चांद पर मिलिट्री बेस बनाने की तैयारी में अमेरिका, स्पेस में होगा NASA का दबदबा! कितना होगा खर्च?

अमेरिका ने अंतरिक्ष में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक नई और बड़ी योजना सामने रखी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में नासा ने चांद की सतह पर स्थायी बेस बनाने का फैसला किया है.

NASA America is preparing to build a military base on the moon
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

अमेरिका ने अंतरिक्ष में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक नई और बड़ी योजना सामने रखी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में नासा ने चांद की सतह पर स्थायी बेस बनाने का फैसला किया है. इस मिशन पर लगभग 20 अरब डॉलर खर्च किए जाने का अनुमान है. इस कदम को वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

नासा ने अपनी पुरानी योजना में बदलाव करते हुए चांद की कक्षा में स्टेशन बनाने के बजाय उसकी सतह पर ही बेस बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है. इस मिशन में आधुनिक रोबोटिक लैंडर और ड्रोन की मदद ली जाएगी, जो निर्माण कार्य और रिसर्च में अहम भूमिका निभाएंगे.

इसके साथ ही भविष्य में चांद पर ऊर्जा के लिए परमाणु शक्ति का उपयोग करने की योजना भी तैयार की जा रही है, ताकि बेस को लंबे समय तक सक्रिय रखा जा सके.

अपोलो जैसी ऐतिहासिक वापसी की तैयारी

नासा के प्रमुख जेरेड आइजैकमैन के अनुसार, यह मिशन 1960 के दशक के अपोलो कार्यक्रम की तरह ही ऐतिहासिक हो सकता है. उसी कार्यक्रम के जरिए अमेरिका ने पहली बार इंसान को चांद पर पहुंचाया था.

अब लक्ष्य है कि अमेरिका फिर से चांद पर वापसी करे और वहां स्थायी मौजूदगी स्थापित करे.

चीन के साथ तेज होती अंतरिक्ष होड़

अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब चीन भी अपने चंद्र मिशन को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. चीन ने 2030 तक अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर उतारने का लक्ष्य तय किया है.

झांग जिंगबो के मुताबिक, उनकी तैयारियां लगातार आगे बढ़ रही हैं और तय समय पर मिशन पूरा करने की कोशिश जारी है. इससे दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष में प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है.

निजी कंपनियां भी होंगी शामिल

इस मिशन में निजी क्षेत्र की कंपनियों की भी अहम भूमिका होगी. एलन मस्क की स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन नासा के लिए लूनर लैंडर तैयार कर रही हैं.

हालांकि 2028 तक इंसानों को चांद पर भेजने का लक्ष्य अभी थोड़ा पीछे चल रहा है, लेकिन इस दिशा में काम जारी है.

नासा भविष्य में मंगल ग्रह के लिए परमाणु ऊर्जा से चलने वाला अंतरिक्ष यान भेजने की योजना पर भी काम कर रहा है. यह तकनीक लंबी दूरी के अंतरिक्ष मिशनों को अधिक प्रभावी बना सकती है.

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