नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है, जब जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली. राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह प्रतिष्ठित पद संभालने की शपथ दिलाई. जस्टिस सूर्यकांत ने बीआर गवई की जगह ली, जो हाल ही में CJI पद से रिटायर हुए थे. यह नियुक्ति न्यायपालिका के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है और उनके करियर की नई दिशा को दर्शाती है.
#WATCH | दिल्ली: जस्टिस सूर्यकांत ने राष्ट्रपति भवन में भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शपथ दिलाई।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 24, 2025
(सोर्स: DD न्यूज़) pic.twitter.com/bAWAWbWpjf
PM मोदी भी समारोह में हुए शामिल
PM मोदी ने X पर पोस्ट किया- "भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया. उनके आगामी कार्यकाल के लिए उन्हें शुभकामनाएं." वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लिखा- "भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने पर जस्टिस सूर्यकांत को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं. उनकी पदोन्नति हमारी न्याय प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर 14 महीने के कार्यकाल की शुरुआत का प्रतीक है. मुझे विश्वास है कि उनके नेतृत्व में संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत ताकत और कानून के शासन में जनता का विश्वास और मजबूत होगा, जिससे प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय का वादा आगे बढ़ेगा."
Attended the oath taking ceremony of Justice Surya Kant as the Chief Justice of India. Best wishes to him for his tenure ahead. pic.twitter.com/62yeSlfmsx
— Narendra Modi (@narendramodi) November 24, 2025
जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल
जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 24 नवंबर 2025 से शुरू हो चुका है और यह 9 फरवरी 2027 तक चलेगा. उनका कार्यकाल दो साल से भी कम समय का होगा, लेकिन इस दौरान उनका नेतृत्व भारतीय न्यायपालिका में कई अहम फैसलों का मार्गदर्शन करेगा. केंद्रीय कानून मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा नवंबर 2023 की शुरुआत में की थी, और उसी समय से यह फैसला लागू हुआ. जस्टिस सूर्यकांत के पास अब भारतीय न्यायपालिका की सबसे बड़ी कुर्सी है, और उनकी भूमिका भारत के न्यायिक ढांचे के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होने वाली है.
हरियाणा के एक छोटे से गांव से सुप्रीम कोर्ट तक
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था. उनके जीवन की शुरुआत साधारण परिस्थितियों में हुई थी, लेकिन उनकी मेहनत और कड़ी लगन ने उन्हें भारतीय न्यायपालिका की ऊंची उड़ान तक पहुंचाया. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गृह नगर हिसार से प्राप्त की और फिर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए. 5 अक्टूबर 2018 को उन्हें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जहाँ उनके द्वारा किए गए कई ऐतिहासिक निर्णयों ने उन्हें न्यायिक समुदाय में एक विशिष्ट स्थान दिलवाया.
जस्टिस सूर्यकांत की संपत्ति
देश के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की संपत्ति पर नजर डालें तो यह उनके जीवन के साधारण लेकिन संपन्न तरीके को दर्शाता है. उनके पास खुद का कोई वाहन नहीं है, लेकिन उनकी पत्नी के पास एक वैगनआर कार है. जहां तक उनकी संपत्ति का सवाल है, तो जस्टिस सूर्यकांत के पास भारत भर में कुल छह आवासीय संपत्तियां और दो भूखंड हैं. इनमें चंडीगढ़ के सेक्टर 10 में एक कनाल का घर, न्यू चंडीगढ़ के इको सिटी- II में 500 वर्ग गज का प्लॉट, और चंडीगढ़ के सेक्टर 18-सी में 192 वर्ग गज का घर शामिल हैं.
इसके अलावा, जस्टिस सूर्यकांत के पास पंचकुला के गोलपुरा गांव में 13.5 एकड़ कृषि भूमि भी है. गुरुग्राम के सुशांत लोक-I में 300 वर्ग गज का प्लॉट, DLF-II में 250 वर्ग गज का घर और नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-I में 285 वर्ग गज की संपत्ति भी उनकी सूची में है, जिसमें ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट भी शामिल हैं.
उनकी संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा उनके गृह नगर हिसार में स्थित है, जहाँ उनके पास पेटरवार में 12 एकड़ कृषि भूमि है. इसके अलावा, हिसार अर्बन एस्टेट- II और पेटरवार दोनों स्थानों पर उनकी पैतृक संपत्तियों में एक तिहाई हिस्सा भी है. इन संपत्तियों के माध्यम से जस्टिस सूर्यकांत का जीवन समृद्ध है, लेकिन उनकी जीवनशैली हमेशा एक साधारण और समर्पित न्यायाधीश की रही है.
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