इबोला के नए स्ट्रेन ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन, ग्लोबल इमरजेंसी घोषित, जानिए भारत को कितना खतरा

Should India Be Worried About Ebola Virus: दुनिया अभी कोरोना महामारी के प्रभावों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि इबोला वायरस ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के नए प्रकोप की पुष्टि के बाद वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं.

New strain of Ebola virus declared a global emergency Should India Be Worried
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Should India Be Worried About Ebola Virus: दुनिया अभी कोरोना महामारी के प्रभावों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि इबोला वायरस ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के नए प्रकोप की पुष्टि के बाद वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. शुरुआती वैज्ञानिक जांच यह संकेत दे रही है कि वायरस काफी समय से बिना पहचान में आए लोगों के बीच फैल रहा था. ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या यह नया स्ट्रेन दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन सकता है और भारत को इसे लेकर कितनी चिंता करनी चाहिए.

इबोला वायरस कैसे करता है संक्रमित?

इबोला उन खतरनाक वायरसों में गिना जाता है जिनकी मृत्यु दर काफी अधिक हो सकती है, लेकिन इसकी एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह कोरोना की तरह हवा में फैलने वाला वायरस नहीं है. विशेषज्ञों के मुताबिक यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीने, मल, मूत्र या अन्य शारीरिक द्रवों के सीधे संपर्क से फैलता है. यही वजह है कि मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मी और परिवार के सदस्य सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं. संक्रमण की चेन को रोकने के लिए संक्रमित व्यक्ति को जल्द अलग करना बेहद जरूरी माना जाता है.

शरीर के अंदर पहुंचने के बाद क्या करता है वायरस?

इबोला वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद सीधे प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर करने का काम करता है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह सबसे पहले लसीका ग्रंथियों में अपनी संख्या बढ़ाता है और फिर रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंच जाता है. यह उन कोशिकाओं को निशाना बनाता है जो सामान्य परिस्थितियों में शरीर को बीमारियों से बचाने का कार्य करती हैं. जब शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ने लगती है तो वायरस तेजी से फैलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है.

शुरुआती लक्षण क्यों बन जाते हैं सबसे बड़ी चुनौती?

इबोला की पहचान करना शुरुआती चरण में आसान नहीं होता. इसके लक्षण सामान्य वायरल बुखार, फ्लू या मलेरिया जैसे दिखाई दे सकते हैं. मरीज को बुखार, कमजोरी, सिरदर्द और शरीर दर्द जैसी समस्याएं होती हैं, जिन्हें अक्सर सामान्य संक्रमण समझ लिया जाता है. कई मामलों में कुछ समय के लिए मरीज की स्थिति बेहतर भी लग सकती है, लेकिन बाद में बीमारी अचानक गंभीर रूप धारण कर लेती है. गंभीर अवस्था में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव जैसी जटिलताएं सामने आ सकती हैं, जिससे मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है.

भारत के लिए कितना बड़ा है खतरा?

फिलहाल भारत में इबोला संक्रमण का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, जिससे तत्काल खतरे की संभावना कम मानी जा रही है. देश के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर निगरानी व्यवस्था, स्वास्थ्य जांच और संदिग्ध मामलों की पहचान के लिए विशेष प्रोटोकॉल पहले से मौजूद हैं. इसके अलावा बड़े अस्पतालों और स्वास्थ्य एजेंसियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए जाते हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक यात्रा और व्यापार के इस दौर में किसी भी संक्रामक बीमारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता. इसलिए घबराने के बजाय सतर्क रहना और स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करना ही सबसे बेहतर उपाय है.

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