नागालैंड के सुखोवी क्षेत्र के पास असम राइफल्स के वाहन के निकट हुए संदिग्ध आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस धमाके में एक जवान ने देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया, जबकि चार अन्य जवान घायल हो गए. घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आईं और पूरे क्षेत्र को घेरकर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है. फिलहाल हमले के पीछे किस उग्रवादी संगठन का हाथ है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
संदिग्ध IED विस्फोट में एक जवान शहीद
जानकारी के अनुसार, असम राइफल्स का वाहन सुखोवी क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी उसके पास जोरदार विस्फोट हुआ. शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि यह हमला आईईडी के जरिए किया गया. विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि एक जवान मौके पर ही शहीद हो गया, जबकि चार अन्य जवान घायल हो गए. घायल सैनिकों को तत्काल नजदीकी सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है. सैन्य अधिकारियों की ओर से उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा सर्च ऑपरेशन
घटना के तुरंत बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को अपने कब्जे में लेकर तलाशी अभियान शुरू कर दिया. अतिरिक्त सुरक्षा बलों की टुकड़ियां भी मौके पर भेजी गई हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जा सके. सुखोवी और उसके आसपास के जंगलों में संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियां विस्फोट के तरीके, इस्तेमाल किए गए विस्फोटक और संभावित हमलावरों की पहचान करने में जुटी हैं.
एक सप्ताह के भीतर दूसरी बड़ी घटना
पूर्वोत्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर यह एक सप्ताह के भीतर दूसरा बड़ा हमला माना जा रहा है. इससे पहले 6 जुलाई को मणिपुर के उखरुल जिले में असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया था. उस हमले में 40वीं बटालियन के दो जवान शहीद हो गए थे. शहीद जवानों की पहचान वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह और राइफलमैन सीएम सिंह के रूप में हुई थी. दोनों गंभीर रूप से घायल हुए थे और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था. लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने पूर्वोत्तर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं.
हमलावरों की तलाश में जंगलों में संयुक्त अभियान
ताजा विस्फोट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने संदिग्ध उग्रवादियों की तलाश तेज कर दी है. सुखोवी और आसपास के घने जंगलों में सेना, असम राइफल्स और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त टीमें लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रही हैं. इलाके में आने-जाने वाले रास्तों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि हमलावर किसी भी हालत में बचकर न निकल सकें. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही विस्फोट के पीछे जिम्मेदार संगठन और हमले की पूरी साजिश का खुलासा किया जाएगा.
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