संविधान में हो संशोधन, संसद को किया जाए भंग... क्या चाहते हैं नेपाल के Gen-Z? रख दी ये बड़ी डिमांड

Nepal Gen-Z Protest: नेपाल में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है, जहां युवा Gen-Z समूह ने सरकार विरोधी प्रदर्शन की अगुवाई कर संसद भंग करने और संविधान में संशोधन करने की जोरदार मांग की है.

Nepal Gen-Z protests demand parliament dissolution and constitution amendment
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Nepal Gen-Z Protest: नेपाल में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है, जहां युवा Gen-Z समूह ने सरकार विरोधी प्रदर्शन की अगुवाई कर संसद भंग करने और संविधान में संशोधन करने की जोरदार मांग की है. ये युवा कार्यकर्ता देश में हो रहे बदलाव और सुधारों के लिए सड़कों पर हैं, जिनके पीछे जनता की भावनाओं को प्रतिबिंबित करने का उद्देश्य है. इस आंदोलन के बीच अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन युवा नेता समाधान की उम्मीद में संवाद और सहयोग पर जोर दे रहे हैं.

Gen-Z का उद्देश्य: एक नया नेपाल

Gen-Z आंदोलन के प्रतिनिधि दिवाकर दंगल, अमित बनिया और जुनल दंगल ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह से नागरिक है और इसे राजनीतिक दलों के स्वार्थों से दूर रखा जाना चाहिए. उनका कहना है कि इस आंदोलन का मकसद नेपाल की राष्ट्रीय संप्रभुता, एकता और आत्म-सम्मान को बनाए रखना है. उन्होंने सभी नेपाली लोगों से इस चुनौतीपूर्ण समय में एकजुट होने का आह्वान किया.

संसद भंग और संविधान में बदलाव की मांग

युवा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका संविधान को खत्म करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन वे चाहते हैं कि देश की वास्तविक समस्याओं और जनता की आवाज को ध्यान में रखते हुए संविधान में जरूरी संशोधन किए जाएं. आंदोलन के कुछ नेता पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की और नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व सीईओ कुलमन घीसिंग को नए प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त मानते हैं.

Gen-Z: सत्ता में नहीं, प्रहरी के रूप में

Gen-Z के एक अन्य नेता ने बताया कि वे सत्ता में हिस्सा लेने के इच्छुक नहीं हैं बल्कि एक प्रहरी के रूप में देश की सेवा करना चाहते हैं. उनका मानना है कि वे सरकार के प्रति निगरानी रखते हुए जनता के अधिकारों की रक्षा करेंगे और किसी भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे.

प्रदर्शन और हताहतों की संख्या

नेपाल में पिछले दिनों हुए विरोध प्रदर्शनों ने राजनीतिक स्थिरता को झकझोर दिया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,338 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं. इसी बीच, पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली ने भारी विरोध के बीच पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे देश का राजनीतिक संकट और भी गहरा गया है.

समाधान की ओर उम्मीद

हालांकि प्रदर्शन जारी हैं, लेकिन Gen-Z के नेता संवाद और सहयोग से समस्या का समाधान निकालने पर जोर दे रहे हैं. सेना मुख्यालय में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने शांति और लोकतंत्र की रक्षा का संदेश दिया है. अब यह देखना बाकी है कि इस युवा आंदोलन से नेपाल की राजनीतिक दशा में क्या बदलाव आते हैं.

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