देशभर में सोमवार, 20 अक्टूबर को दीपावली का पर्व बड़ी धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया। हर ओर रौशनी, सजावटऔर उत्सव का माहौल नजर आया. घरों में मिट्टी के दीयों की जगमगाहट और मंदिरों में हुई विशेष पूजा-अर्चना ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया. राजधानी दिल्ली में भी लोगों ने परंपरागत उल्लास के साथ यह त्योहार मनाया, लेकिन इसके साथ ही वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता भी बढ़ गई.
इस वर्ष सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद दिल्ली में कुछ शर्तों के साथ पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन पटाखों के उपयोग की इजाजत दी गई थी. इसके बावजूद रात में जमकर पटाखे फोड़े गए, जिससे राजधानी की हवा और भी अधिक प्रदूषित हो गई.
CM ने दिल्लीवासियों से की अपील
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इससे पहले दिल्लीवासियों से अपील की थी कि वे पारंपरिक और पर्यावरणहितैषी तरीकों से दिवाली मनाएं. उन्होंने लोगों से कहा था कि वे अधिक से अधिक दीयों का उपयोग करें, रंगोली बनाएं और मिठाइयों के माध्यम से खुशी साझा करें, ताकि पटाखों के कारण वायु गुणवत्ता और अधिक खराब न हो.
वायु गुणवत्ता गंभीर स्थिति की ओर
दिवाली की रात पटाखों के कारण दिल्ली की हवा और अधिक जहरीली हो गई. सोमवार को राजधानी का औसत 24 घंटे का एक्यूआई 345 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' की श्रेणी में आता है. रविवार को यह आंकड़ा 326 था. अधिकारियों का मानना है कि पटाखों की वजह से मंगलवार और बुधवार को एक्यूआई ‘गंभीर’ स्तर तक जा सकता है.
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सरकार का रुख
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. भाजपा सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कहा कि दिल्ली सरकार वर्षों से प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केवल दावे कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य नहीं दिखता. उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने न तो सड़कों की स्थिति सुधारी और न ही यमुना की सफाई में ईमानदारी दिखाई.
उन्होंने कहा, "भले ही शुरुआती चरण चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन सरकार का यह दावा है कि आने वाले समय में ठोस कदमों के माध्यम से वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण किया जाएगा. यमुना की सफाई को लेकर भी सरकार बड़े पैमाने पर प्रयासरत है."
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