हमले में 2 लाख से अधिक फिलिस्तीनियों की हुई मौत, खुद IDF के पूर्व आर्मी चीफ ने कर लिया कबूल; क्या करेंगे नेतन्याहू?

गाजा पट्टी में जारी युद्ध को लगभग दो साल पूरे होने को हैं, और इसी बीच इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के पूर्व चीफ़ ऑफ स्टाफ हर्ज़ी हलेवी का एक अहम बयान सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल मचा दी है.

Israel and hamas war revealed and accept  2 lakh palestines died in war with gaza
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गाजा पट्टी में जारी युद्ध को लगभग दो साल पूरे होने को हैं, और इसी बीच इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के पूर्व चीफ़ ऑफ स्टाफ हर्ज़ी हलेवी का एक अहम बयान सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल मचा दी है. दक्षिणी इजरायल के एक छोटे से सामुदायिक कार्यक्रम में बोलते हुए, हलेवी ने इस युद्ध की भयावहता का जो चित्र खींचा, वह चौंकाने वाला है.

पूर्व जनरल ने कहा कि गाजा में अब तक 2 लाख से अधिक लोग या तो मारे जा चुके हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं. उन्होंने साफ़ कहा कि करीब 22 लाख की आबादी वाले इस तटीय इलाके के 10 प्रतिशत से ज़्यादा नागरिक सीधे तौर पर इस संघर्ष की चपेट में आए हैं. गौर करने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से मेल खाता है. वही मंत्रालय जिसे इजरायली अधिकारी अक्सर ‘हमास समर्थित प्रचार तंत्र’ बताकर खारिज करते आए हैं. लेकिन, संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इन आंकड़ों को वास्तविक और भरोसेमंद मानती हैं.

आंकड़ों की सच्चाई

गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 से लेकर अब तक 64,718 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,63,859 से अधिक लोग घायल हुए हैं. इसके अलावा हज़ारों अब भी मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है. हलेवी ने इस दौरान स्वीकार किया कि यह युद्ध किसी "सामान्य सैन्य अभियान" से कहीं बड़ा और खतरनाक है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि इजरायल को पहले ही निर्णायक कदम उठाने चाहिए थे. उनके मुताबिक, "हमने पहली ही घड़ी में अपनी पूरी ताकत दिखा दी — लेकिन दुर्भाग्य से, वह पहली घड़ी 7 अक्टूबर को आई, उससे पहले नहीं."

सैन्य निर्णय और कानूनी सलाह

यह बयान उन्होंने उस समय दिया जब वे आइन हाबेसोर नामक सामुदायिक क्षेत्र के नागरिकों से संवाद कर रहे थे. यह वही इलाका है जिसने हमास के हमले के दौरान खुद को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी. अपने भाषण में हलेवी ने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायली सेना ने सभी कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के दायरे में रहकर अंजाम दिया है. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी कानूनी सलाहकार ने कभी उनके या उनके मातहतों के फैसलों पर लगाम नहीं लगाई. उनका यह बयान इस ओर भी इशारा करता है कि IDF में कानूनी सलाह का इस्तेमाल कई बार केवल अंतरराष्ट्रीय आलोचना को शांत करने और सैन्य कार्रवाई को ‘वैध’ दिखाने के लिए किया गया है.

मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

हलेवी की इस स्वीकारोक्ति के बाद मानवाधिकार संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. इजरायली मानवाधिकार वकील माइकल स्फार्ड ने कहा, “यह साफ है कि सैन्य कानूनी सलाहकारों की भूमिका केवल एक औपचारिकता तक सीमित रह गई है. असल में उनकी सलाह को गंभीरता से लिया ही नहीं जाता.” साथ ही, हाल की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा सेना प्रमुख एयाल जामीर ने भी कुछ मामलों में कानूनी सलाह को दरकिनार किया है, जिससे इस पूरे तंत्र पर और सवाल उठने लगे हैं.

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