पौने 3 लाख तनख्वाह, लाखों के भत्ते... कितनी सैलरी लेंगे देश के नए CJI सूर्यकांत? मिलेंगी ये सुविधाएं

CJI Surya Kant: जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें चीफ जस्टिस बने हैं. उनका कार्यकाल 14 महीने का होगा. ऐसे में जानते हैं कि देश के सीजेआई समेत सुप्रीम कोर्ट के जजों की सैलरी कितनी होती है.

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CJI Surya Kant: जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें चीफ जस्टिस बने हैं. उनका कार्यकाल 14 महीने का होगा. ऐसे में जानते हैं कि देश के सीजेआई समेत सुप्रीम कोर्ट के जजों की सैलरी कितनी होती है. इसके अलावा किस तरह के भत्ते व सुविधाएं मिलती हैं.  

CJI की सैलरी

CJI बनने के बाद जस्टिस सूर्यकांत को प्रति माह 2.80 लाख रुपये की सैलरी मिलेगी, जो कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जज वेतन अधिनियम के तहत निर्धारित है. यह सैलरी केवल बेसिक सैलरी है और इसमें अन्य भत्तों और सुविधाओं का समावेश नहीं किया गया है. CJI का यह वेतन देश में न्यायिक प्रणाली के सबसे बड़े अधिकारी के रूप में उनकी भूमिका को दर्शाता है. इस सैलरी के अलावा उन्हें अन्य कई सुविधाएं भी दी जाती हैं, जो उनके पद की गरिमा के अनुरूप होती हैं.

CJI को मिलने वाली विशेष सुविधाएं

सैलरी के अलावा, CJI को कई प्रकार की सरकारी सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं. इनमें दिल्ली में एक सरकारी बंगला, जो पूरी तरह से मुफ्त होता है, एक मोबाइल और लैंडलाइन फोन की मुफ्त सुविधा, और सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा की सुविधा शामिल है. इसके अलावा, CJI को बिजली और पानी की मुफ्त या रियायती सुविधा, मुफ्त मेडिकल सुविधाएं, प्राइवेट ड्राइवर, सहायक और सुरक्षा की व्यवस्था भी मिलती है. रिटायरमेंट के बाद उन्हें पेंशन और सुरक्षा का लाभ भी प्राप्त होता है. इन तमाम सुविधाओं के अलावा, महंगाई भत्ते (DA) और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी समय-समय पर बढ़ सकते हैं, जो उनकी सैलरी का एक अहम हिस्सा होते हैं.

जस्टिस सूर्यकांत की यात्रा

जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में हुआ था. उनका पालन-पोषण एक मिडिल क्लास परिवार में हुआ, जिससे उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी शिक्षा और करियर को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया. उनकी प्रारंभिक शिक्षा हरियाणा में हुई और फिर उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की. खास बात यह है कि जस्टिस सूर्यकांत ने कानून की पढ़ाई में प्रथम स्थान प्राप्त किया.

अपने करियर की शुरुआत उन्होंने हिसार में वकालत से की, और बाद में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में कुछ समय तक वकील के रूप में कार्य किया. जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और उन्होंने न्यायिक फैसलों के माध्यम से भारतीय न्याय व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम कदम उठाए.

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