दिल्ली सरकार ने एक साल में क्या-क्या काम किए? भारत 24 के मंच पर मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने गिनवाईं उपलब्धियां

भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Building Bharat Leadership Summit' में दिल्ली सरकार में मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली सरकार के एक साल के काम, नेशनल पॉलिटिक्स सहित कई अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. इसके साथ ही उन्होंने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारियों को लेकर भी अपनी बात रखी. 

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भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Building Bharat Leadership Summit' में दिल्ली सरकार में मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली सरकार के एक साल के काम, नेशनल पॉलिटिक्स सहित कई अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. इसके साथ ही उन्होंने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारियों को लेकर भी अपनी बात रखी. 

दिल्ली सरकार के 1 साल पूरे हो चुके हैं. इस दौरान कौन-कौन सी उपलब्धियों का जिक्र करना चाहेंगे जिसने दिल्ली को बेहतर बनाया है?

विकसित भारत कोई एक सरकार का सपना नहीं है. मेरे हर देशवासी का सपना है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने यह संकल्प लिया कि 2047 तक यह देश विकसित देश होगा और यह देश विकसित तभी होगा जब देश की राजधानी विकसित होगी. तो मुझे खुशी है एक साल रेखा गुप्ता जी की सरकार की इन उपलब्धियों में ऐसी सैकड़ों उपलब्धियां हैं जो पिछले 10 साल की सरकार ना कर पाई. मैं आपको यह बताना चाहता हूं देखिए दिल्ली के अंदर एक सबसे बड़ी जो कॉम्प्लेक्स है वह है मल्टी अथॉरिटी. उस मल्टी अथॉरिटी सरकार के अंदर काम करना सबको साथ लेकर चलना. सबसे पहले यही अपने आप में बड़ी उपलब्धि है कि रेखा गुप्ता जी ने चाहे लेफ्टिनेंट गवर्नर हो चाहे केंद्र की सरकार हो चाहे केंद्र के अफसरान हो सबको साथ ले जाकर चलते हुए दिल्ली के अंदर कई उपलब्धियां हासिल की. 

मैं चाहता हूं आपने कहा तो मैं कुछ पढ़ के सुनाना चाहता हूं कि आपको ध्यान में रहे. देखिए आज दिल्ली के अंदर एजुकेशन के लिए 75 नए सीएम श्री स्कूल्स जब हम विकसित भारत करते हैं तो एजुकेशन और हेल्थ दो ऐसी चीजें हैं जो सबसे इंपॉर्टेंट है. तो 75 ऐसे नए स्कूल जो सीएम श्री स्कूल्स हैं जिससे जिसके अंदर क्या अंतर है कि आप कल क्या बनना चाहते हैं उसकी एजुकेशन आज दी जाती है. आपको डॉक्टर बनना है, इंजीनियर बनना है. उसके लिए आज से आपको तैयार किया जाता है. यह एक नए इनिशिएटिव के साथ माननीय मुख्यमंत्री जी ने शुरू किया. दिल्ली के अंदर एक नया एमएसएमईस के लिए इकोसिस्टम डेवलप किया गया. दिल्ली के अंदर लाइसेंसिंग को खत्म किया गया. दिल्ली में अब लगभग 60 साल बाद यह किया गया कि किसी भी दिल्ली की इंडस्ट्री को आज एमसीडी से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है. जहां हम आज इस होटल में हैं. आज होटल इंडस्ट्री को भी रेस्टोरेंट चलाने के लिए भी दिल्ली पुलिस से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है. 

यह भी लगभग 60 साल बाद संभव हो पाया है. यह बताते हुए मुझे हर्ष हो रहा है कि दिल्ली के अंदर जैसे कि अभी गडकरी जी बता रहे थे. बहुत बड़ा ट्रैफिक का इशू है. 12 किलोमीटर की नई मेट्रो का माननीय प्रधानमंत्री जी ने जहां कल उद्घाटन किया और फेज फोर फाइव की के लिए भी हमारी सरकार ने लगभग ₹5000 करोड़ मेट्रो के लिए देना किया है ताकि आप दिल्ली में बिना जाम के चल सकें. दिल्ली के अंदर 14,000 नई ईवी बसेस को लाने का हमारा 2029 तक का संकल्प है और अभी तक हमारी सरकार बनने के बाद लगभग 1500 नई ईवी बसेस हम लाने में कामयाब हुए हैं ताकि दिल्ली के पोलुशन को कम किया जा सके. हम दिल्ली के अंदर ग्रीन कवर को एक्सपेंड करने में कामयाब हुए हैं. लगभग 5 स्क्वायर किलोमीटर का नया ग्रीन कवर हम इसको लाने में कामयाब हुए. इसके साथ ही लगभग 45000 हेक्टेयर लगभग 10,000 एकड़ को हमने नया फॉरेस्ट की डेफिनेशन में लाकर उसको ग्रीन बेल्ट को बचाने का काम भी हमने किया है. 

दिल्ली के अंदर 70 ऐसे अटल कैंटीन को खोला गया जहां पर ₹5 में जरूरतमंद लोग भोजन कर सकें. यह अपने आप में एक बहुत बड़ा एक संकल्प भी था और एक नया बहुत बड़ा इनिशिएटिव था कि जरूरतमंद लोग ₹ में मात्र ₹5 में खाना खा सकें. ऐसी ऐसी 70 अटल कैंटीन को खोला गया है. 19,000 उज्जवल उज्जवला के तहत हमारी दिल्ली सरकार ने अपनी बहनों को सिलेंडर देने का काम किया है, चूल्हे देने का काम किया है ताकि बायोमास बर्निंग कम हो और दिल्ली के पोलुशन को खत्म किया जा सके. इसी तरह दिल्ली के अंदर में नए 18 नमो वंश बनाए जा रहे हैं. दो मियांवा की जंगल बनाए जा रहे हैं. दिल्ली के ग्रीन कवर को और आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है. दिल्ली के अंदर अभी आपने कहा गडगरी जी ने भी चिंता की गाड़ियों की. 

हमने सेल्फ ड्रिवन कार्स जो हैं उसके अंदर लोग और उसमें कार पुलिंग कर पाएं. ऐसे नए इनिशिएटिव्स के लिए नए ऐप बनाने के लिए हमने काम शुरू किया है. ऐसी प्राइवेट जो एग्रीगेटर्स हैं कार उनके साथ भी हमने टाई अप किया है. Uber हो, Ola हो, वह एक इसी अपने ऐप में एक फीचर लाने जा रहे हैं जिससे आप अपनी प्राइवेट गाड़ी को अगर आप भी अपनी गाड़ी को पुल करना चाहते हैं और एक एक जगह से दूसरा जगह आप जा रहे हैं तो दूसरा पैसेंजर पैसे देकर आपकी गाड़ी को यूज़ कर सके. यह इनिशिएटिव पहली बार दिल्ली के अंदर हम लाने जा रहे हैं. जिससे हम पोलुशन को कम कर सकेंगे और गाड़ियों के नंबर्स को भी दिल्ली में काम कर सकेंगे. दिल्ली के अंदर सेंट्रल रोड फंड से अभी गडगरी चलेगी. मैं उनका धन्यवाद करता हूं. 

₹800 करोड़ रुपए तो गढ़ ने हमें दिया है. इसके साथ ही दिल्ली के अंदर जो हमारी मेहरौली रोड है, उसको एनएचआई के तहत उन्होंने टेकओवर करके उसको नई बनाने का काम नया हाईवे बनाने का काम कर रहे हैं. दिल्ली के अंदर जो अभी वो जिक्र कर रहे थे कि सिरसा भी मुझे कहता रहता है. तो दिल्ली में दिल्ली गुड़गांव हाईवे को भी एक्सपेंड करने का, उसको वसंत कुंज के साथ जोड़ने का, अंडरपास बनाने का ऐसे कई सारे इनिशिएटिव जो हैं दिल्ली सरकार एनएचआई के साथ मिलकर कर रही है. दिल्ली के अंदर हमने पोलूशन को कम करने के लिए अनेकों कदम उठाए हैं. 

दिल्ली की सारी इंडस्ट्री क्योंकि इंडस्ट्री एरियाज जो हैं, उनकी सड़कें टूटी हुई थी. उन सड़कों को पिछले 10-12 साल से बनाया नहीं गया. इसलिए नहीं बनाया गया क्योंकि कंप्लेक्स है. जैसे मैंने पहले बताया. डीएसआईडीसी का इंडस्ट्रियल एरिया नहीं है. वह पीडब्ल्यूडी सॉरी, डीडीए ने दे रखा है. उसकी मेंटेनेंस एमसीडी कर रही है. सड़कें बनाने को हमें करनी है. डीएसआईडीसी कैसे बनाए? यह सारे कॉम्प्लेक्स थे. लेकिन हमने लगभग 1000 करोड़ की लागत से दिल्ली के सभी 100% एरियाज की सड़कों को नया बनाना जा रहे हैं जो पोलशन के अंदर बहुत बड़ा रोकथाम करेंगे. 

दिल्ली में गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है और ऐसे में पार्किंग की व्यवस्था पर क्या काम हो रहा है?

गाड़ियों के लिए भी माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी ने पार्किंग के लिए एक नया इनिशिएटिव लिया है. अच्छा हुआ आपने वो बात करी. हमने एमसीडी से टाई अप कर रहे हैं और एमसीडी को कहा है कि जहां-जहां पे वो पार्किंग बना सकते हैं. मल्टीस्टोरी पार्किंग्स जो आजकल एलिवेटेड आती हैं. इस तरह की पार्किंग्स जो है मैकेनिकल पार्किंग्स को हम ज्यादा प्रस्थान कर रहे हैं. और उसके लिए हमारी कोशिश है कि हर एक विधानसभा के अंदर चार वार्ड हैं, छह वार्ड हैं. जितने काउंसलर वार्डस हैं उसमें कम से कम एक-एक पार्किंग जो इमीडिएटली शुरू कराई जाए. तो मुख्यमंत्री जी ने इसके ऊपर भी काम किया. 

मुझे उम्मीद है कि जल्दी एमसीडी अपनी रिपोर्ट देगी. हम पार्किंग का भी एक सलूशन लाने के लिए पूरी कोशिश में हैं. और यह अह एक मिलकर ही काम हो सकता है एमसीडी का और दिल्ली सरकार का हमें खुशी है कि दिल्ली सरकार और एमसीडी अभी एक पार्टी के पास है. तो मुझे यकीन है बहुत जल्दी पार्किंग के ऐसा नहीं है कि पार्किंग के सारे काम ठीक हो जाएंगे. ऐसा संभव है क्योंकि दिल्ली के अंदर लैंड बहुत कॉस्टली है. दिल्ली के अंदर लैंड की अवेलेबिलिटी निल है. दिल्ली के अंदर अब कहीं लैंड के 1 इंच भी नहीं बची. ऐसे में कैसे पार्कक्स के अंदर उसको डेवलप किया जा सकता है? कैसे वेकेंट लैंड ढूंढे जा सकती है? सबके ऊपर हम काम कर रहे हैं. 

एआई समिट में यूथ कांग्रेस की तरफ से एक शर्टलेस प्रोटेस्ट हुआ. उसके बाद यह सवाल उठा कि क्या कांग्रेस देश की छवि को दिल्ली के जरिए नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है?

वो तो बहुत शर्मसार करने वाला प्रोटेस्ट था. प्रोटेस्ट इस देश में होते आए और होते रहने चाहिए. हेल्दी डेमोक्रेसी के लिए बहुत जरूरी है प्रोटेस्ट होना. लेकिन हर चीज की सेवाएं होती हैं. अब बताइए 1947 से लेके आज तक देश आज हुआ है. तो क्या बाकी पार्टियों ने प्रोटेस्ट नहीं किए? सभी पार्टी ने प्रोटेस्ट किए? क्यों विदेशी मेहमान देश में नहीं आए? पहले भी आए? क्या उनके सामने ऐसे प्रोटेस्ट किए गए? कभी नहीं किए गए? यह कांग्रेस का माफ करना मैं वर्ड नहीं यूज़ करना चाहता. 

लेकिन यह कांग्रेस का एक कपड़े तो वैसे ही उतार चुकी है. यह उन्होंने अपना नंगापन साबित किया है कि किस घर किस हद तक वो गिर सकते हैं और किस हद तक वो कर सकते हैं. आपको सीमाओं में रहकर सब करना होता है. और मुझे बड़ा दुख और खेद है कांग्रेस इस कदर नीचे चली गई कि उन्होंने कपड़े तक उतार दिए. वैसे तो वैसे ही उतरे हुए मैंने पहले भी कहा लेकिन पब्लिक के सामने और वह भी विदेशी मेहमानों के सामने ऐसा काम करना यह बहुत ही शर्मसार है और मेरा अभी भी मानना है राहुल गांधी कब समझेंगे कि राजनीति में कहां तक गिरा जा सकता है? यह कब वह समझेंगे और अगर वह समझेंगे तो कांग्रेस के लिए अच्छा होगा.

राहुल गांधी कहते हैं कि आज की सरकार विपक्ष की आवाज को जो उसका लोकतांत्रिक अधिकार है उसे दबाने की कोशिश करती है.

विपक्ष का गला तब घोटा गया था जब 1975 में इमरजेंसी लगाई गई थी. विपक्ष का गला उसको घुटना कहते हैं जब विपक्ष के नेताओं को बिना किसी कारण से उठा के जेलों में ठूस दिया गया था. विपक्ष का गला घोटना उसको कहते हैं जब जबरन लोगों की नसबंदी करी गई और विपक्ष जो बोलता था उसके लीडरों की और जल्दी करने का काम किया गया उसको गला दबाना कहते हैं. राहुल गांधी चुने हुए नेता हैं. विपक्ष के नेता हैं. वह जिस मुद्दे पर बात करना चाहते हैं. कोई उनको मना नहीं करता. 

विधानसभा लोकसभा के अंदर भी और लोकसभा के बाहर भी. बस नौटंकी करना अगर राहुल गांधी को समझ में आना चाहिए कि विपक्ष की आवाज उठाना और नौटंकी करने में क्या अंतर है. इसमें अंतर बहुत ज्यादा नहीं है. लेकिन अगर राहुल गांधी समझ पाए क्यों जिसको विपक्ष अपनी बात रखना कहता है वो बात नहीं वो नौटंकी है. कभी प्रधानमंत्री जी की सीट पर जाकर शोर मचाना यह जो काम है ये विपक्ष की आवाज उठाना नहीं है. नौटंकी करना नौटंकी करने पे कोई दिल्ली और देश का कोई समाधान निकलने वाला नहीं है. विपक्ष की ना कभी आवाज को कोई दबा सका है ना दबा सकेगा ना ही दबाने की कोशिश कर रहा है. 

देश की फॉरेन पॉलिसी की आड़ लेकर अपनी डोमेस्टिक पॉलिटिक्स को चमकाना लोकतंत्र के लिए घातक है?

उनके पास कोई ना तो उनके पास विज़न है, ना उनके पास कोई आईडियोलॉजी है. उनका अब बताइए वह फॉरेन पॉलिसी पे बात करते हैं. उनकी राजनीति केवल और केवल प्रधानमंत्री की कुर्सी की नजर की तरफ टिकी हुई है. जो कि कभी उनको मिलने वाली नहीं है. मैं बताना चाहता हूं यह हम कलयुग में जी रहे हैं. इसके बाद पता नहीं कितने युग आएंगे. यह सारे युग भी निकल जाएंगे. कांग्रेस फिर भी वापस आने वाली नहीं है. 

यह अंतर उनको समझ लेना चाहिए. यह जो फॉरेन नीति की नीति है इनको वो समझ में कभी आएगी नहीं. आप बताइए देश भर के अंदर दुनिया भर के अंदर माफ करना. दुनिया भर के अंदर जंग के आज ऐसी संभावनाएं बनी हुई है. ऐसे में हर मुल्क अपने फूंक-फूंक के कदम रखता है. कोई भी कदम रखा आपके देश के लिए हानिकारक हो सकता है. यह फॉरेन पॉलिसी का काम सरकार देखती है. हमारे फॉरेन मिनिस्टर खुद इतने सीनियर डिप्लोमेट है. देश के प्रधानमंत्री को सभी दुनिया के मुल्क जो हैं उनका सम्मान करते हैं. लेकिन राहुल गांधी जी जिनको खुद को आज तक अपने बारे में समझ में नहीं आया. वो आकर फॉरेन पॉलिसी का ज्ञान देते हैं. बताइए अब राहुल गांधी जी को फॉरेन पॉलिसी की क्या समझ में होगी जो आलूओं में से सोना बनाने की बात करते हैं. अब क्या ऐसे आदमी से हम फॉरेन पॉलिसी का ज्ञान लेंगे?

उनकी फॉरेन पॉलिसी क्या थी? उनकी फॉरेन पॉलिसी हम कभी नहीं अडॉप्ट कर सकते. देश का कोई भी इंसान अडॉप्ट नहीं कर सकता. उनकी फॉरेन पॉलिसी थी कि प्रधानमंत्री साइड पे खड़े हो जाते थे और सोनिया गांधी जी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ जाती थी. प्रधानमंत्री साइड पे खड़े हो जाते थे और राहुल गांधी आके उस कुर्सी पे बैठ जाता था. प्रधानमंत्री कुर्सी के पीछे खड़े राहुल गांधी के साथ और चीन के साथ समझौता राहुल गांधी कर रहे हैं. देश पूछ रहा है भैया यह कौन है जो लड़का कर रहा है? यह अगर फॉरेन पॉलिसी है इस फॉरेन पॉलिसी की भारतीय जनता पार्टी और देश के अंदर कोई जगह नहीं है. कोई स्थान नहीं है. 

दिल्ली सरकार ग्रीन दिल्ली की बात हमेशा करती है. आपको लगता है कि इसमें सुधार की कितनी और कब तक संभावना है?

सुधार होने की संभावना है. लेकिन पहले दिल्ली को एक समझना पड़ेगा कि दिल्ली के अंदर सुधार जो है यह लॉन्ग टर्म प्रोसेस के तहत ही हो सकता है. जो पोल्यूशन है, यह कहीं बाहर से नहीं आ रहा. अगर बाहर से आ रहा होता तो हम रोक लेते इसको. यह दिल्ली का खुद का दिया हुआ पोल्यूशन है. तो, हमें अपनी सिविक सेंस को बदलना पड़ेगा. सरकार कुछ काम कदम उठाएगी. कुछ दिल्ली के लोग उठाएंगे. हम क्या कदम उठाएंगे? हम दिल्ली की धूल को खत्म करें. दिल्ली की रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करें. एंड टू एंड रोड पेविंग करें. जो ग्रीन एरियाज बचे हुए हैं सड़क के ऊपर उस पे या तो ग्रीनरी लेके आ. 

जो ब्राउन एरियाज हैं उसको 100% पे करके मिट्टी को धूल कोने का काम बंद करें. हम ऐसी पॉलिसी लेके आए जिससे फॉसिल फ्यूल जो है वो कम हो. ईवी गाड़ियां ज्यादा आए. हम ऐसे पॉलिसीज लेके आए जिससे सड़कों का कूड़ा खत्म हो. यह काम हमें करने हैं और दिल्ली के लोगों को भी उसी तरह से बहुत सिविक सेंस को समझते हुए अपनी जिम्मेवारी का निर्वाहन करना है. पर मैं आश्वासन देता हूं हर साल ये पोल्यूशन कम करने की तरफ हम जरूर बढ़ेंगे. हम दिल्ली के कूड़े के पहाड़ को जब खत्म करेंगे तो कूड़े का एक मेजर पोर्शन खत्म होगा. दिल्ली के अंदर हम बार स्टेज फोर और थ्री के पुरानी गाड़ियों को बाहर करेंगे तो पोल्यूशन का एक कदम बहुत कम होगा. दिल्ली के अंदर जो इंडस्ट्री बिना पोल्यूशन चेकक्स के चल रही है उसके ऊपर रोक लगा के उसको पोलशन के दायरे में लेके आएंगे डीपीसीसी के तो पोलुशन कम करेंगे. ऐसे हम सभी कदम उठा रहे हैं जिससे दिल्ली के पोलुशन में कमी लाई जा सके. 

आप सिख कम्युनिटी के एक बहुत मजबूत चेहरा हैं और दूसरी तरफ पंजाब में भी आने वाले वक्त में चुनाव है. बीजेपी की क्या तैयारी?

पंजाब के लोगों ने एक एक्सपेरिमेंट किया था आम आदमी पार्टी का जो बुरी तरह से फेल हुआ. पंजाब में आज देश के सबसे ज्यादा गैंगस्टर्स का वहां पर बोलबाला है. सबसे ज्यादा मर्डर्स वहां पर हो रहे हैं. ड्रग्स आम आदमी पार्टी के खुद नेता तक बिकवाने लग पड़े हैं. आम आदमी पार्टी के राज में बहुत सारी पुलिस की ऐसी इन्वॉल्वमेंट सामने आई. पुलिस के लोग ड्रग्स बेचते देखे गए और आम आदमी पार्टी ने पंजाब को जितना कर्जा पिछले 50 सालों में 60 सालों में सभी नेताओं ने मिलकर चढ़ाया था उससे ज्यादा कर्जा एक 5 साल की एक टनोर के अंदर आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल ने पंजाब पर डाल दिया है. 

अरविंद केजरीवाल जी को पंजाब से कोई लेना देना नहीं कोई पीड़ा नहीं उनके मन में. उनको तो केवल एक राजसत्ता हथियाने के लिए चीज चाहिए थी ताकि पंजाब के हेलीकॉप्टर जहाज यूज किए जा रहे हैं. अरविंद केजरीवाल अनक्राउंड किंग बनकर बैठे हैं. पंजाब के लोगों ने जो एक्सपेरिमेंट किया था वो फेल हो गया. अब पंजाब के लोग समझ गए. अगर पंजाब को विकसित करना है तो भारतीय जनता पार्टी जिसने देश विकसित का एक बीड़ा उठाया है. आज यूपी के अंदर दूसरी बार सरकार क्यों बनी? क्योंकि यूपी को विकसित किया गया और क्राइम मुक्त किया गया. हरियाणा के अंदर क्यों तीसरी बार सरकार बनी? 

हरियाणा को विकसित किया गया और क्राइम मुक्त किया गया. गुजरात के अंदर पांचवी बार सरकार मध्य प्रदेश के अंदर पांचवी बार चौथी बार सरकार छत्तीसगढ़ के अंदर लगातार सरकार हर स्टेट के अंदर जहां-जहां भाजपा एक बार जाती है लोगों का विश्वास जीतती है. वहां पर डेवलपमेंट करती है. वहां का लॉ एंड आर्डर संभालती है. आज पंजाब का बच्चा-बच्चा ये देख रहा है कि पंजाब को अगर बचाना है तो भाजपा को लाना है. मुझे यकीन है जो एक्सपेरिमेंट फेल होने के बाद किसी को मौका मिलेगा तो इस बार भाजपा को मिलेगा.

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