NASA Artemis II: अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने हाल ही में अपनी महत्वाकांक्षी आर्टेमिस II मिशन के लॉन्च की तारीख की घोषणा की है. यह मिशन 1 अप्रैल 2026 को लॉन्च होगा, और इसके जरिए चार अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों ओर यात्रा करेंगे. यह मिशन चांद के आसपास के क्षेत्र में पहला मानवयुक्त मिशन होगा, और इससे पहले इंसान ने 1972 में अपोलो-17 मिशन के तहत चांद पर कदम रखा था. नासा का यह आर्टेमिस II मिशन न केवल चांद के करीब एक नई यात्रा का प्रतीक है, बल्कि यह गहरे अंतरिक्ष में इंसान की मौजूदगी के लिए एक अहम कदम भी है.
आर्टेमिस II मिशन क्या है?
नासा का आर्टेमिस II मिशन इस मायने में विशेष है कि इसमें चार अंतरिक्ष यात्री चांद के आसपास से घूमकर पृथ्वी की ओर लौटेंगे, लेकिन चांद पर उतरने की योजना नहीं है. इस मिशन के लिए नासा ने अपनी सबसे शक्तिशाली SLS रॉकेट का इस्तेमाल किया है, जो अंतरिक्ष यात्री और ओरियन कैप्सूल को चांद के पास तक ले जाएगा. यह मिशन 10 दिनों का होगा, और इसमें ओरियन कैप्सूल के विभिन्न सिस्टम जैसे कि लाइफ सपोर्ट, नेविगेशन, कम्युनिकेशन और हीट शील्ड की जांच की जाएगी.
नासा ने आर्टेमिस II मिशन को एक क्रूड टेस्ट के रूप में पेश किया है, जिसका मतलब है कि यह मिशन आर्टेमिस कार्यक्रम के लिए मानवयुक्त उड़ान का परीक्षण होगा. मिशन की सफलता की स्थिति में, अगला कदम चांद पर उतरना और वहां इंसानों की स्थायी बस्ती बनाना होगा.
अंतरिक्ष यात्री और उनकी यात्रा की तैयारी
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे, जिनमें कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन का नाम शामिल है. ये सभी अंतरिक्ष यात्री अब फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर पहुंच चुके हैं, और अब उनकी तैयारियां पूरी तरह से शुरू हो चुकी हैं. अंतरिक्ष यात्री शुक्रवार को ह्यूस्टन से T-38 जेट विमान से कैनेडी स्पेस सेंटर पहुंचे, जहां से वे अंतरिक्ष मिशन की अंतिम तैयारी करेंगे.
मंगल ग्रह की ओर एक कदम
नासा का आर्टेमिस II मिशन सिर्फ चांद तक सीमित नहीं रहेगा. मिशन के बाद नासा के पास एक और बड़े लक्ष्य की योजना है - चांद पर स्थायी इंसानी बस्ती बनाना. नासा के अधिकारियों ने कहा है कि आर्टेमिस मिशन के सफल होने के बाद, चांद पर रहने की योजना और मंगल ग्रह पर इंसान भेजने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जाएंगे. यह मिशन गहरे अंतरिक्ष में मानव की मौजूदगी को सुनिश्चित करने के प्रयासों की एक शुरुआत है, जो अगले कुछ दशकों में नई खोजों की ओर अग्रसर होगा.
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