नेपाल इन दिनों राजनीतिक उथल-पुथल के ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां जनता का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा. राजधानी काठमांडू से लेकर कई बड़े शहरों तक, सरकार के खिलाफ विरोध की लपटें फैल चुकी हैं. सोमवार से शुरू हुए जनआंदोलन ने मंगलवार को और उग्र रूप धारण कर लिया.
प्रदर्शनकारियों ने बालकोट स्थित प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के निजी निवास को आग के हवाले कर दिया. यही नहीं, राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास पर भी भीड़ ने कब्जा जमाकर तोड़फोड़ और आगजनी की. हालात इतने बिगड़े कि कई मंत्रियों के घरों को भी निशाना बनाया गया — जिनमें गृह, विदेश, संचार, और ऊर्जा मंत्रियों के घर शामिल हैं.
त्रिभुवन एयरपोर्ट बंद, संसद भवन की ओर बढ़ रही भीड़
सुरक्षा की दृष्टि से काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया है. प्रदर्शनकारी अब संसद भवन की ओर कूच कर रहे हैं. रास्ते में लगाए गए सारे बैरिकेड्स ध्वस्त किए जा चुके हैं. अब तक की हिंसा में 21 लोगों की मौत हो चुकी है और 400 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं.
इस्तीफों की बाढ़ गठबंधन सरकार खतरे में
तेज़ी से बिगड़ते हालातों के बीच, नेपाल की गठबंधन सरकार में दरारें उभरने लगी हैं. कई बड़े नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है. डिप्टी पीएम प्रकाश मान सिंह ने मंगलवार को पद त्याग दिया. नेपाली कांग्रेस ने अपने सभी मंत्रियों को त्यागपत्र देने के निर्देश दिए. अब तक गृह, स्वास्थ्य, कृषि, विदेश, संचार, ऊर्जा, पर्यटन और खेल मंत्री अपने पद छोड़ चुके हैं. पेयजल मंत्री प्रदीप यादव (पीपुल्स सोशलिस्ट पार्टी) ने भी पद से इस्तीफा दे दिया है. नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने भी नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का ऐलान किया है.
पीएम ओली ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, सरकार पर संकट के बादल
भयावह होते हालातों को देखते हुए पीएम केपी शर्मा ओली ने सभी दलों को मंगलवार शाम 6 बजे बैठक के लिए आमंत्रित किया है. हालांकि सूचना मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग का कहना है कि ओली इस्तीफा नहीं देंगे.
ओली ने बयान जारी करते हुए कहा,
“देश में हिंसा की जो घटनाएं हुई हैं, वे दुखद हैं. हम जनता की भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी समस्या का हल केवल संवाद और लोकतांत्रिक तरीकों से निकाला जाना चाहिए.”
नेपाल की राजनीतिक तस्वीर: गठबंधन सरकार की दरकती दीवारें
जुलाई 2024 में बनी यह गठबंधन सरकार CPN (UML) और नेपाली कांग्रेस के बीच साझेदारी पर आधारित थी. जहां ओली की पार्टी के पास 79 सीटें थीं, वहीं देउबा की नेपाली कांग्रेस के पास 88 सीटें हैं. मौजूदा इस्तीफों और आंतरिक असंतोष के बाद सरकार का अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है.
यह भी पढ़ें: 'छोटे देशों को परेशान करता है अमेरिका', ट्रंप पर फायर हुए ड्रैगन; जमकर किया जुबानी वार