नई दिल्ली: देश को 31 मार्च तक नक्सल प्रभावित इलाकों से मुक्त करने के लक्ष्य के तहत सुरक्षाबलों ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है. इस ऑपरेशन का नाम KGH-2 (कर्रेगुट्टा हिल्स) रखा गया है. यह कार्रवाई मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ में की जा रही है. इसमें CRPF और छत्तीसगढ़ पुलिस समेत अन्य सुरक्षा बलों के करीब 2000 जवान शामिल हैं.
मंगलवार से शुरू किए गए इस अभियान के पीछे खुफिया जानकारी अहम वजह बताई जा रही है. इनपुट मिला था कि नक्सलियों के चार शीर्ष नेताओं में सबसे ऊपर माने जाने वाले देवजी उर्फ थिप्परी तिरूपति अपने कुछ साथियों के साथ छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के आसपास मौजूद हैं. इसके बाद तुरंत ऑपरेशन लॉन्च किया गया.
चार टॉप लीडरों पर फोकस
अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल नक्सलियों की शीर्ष केंद्रीय कमेटी और पोलित ब्यूरो में चार बड़े नेता सक्रिय हैं. इनमें सबसे ऊपर मोस्ट वांटेड देवजी उर्फ देवन्ना उर्फ चेतन का नाम है. वह मूल रूप से तेलंगाना का रहने वाला है और उसकी गतिविधियां छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर के आसपास देखी गई हैं.
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि देश को नक्सल मुक्त बनाने के अभियान में देवजी को पकड़ना या निष्क्रिय करना बेहद जरूरी है. पहली कोशिश यही है कि वह आत्मसमर्पण करे. अगर ऐसा नहीं होता है, तो मुठभेड़ की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.
देवजी के अलावा मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना, मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सागर और मल्लाराजी रेड्डी उर्फ संग्राम उर्फ सागर भी शीर्ष नेताओं में शामिल हैं. इनमें से मिशिर बेसरा झारखंड से जुड़ा है, जबकि बाकी तीनों का संबंध तेलंगाना से बताया जाता है. मल्लाराजी की मूवमेंट ओडिशा-आंध्र प्रदेश क्षेत्र में देखी गई है, जबकि अन्य तीनों के छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के आसपास होने की जानकारी मिली है.
पहले भी चला था KGH-1 अभियान
इससे पहले 21 अप्रैल से 11 मई तक KGH-1 ऑपरेशन चलाया गया था. उस अभियान में 31 नक्सली मारे गए थे. अब KGH-2 के जरिए बचे हुए शीर्ष नेताओं और अन्य सक्रिय नक्सलियों पर दबाव बढ़ाया जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार, इन चार बड़े नेताओं के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों में करीब 300 नक्सली अभी भी सक्रिय हैं. सुरक्षा बलों की कोशिश है कि वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आएं. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी.
कठिन इलाका, लेकिन अभियान जारी
कर्रेगुट्टा पहाड़ी क्षेत्र करीब 60 किलोमीटर लंबा और 5 से 20 किलोमीटर तक चौड़ा है. पिछले साल के अभियान में इसके बड़े हिस्से को नक्सलियों से मुक्त कराया गया था, लेकिन कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण पूरा इलाका साफ नहीं हो सका था. इसी वजह से अब दोबारा व्यापक स्तर पर KGH-2 ऑपरेशन शुरू किया गया है.
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