पहले बिगाड़ा...अब नेपाल को सवारेंगे Gen-Z, कर्फ्यू के बाद दुकानें फिर से खुलने को तैयार

काठमांडू की गलियों में अब फिर से चहल-पहल लौटने लगी है. हाल ही में हिंसक विरोध-प्रदर्शनों से जूझ रहे नेपाल में अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं. शुक्रवार को देश की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली.

Nepal Curfew removed after huge protest shops will reopen
Image Source: Social Media

काठमांडू की गलियों में अब फिर से चहल-पहल लौटने लगी है. हाल ही में हिंसक विरोध-प्रदर्शनों से जूझ रहे नेपाल में अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं. शुक्रवार को देश की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली, जिसके बाद राजनीतिक अस्थिरता पर कुछ हद तक नियंत्रण आता दिखाई दे रहा है.

शनिवार सुबह तक देशभर से कर्फ्यू हटा लिया गया और सेना के सहयोग से नागरिकों ने सड़कों की सफाई, सार्वजनिक इमारतों की मरम्मत और रंगाई-पुताई जैसे कार्यों में खुद बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया. खास बात यह रही कि इसमें जनरेशन Z – यानी युवा वर्ग ने अग्रणी भूमिका निभाई.

बंद और बर्बादी के बाद अब फिर से खुल रही हैं दुकानें

लगातार कई दिनों तक बंद रहे बाजार, सुपरमार्केट, सब्ज़ी मंडियां और ऑफिस अब धीरे-धीरे खुलने लगे हैं. लोग अपनी दिनचर्या में लौट रहे हैं. राजधानी काठमांडू समेत देश के अन्य इलाकों में सड़कों की मरम्मत और सार्वजनिक स्थानों की सफाई का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है. यह वही स्थान हैं, जिन्हें हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा था. प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी भवनों को आग के हवाले कर दिया था, जिसके चलते प्रशासन को सुरक्षा के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी थी.

विरोध की जड़ में क्या था?

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाने की कोशिश की. बीते सोमवार को पूरे देश में युवाओं के नेतृत्व में जबरदस्त प्रदर्शन हुए. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में कई लोगों की जान चली गई. इसके बाद मामला और भड़क गया. स्थिति इस हद तक बिगड़ी कि गुस्साई भीड़ प्रधानमंत्री कार्यालय तक जा पहुंची. हालात को संभालने में विफल रहने पर प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली को अगले ही दिन यानी मंगलवार को इस्तीफा देना पड़ा. सरकार ने उसी रात सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध भी हटा लिया था.

जनरेशन Z: आंदोलन की अगुवाई में सबसे आगे

नेपाल पुलिस द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 51 लोगों की मौत हुई है, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है. इन विरोधों की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इन्हें किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय युवा पीढ़ी ने संगठित किया. जनरेशन Z, यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं ने भ्रष्टाचार, सेंसरशिप और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज उठाई. इन प्रदर्शनों ने देश की राजनीति को एक झटका दिया और सेना को हस्तक्षेप करना पड़ा.

सुशीला कार्की पर बड़ी जिम्मेदारी

बदलते हालात के बीच नेपाल की सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है. उनका मुख्य काम आगामी चुनावों की निगरानी और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना होगा. सेना की तरफ से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि अब देश में किसी प्रकार का कर्फ्यू या प्रतिबंध लागू नहीं है.

यह भी पढ़ें: हमले में 2 लाख से अधिक फिलिस्तीनियों की हुई मौत, खुद IDF के पूर्व आर्मी चीफ ने कर लिया कबूल; क्या करेंगे नेतन्याहू?