Israel Spain Defence Deal: गाजा में इजरायल द्वारा चलाए जा रहे सैन्य अभियान के चलते उसकी वैश्विक छवि को गहरा धक्का पहुंचा है, और अब इसका सीधा असर उसके रक्षा निर्यात उद्योग पर दिखने लगा है. दुनिया के कई देशों में इजरायल की नीतियों के खिलाफ जनआक्रोश बढ़ रहा है, और इसके चलते अब रक्षा अनुबंधों की श्रृंखलाबद्ध समाप्ति शुरू हो चुकी है. सबसे ताज़ा झटका इजरायल को अपने यूरोपीय सहयोगी स्पेन से लगा है, जिसने राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम के साथ एक महत्वपूर्ण हथियार सौदे को रद्द कर दिया है.
यह केवल एक सौदा नहीं, बल्कि एक संकेत है कि इजरायली रक्षा कंपनियों के सामने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक गंभीर भरोसे का संकट खड़ा हो गया है. स्पेन के इस फैसले ने उन अरबों डॉलर के संभावित सौदों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं जो अभी बातचीत के स्तर पर थे.
रद्द हुए सौदे और बढ़ता वित्तीय जोखिम
स्पेन ने हाल ही में इजरायल की रक्षा कंपनी राफेल से लाइटनिंग 5 टारगेटिंग पॉड्स की खरीद को रद्द कर दिया है. इन टारगेटिंग सिस्टम्स की मदद से 100 किलोमीटर तक की दूरी से हवाई बमों को सटीकता से निर्देशित किया जा सकता था. यह सौदा 21.8 करोड़ डॉलर का था, जो अब रद्द हो चुका है.
इसके अलावा, एल्बिट सिस्टम्स के साथ स्पेन की दो रक्षा कंपनियों का 76.3 करोड़ डॉलर का एक अन्य रॉकेट सिस्टम समझौता भी निलंबित कर दिया गया है. इस अनुबंध में एल्बिट का हिस्सा करीब 15 करोड़ डॉलर का था. यही नहीं, वर्ष की शुरुआत में भी स्पेन ने एल्बिट की एक सहायक कंपनी से गोला-बारूद की आपूर्ति से जुड़ा ऑर्डर वापस ले लिया था.
बंदरगाहों और कच्चे माल पर रोक
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने गाजा में इजरायली कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है. उनके नेतृत्व में स्पेन सरकार ने न केवल हथियार निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है, बल्कि इजरायली सैन्य जहाजों को स्पेनिश बंदरगाहों में प्रवेश करने से भी रोक दिया गया है.
इतना ही नहीं, कच्चे माल के निर्यात पर रोक के चलते अब इजरायली रक्षा कंपनियां वैकल्पिक आपूर्ति शृंखलाओं की तलाश करने पर मजबूर हो गई हैं. यह इजरायली रक्षा उद्योग की लागत और उत्पादन क्षमता, दोनों को प्रभावित कर सकता है.
अरबों डॉलर के सौदों पर मंडराता खतरा
इजरायली मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के महीनों में निलंबित या रद्द किए गए रक्षा सौदों का कुल मूल्य 65.4 करोड़ डॉलर तक पहुंच चुका है. यह आंकड़ा और बढ़ सकता है, क्योंकि अन्य देश भी इसी तरह के कदम उठाने की सोच रहे हैं, खासकर वे जो गाजा युद्ध में तत्काल संघर्ष विराम की मांग कर रहे हैं.
डिफेंस सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट केवल वित्तीय नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर भी इजरायल के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है. इजरायली रक्षा उद्योग, जो अब तक दुनिया भर में अपनी तकनीकी क्षमता और नवाचार के लिए जाना जाता था, अब एक वैश्विक दबाव के घेरे में है.
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