होगी. अब 8 साल से एक भी फ्लाइट नहीं है. कोई जाता ही नहीं. लेकिन चेन्नई से बोर फ्लाइट बंद हो जाएगी. मैसूर से बेंगलुरु फ्लाइट बंद हो जाएगी. 

सवाल: आपने पूरा सड़कों का जाल बिछा दिया. हम एक्सीडेंट्स को नहीं रोक पाए हैं और उसको लेकर मुझे याद है भारत मंडपम में आपने डांटा भी था राज्य सरकारों के मुखियाओं को यह भी कहा था कि मैं डाटा रिवील कर दूंगा. आपने बहुत सारे ब्लैक स्पॉट्स भी बनाए हैं. आपने बहुत मुहिम करी आपने खुद अपने नागपुर में एक्सीडेंट्स को 50% कम कर दिया. 

जवाब: देश में 5 लाख एक्सीडेंट होते हैं. 10000 मौतें होती है. अब 72 2% डेथ 18 से 45 साल के लोगों की होती है. 3% जीडीपी का नुकसान होता है. 18 साल के नीचे जो बच्चे हैं वह 1019 उनका डेथ हर साल होता है. नॉन हेलमेट ना लगाने के कारण 54122 लोगों का डेथ होता है. सीट बेल्ट ना लगाने के कारण 14466 लोगों का डेथ होता है. ओवर स्पीडिंग के कारण 1.2 लाख डेथ्स होती है. और अदर मेजर कॉजेस रॉन्ग साइड ड्राइविंग, ड्रंक ड्राइविंग, मोबाइल फोन. अब ये सब है कि इसमें तीन चार बातें हैं. पहली बात तो यह है कि ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग. इसमें हमने सब सुधार कर दिए. इलेक्ट्रॉनिक ब्रेक लगा दिए. भारत एनकैब शुरू किया. अभी तो वर्ल्ड में से 38 गाड़ियां चेकिंग के लिए हमारे यहां आई है. इतना हमारा स्टैंडर्ड अच्छा है. भारत एल कैंप स्टार रेटिंग. फिर हमने इकोनॉमिक मॉडल में छह बैक कर दिए. फिर हमने रोड इंजीनियरिंग में 350 लैंडस्लाइड स्प्लॉट थे. उस स्टोरी करिए आप. हमने 280 स्पॉट दुरुस्त कर दिए. वहां लैंडस्लाइड का कुछ नहीं. और 400 करोड़ जो एक्सीडेंट होते हैं वो ब्लैक स्पॉट हमने सुधारे और सुधारने की जरूरत है. क्योंकि हमारे डीपीआर डिफेक्टिव है. अब इसके बाद में यह सब कुछ करने के बाद में भी रोड इंजीनियरिंग हो गया, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग हो गया. फिर इनफोर्समेंट इसमें हमने लॉ कड़क बना दिया. अभी तो ऐसा लॉ बनाया है कि आपके पॉइंट्स होंगे. 

आप तीन बार अगर वलेशन करोगे तो आपके पॉइंट माइनस होंगे. अगर आपने रॉन्ग साइड गया वो ड्राइवर तो इतने पॉइंट माइनस. फिर रेड सिग्नल पर गाड़ी चलाई फिर पॉइंट माइनस और तीसरे बार उसका लाइसेंस दो साल के लिए सस्पेंड हो जाएगा. तो अब हमने कड़क नियम भी बनाए फाइन भी बढ़ा है. फिर भी लोग सुधरते नहीं. महिलाएं भी अपने बच्चों को गोद में उठाकर वह क्रॉसिंग पर कूद के जाती है. फिर मैंने हमारे इंजीनियर्स को कहा कि हिंदुस्तान का हर महिला पुरुष यह वर्ल्ड स्टैंडर्ड के एथलेटिक्स प्लेयर ऐसा समझकर बीच में ऐसे लगाओ और ऐसे कांटे लगा दो कि ताकि कूदेंगे नहीं. कूद नहीं सके. अब ये जो ह्यूमन बिहेवियर है स्कूल के सामने बच्चे अक्रॉस करते हैं वहां की स्थितियां तो ये जो ह्यूमन बिहेवियर है ये हमारी समस्या है और ह्यूमन बिहेवियर को बदलने के लिए हम बहुत अच्छे हमारा एक जरूर आज सुना ही है हमारा एक रोड सेफ्टी का गीत है शंकर महादेव ने गाया वो 22 भाषा में किया है. 

हमने अब स्कूलों में बजने वाले आपने अमिताभ बच्चन जी के साथ रोड सेफ्टी का भी अभी प्रोग्राम हाल अभी अमिताभ बच्चन और विक्की कौशल और आलिया भट्ट और मैं ऐसा प्रोग्राम दिन भर शूटिंग हुआ तो एक दिल्ली की महिला थी उसका लड़का मर गया उसने जब अपनी कहानी बताई तो आलिया भट्ट स्टेज पर रोने लगी उसके बोल नहीं पाई वो तो अमिताभ बच्चन जी ने कहा कि देखो कैसी स्थिति है. फिर भी लोग समझ नहीं पा रहे हैं जान अभी इंपॉर्टेंट है इसके लिए रूल्स ऑफ द रोड का हमने पालन करना चाहिए कहीं से भी घुसना कहीं भी मोबाइल पे बात करना आप लोगों में भी बोलना नहीं चाहिए एजुकेटेड लोग भी गाड़ी चलाते हैं, ऐसा-सा करते हैं. ये क्यों करते हो आप? आप मोबाइल फोन पे क्यों बात करते हो? आप स्कूटर पे और कार चलाते मत करिए. बिल्कुल सर. कहीं ना कहीं अब लोगों का ह्यूमन बिहेवियर बदलने के लिए हम कोशिश कर रहे हैं. स्कूल के बच्चों के लिए हमने लेसंस तैयार किए हैं. अब स्कूल में प्रोग्राम्स कर रहे हैं. हमने गीत बनाए रोड सेफ्टी के. हमने कार्टून बनाए, छोटी फिल्म बनाई. हम मीडिया में कार्यक्रम कर रहे हैं और आपको भी प्रार्थना है कि लोगों का यह ह्यूमन बिहेवियर बदलने के लिए आप भी हमको सहयोग करिए ताकि हम वर्ल्ड में नंबर एक पर हैं. अभी आप सबसे ज्यादा मौतें हो रही है. मैं दुख के साथ स्वीकार करता हूं कि मैं 12 साल में सब कोशिश करने के बाद में भी इस तिथि को मैं सुधार नहीं सका. यह मैं स्वीकार करता हूं. 

सवाल: आप देहरादून तो मुझे ढाई घंटे में पहुंचा देते हैं. आप मुझे दिल्ली सवा दो घंटे में पहुंचा देते हैं. लेकिन अगर मुझे नोएडा से दिल्ली आना है तो मुझे वही सवा दो घंटे सड़क पर रहना होता है. और उस सवा दो घंटे में मुझे कभी तो फोन करना पड़ेगा सर ड्राइविंग करते हुए. फिर एक्सीडेंट्स होंगे. यह बहुत पीड़ा की बात है. दिल्ली में आप सिर्फ नोएडा गुड़गांव की बात कर रहे हैं. 

जवाब: हम लोग 10 रुपये का काम करते हैं और ₹1 का बताते हैं. राजनीति में 1 रुपये का काम करके ₹10 का बैंड बजता है. दिल्ली एनसीआर में मैं ₹1600 करोड़ के काम कर रहा हूं ट्रैफिक बचाने को लेकर केवल दिल्ली एनसीआर में काम कर रहा हूं अभी उसमें 60 करोड़ के काम पूरे हुए और इससे ट्रैफिक को निजात मिलेगा. दिल्ली में एक है कि अभी द्वारका एक्सप्रेस हाईवे बना जी तो यह मेरा काम नहीं यह हरियाणा सरकार और दिल्ली के सरकार का था. दोनों का झगड़ा था. हो नहीं रहा था. 35 करोड़ रोड मैंने ले लिया. मुझे लगा कि 2300 करोड़ का होगा. जब गए तब मैंने अच्छा प्रोजेक्ट बनाया तो 8000 करोड़ का बना. ऑफ स्टेट ऑफ आर्ट प्रोजेक्ट बना वो. अब फिर यूआर टू आया. वो भी मेरे गले में लगाया. वो मेरा काम नहीं था. वो डीडीए का काम था. जी. वो रोड भी हमने बना दिया. अब दिल्ली का रिंग रोड हमने बनाया. तब सुप्रीम कोर्ट तक केस हुई. वो भूरेलाल जी और वो अपनी कौन थी नारायण एक्टिविस्ट थे अपने उनकी कमेट बनाई थी मैं मंत्री बना था तो फिर मैंने वो पैसे दे नहीं रही थी दिल्ली सरकार उस समय की फिर उत्तर प्रदेश सब मैंने अपने पैसे से पेरीिफेरियल रोड बनाया अब दिल्ली में मैं टनेस बना रहा हूं रोड बना रहा हूं मेरी एक रिक्वेस्ट है कि आप मुझे मत बुलाइए और वो काम की लिस्ट लेकर एक बार उस पर कार्यक्रम कर दीजिए. 

अब टनल्स बना रहे हैं. अभी यह जो सबसे बड़ा यह तुम्हारा इनकी भी समस्या है. यह एयरपोर्ट जाते समय एक धवला कुआं था. सर वो धवला मुझे दिल्ली ही मालूम नहीं. धौला कुआं मुझे बहुत मालूम है. जब मैं पहली बार जब बीजेपी का अध्यक्ष बना तो सुबह के फ्लाइट से आता तो 9:00 बजे उतर के आधा घंटा धौला कुआं में ही देखता था. वही ट्रैफिक जाम. और वो धौला कुआं करते-करते मेरे कितने बाल सफेद हो गए पता नहीं. अब फिर एक पुलिस स्टेशन था. फिर सक्सेना साहब को कहा. फिर पुलिस कमिश्नर ऑफिस में कोई पीए था उसका. वो बोलता था जरूरत नहीं. वो जो कॉर्नर पे नहीं पलटते अपन. फिर अभी परवानगी मिली. तो उसने कहा हमारे क्वार्टर भी बना दो. फिर हमारा ऑफिस भी बना दो. तो मैंने बोला मेरे लड़के की शादी है क्या? तुम्हारी जगह है तो सब बना दो. भाई, लोगों का ट्रैफिक जाम से मुक्ति चाहिए. अभी वह परमिशन मिली. मैं 20 करोड़ की बिल्डिंग बना रहा हूं और रोड की गाड़ियां हटाकर वहां. 

अब मैं दिल्ली में नेल्सन मंडेला से रोड वो बना रहा हूं. गुड़गांव तक के काफी रोड बना रहा हूं. मेरे पास लिस्ट है. सर तो अभी 2 साल के अंदर ये 1 लाख 1600 करोड़ के काम पूरे होंगे. फिर भी प्रॉब्लम सॉल्व नहीं होने वाला. बहुत दिल्ली में इतने अभी दिल्ली में अनसे हमारे ट्रांसपोर्ट मंत्री हैं. हमारे देश में अभी परिवार नियोजन की जितनी आवश्यकता है उतनी ही आवश्यकता गाड़ियों के भी नियोजन करने की है. एक आदमी अपना गाड़ी चला के निकलता है. हमको पब्लिक ट्रांसपोर्ट अच्छा बनाना पड़ेगा. और इसलिए मैंने अभी एक स्कीम तैयार की है. एक बस आई है पहली पायलट प्रोजेक्ट मैं नागपुर में कर रहा हूं. 

टाटा कंपनी उसको कर रही वह फ्लैश चार्जिंग बस है 135 सीटर उसकी फिल्म भी दिखा दूंगा आपको यहां वो बस जो है वो ₹ करोड़ पर करोड़ उसकी कॉस्ट है जो मेट्रो की 350 करोड़ है एयर कंडीशन बस है सामने से एंट्री है बस में एयर होस्टेज जैसी बस होस्टेज होगी चाय पानी नाश्ता मिलेगा और बस 40-40 किलोमीटर ऊपर से चार्ज होगी 5 10 सेकंड में फिर चली जाएगी और बस की कॉस्ट भी कम है. और उसमें एयर कंडीशन में बस का किराया डीज़ल बस की तुलना में करीब 30 35% कम होगा. सस्ता होगा. और जो गाड़ी के बजाय मस्त एयर कंडीशन में लैपटॉप बैठकर टीवी देखते हुए लोग जाएंगे तो लोग अगर अपनी टू व्हीलर फोर व्हीलर के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करेंगे तो ट्रैफिक कम होगा. अब मेट्रो बन रही है पर मेट्रो की कॉस्ट पर किलोमीटर 350 करोड़ है और मैंने मेट्रो की कैपेसिटी वाला जो सॉल्यूशन लाया है इसकी कॉस्ट ₹2 करोड़.

सवाल: ये जो वीवीआईपी कल्चर है. पांच गाड़ी के आगे चार गाड़ियों का काफिला. कुछ दिन तक ये रोक सकते हैं. मैं जयपुर गई सर. एक सड़क पर मैं एक घंटा इसलिए नहीं आगे बढ़ पाई क्योंकि तीन विधायक पहुंचे हुए थे जिनकी 15 गाड़ियां थी. 

जवाब: इसका उपाय है कि हमारे यहां कुछ शहरों का ही विकास हो रहा है अब जब मैं मुंबई में मंत्री था तो मैंने 55 फ्लावर बनाए वरली बांद्रा बनाया ये अटल ब्रिज के परमिशंस मेरे काल में ली और मैंने यह बात कर रहा हूं 98 की जी तब मैंने कहा था कि मैं अटल ल ब्रिज बनाकर तीसरी मुंबई बनाऊंगा. अब यह सेटेलाइट सिटी है, दिल्ली है. जैसे मैंने अभी कहा कि भीड़ मुरेना खाली पड़ा है. गरीबी है, भुखमरी है, बेरोजगारी है. और वहां अगर फुकट में इंडस्ट्री मिल जाएगी तो नोएडा और गुड़गांव के लोग भाग के उधर जाएंगे. वहां एयरपोर्ट भी बनेगा और 4 घंटे में दिल्ली, ग्वालियर हो जाएगा तो उधर डेवलपमेंट होगी. तो बैकवर्ड एरिया ओरिएंटेड डेवलपमेंट करना और जहां सेंट्रलाइजेशन हुआ है उसका डिसेंट्रलाइजेशन करना. अब नए रोड पर नई टाउनशिप, नए यह लॉजिस्टिक पार्क, नए-नए कुछ इंजीनियरिंग कॉलेज अभी दिल्ली में मैंने एक योजना बनाई थी और वो ये जो सक्सेना जी के पहले जो एलजी थे जी उनके साथ भी चर्चा हुई थी. वह योजना थी कि दिल्ली के रोड को 16 जगह पर रेलवे क्रॉस होती है. तो मैंने वह रेलवे दिल्ली के बाहर रिंग रोड पर 16 जगह पर कंटेनर के डेपो बनाए थे कि कंटेनर दिल्ली में आएंगे नहीं. फिर मैंने होलसेल किराना होलसेल फ्रूट होलसेल वजी सबके मार्केट पेरिफेरल रोड पे ले जाने की बात की थी. फिर स्टील सीमेंट के गोडाउन उधर चले जाएंगे. 

दिल्ली के बड़े-बड़े मार्केट इलेक्ट्रॉनिक मार्केट वहां चले जाएंगे. तो दिल्ली में लोग आना ही नहीं पड़ेगा. अब दिल्ली को जब तक दिल्ली से मार्केट बाहर नहीं जाएंगे, दिल्ली से रेजिडेंशियल कॉलोनी जो है उसमें भी कुछ अलग-अलग पॉकेट्स खड़े करने पड़ेंगे. अब लोग झोपड़ी में क्यों रहते हैं? वो घर रह नहीं सकते. फिर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके लोग उसमें रहते हैं. फिर छोट के लिए हम उसको रेगुलराइज करते हैं. तो हम पहले से ही अलग-अलग जगह पर गरीबों के लिए अगर रोड बना मैं स्मार्ट विलेज बना रहा हूं. ओके सर. तो मैंने लाख का घर बना रहा हूं. 1000 घरों में और 550 स्क्वायर फीट का है और लाइफ लॉन्ग बिजली मुफ्त पानी मुक्त तो गरीब लोगों को अफोर्ड कर सकता है. तो मैं आपको यह कहूंगा कि यह अगर बनेगा तो लोग यहां नहीं आएंगे. नहीं तो विकास का विकेंद्रीकरण करना डिसेंट्रलाइजेशन करना दैट इजेंट. ये आवश्यक है. गांवों को समृद्ध संपन्न करना, एग्रीकल्चर, रूरल ट्राइबल सेक्टर को मजबूती देना और धीरे-धीरे चलो गांव की ओर. 

मैं तो मेरे क्षेत्र में जहां काम कर रहा हूं तो मैं ये ऑर्गेनिक फार्मिंग किसानों में काम करता हूं. मुझे 16 डिलीट डॉक्टरेट मिली है. और मैं रोड का ये काम ही नहीं करता. 80% मैं साड़ियां बनाता हूं. हैंडलूम की मैं टसर की साड़ी बनाता हूं. मैं 1 किलो का प्याज हुआ मेरे यहां. 1 किलो 400 ग्राम का बैंगन हुआ. तो मैं सब्जियां तैयार करके मैं संतरे के लिए टेक्नोलॉजी ऐसे अभी एआई है मेरे पास. मैं माइक्रोसॉफ्ट और Google से मेरे खेती का फोटो निकाल के मेरे मोबाइल पे आता है. मेरे खेत में वेदर स्टेशन है और उसके साथ मॉइस्चर गिनने का स्टेशन है. और मुझे माइक्रोसॉफ्ट और Google भेजता है कि आज आपके खेत में पानी कम है. अभी पानी दो. अभी आपको 8 दिन के बाद यह डिसीज आने वाला है. तो एआई इन एग्रीकल्चर यह 1000 किसानों के लिए मैं कर रहा हूं. तो धीरे-धीरे गांव में पैसा आएगा. गांव में युवाओं को रोजगार मिलेंगे. ये बायोफ्यूल क्या है? ये किसान अन्नदाता नहीं, ऊर्जा दाता. ऊर्जा दाता नहीं, इंधन दाता, इंधन दाता नहीं, बिटुमिन दाता, बिटुमिन दाता नहीं, हाइड्रोजन दाता गांव में किसान बनेगा, तो कौन झक मारने के लिए दिल्ली- मुंबई आने वाला है. अगर उसको पैसा मिलेगा, तो कोई नहीं आएगा. 

सवाल: एक हाईवे का हम जिक्र कर रहे थे सर. हाईवे में आपने 2021-22 में बहुत अच्छी प्रगति की. 12 कि.मी. से आपने 37 कि.मी. प्रति दिन का कर दिया था. लेकिन वापस से डिले आया. इसकी वजह क्या है? और आगे का विज़न क्या है आपका? क्यों ये डिले क्यों आया? 

जवाब: 10% लैंड पर अपॉइंटमेंट डेट मिलती थी. हमने हमने नियम बनाया कि 90% जगह मिले बिना एनवायरमेंट फॉरेस्ट का क्लीयरेंस हुए बिना रेलवे से लेकर सब एड शिफ्टिंग के क्लीयरेंस हुए बिना हम अपॉइंटमेंट डेट ही नहीं देंगे तो काम अटक गया 1 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट मेरे पास ऐसे ही पड़े हुए हैं कि जब मैं अपॉइंटमेंट डेट नहीं दे सकता. काम चल रहा है. अभी पुणे में मैं 500 करोड़ के पांच पुल बना रहा हूं. नीचे में रोड ऊपर में फ्लाईओवर एक ही पिलर पर उसमें फ्लाईओवर उसके ऊपर में मेट्रो मंजूर भी कर दिए अभी 15 दिन में हम भूमि पूजन कर रहे हैं कि अभी क्लीयरेंसेस हो गए एक पुणे में 500 करोड़ के फ्लावर बना ये दिल्ली में भी बन सकते हैं पर लैंड एक्वायर्ड कौन करेगा तो कहीं ना कहीं ये धीरे-धीरे ये सब प्रॉब्लम में जो दिक्कतें थी हमने दूर की उसके कारण डिले हुआ है पर अब पैसे की तो कोई कमी नहीं है अभी पैसा इतना अभी 24 तारीख को मैं फिर इनविट मॉडल में लॉन कर रहा हूं. बरसात पड़ती है पैसे की. अभी हमारे पास जो हमने इनविट मॉडल किया था पिछला बिल्कुल सर जिसमें पब्लिक पार्टनरशिप तो 7 दिन का टाइम था 7 घंटे में सेवन टाइम्स ओवर सब्सक्राइब हुआ. 

अभी मैं 24 मार्च को सुबह 9:00 बजे मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में बेल बजाकर मेरा बॉन्ड इशू ल्च करूंगा. आप देखना 4 घंटे में चमत्कार और दूसरी बात जो जगदीश जी सबसे इंपॉर्टेंट है मैं अब विदेशी लोगों के पैसे से हाईवे बनाना नहीं चाहता मुझे बड़े लोगों की इन्वेस्टमेंट नहीं चाहिए अब मैं पत्रकार कांस्टेबल छोटे-छोटे कर्मचारी कामगार उनके लिए मैंने इनविट मॉडल खोला है. मैं एक साल का इंटरेस्ट 8.05% इंटरेस्ट दूंगा. वह इंटरेस्ट मंथली आपके अकाउंट में जमा होगा और जो इनविट में आपने बॉन्ड लिया है ₹100 का जो मैंने 2 साल पहले बेचा था उसकी कीमत 140 हुई है. यानी आपको 18% से ज्यादा रिटर्न मिलेगा. तो मैं हिंदुस्तान के गरीब लोगों को आह्वान करना चाहता हूं कि आप बैंक में डिपॉजिट मत रखिए. एनएचआई का ट्रिपल ए रेटिंग है. कोई पैसे की चिंता नहीं. आप पैसा इन्वेस्ट करिए और 20% 18% 22% साल का रिटर्न लीजिए और घर में बैठ के कमाई करिए और आराम से रहिए और गरीबों के पैसे से रोड बनाना है और मुझे बैंकों से भी नहीं पैसे चाहिए. बड़े लोगों से नहीं चाहिए. 

सवाल: मैं पार्लियामेंट आती हूं तो आपका कमरा भरा रहता है. लोग सड़कें मांगते रहते हैं आपसे. आप अक्सर एक बात कहते हैं कि चिंता मत करो. मैं अपनी सड़कों से चुनाव जीता दूंगा. आपसे यह सवाल है कि आने वाले जो पांच राज्यों के चुनाव हैं जिसमें खासतौर पर बंगाल जहां बीजेपी अभी तक नहीं आ पाई. असम है या आपकी सड़क आपको दक्षिण में विजय दिला पाएगी या नहीं?

जवाब: अब असम की बात कर रहे हो. अभी मैंने 19000 करोड़ की इमेज टनल ब्रह्मपुत्र के नीचे में नुमालीगढ़ के पास वो अभी हम लोग मंजूर कर रहे हैं. फिर काजीरंगा में 8000 करोड़ का एलिवेटेड रोड हमने मंजूर किया. 17,000 करोड़ का यह गुवाहाटी का रिंग रोड मंजूर किया. अब मैं आसाम में और नॉर्थ ईस्ट में ही तो 5 लाख करोड़ के काम कर रहा हूं. और मैं यह छोटे बात नहीं करता कि हमको वोट दो इसलिए हम रोड बना रहे वोट दो. यह देश हमारा है. देश के लिए काम करने का हमको मौका मिला है. हम जात, पंथ, धर्म, भाषा और राजनीति से ऊपर उठकर देश का विकास करना चाहते हैं और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के साथ जो वोट देगा उसका भी नहीं देगा. उसका भी सब जगह काम करेंगे और देश को आगे लेकर जाएंगे. अब जनता मां-बाप है. उनको लगेगा अच्छा तो देंगे वोट, नहीं तो नहीं देंगे. हम काम करते रहेंगे. 

24 मार्च को मेरा इनविट मॉडल ल्च हो रहा है और मैं बड़े लोगों को नहीं कह रहा हूं इनकम टैक्स पेयर को नहीं कह रहा हूं जो छोटे कर्मचारी है सैलरी वाले वह इनविट बॉन्ड खरीद लें आपको 8.05% ईयरली वह मंथली आपके अकाउंट में जमा होगा और आपको 20% से ज्यादा क्योंकि इनविट बॉन्ड की कीमत बढ़ती रहती है. तो आप इसमें इन्वेस्ट करिए. आपके मुझे पैसे की कमी नहीं है. यह गलती मत समझना. मेरे जेब में ₹15 लाख करोड़ पड़े हैं. मैं पैसा नहीं खर्चा कर पा रहा हूं. मेरे को पैसे की जरूरत नहीं. मैं कोई बैंकों के चेयरमैन को मिलने के लिए भी समय नहीं देता. पैसा बहुत है मेरा. मैं अब गरीबों के लिए मामला बता रहा हूं. आपके इंटरेस्ट में आप जरूर करें. 

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